अमेरिका और ईरान के बीच बना टकराव फिलहाल सुलझता नहीं दिख रहा है. ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. काजेम गरीबाबादी ने परमाणु मुद्दे पर अमेरिका को दोटूक जवाब दे दिया है. उन्होंने ईरान के 60 पर्सेंट एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपने और 20 साल तक एनरिचमेंट रोकने जैसी शर्तों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. ईरानी मंत्री ने होर्मुज खोलने और बातचीत की टेबल पर लौटने के लिए अपनी शर्तें भी बताई हैं. उन्होंने एनरिच्ड यूरेनियम का स्टेटस भी बताया है.
अमेरिका से वार्ता 3 मुद्दों पर केंद्रित
डॉ. गरीबाबादी ने कहा कि यूरेनियम मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित थी. इनमें पहला, ईरान आगे यूरेनियम को डेवलप नहीं करेगा. दूसरा, मौजूदा यूरेनियम भंडार का क्या होगा. और तीसरा बिंदु यूरेनियम एनरिचमेंच का था. उन्होंने कहा कि ईरान एनरिच्ड यूरेनियम के ट्रांसफर, एनरिचमेंट कम करने और उसे फ्यूल रॉड्स में बदलने जैसे विकल्पों पर चर्चा के लिए तैयार था.
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कहां पर है ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम?
ईरानी उप विदेश मंत्री ने एक चौंकाने वाले खुलासे में बताया कि ईरान के पास फिलहाल उसके 60% एनरिच्ड यूरेनियम का फिजिकल कंट्रोल नहीं है. ये यूरेनियम उन अंडरग्राउंड ठिकानों में दबा हुआ है, जिन पर बमबारी की गई थी. गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने हमारे खिलाफ जंग छेड़ी, फिर भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया. अब वह ईरान से अनुचित रियायतों की उम्मीद कर रहा है.
'ईरान नहीं, अमेरिका के कहने पर सीजफायर'
उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने साफ कहा कि युद्धविराम के लिए अमेरिका ने जोर दिया था, ईरान ने इसकी मांग नहीं की थी. ईरान शुरू में सीजफायर के खिलाफ था क्योंकि स्थिति 'न शांति, न ही जंग' जैसी थी. फिर भी ईरान समाधान निकालने के लिए बातचीत के लिए तैयार हुआ.
भारत के कुछ और जहाजों पर मंजूरी पर विचार
ईरानी उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने भारत से संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक मित्र देश है, इसलिए हमने हॉर्मुज स्ट्रेट से उसके 11 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी. ईरान कुछ और जहाजों को मंजूरी देने पर विचार कर रहा है. हालांकि सभी जहाजों को अनुमति नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा कि ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर अब फीस लगाएगा. यह फीस अंतरराष्ट्रीय मानकों और पारदर्शिता पर आधारित होगी.
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