इतिहास खुद को दोहराता है... ये कहावत सिद्ध होती दिख रही है. इसे भारतीय नौसेना ने सफल किया है. दरअसल नेवी के बेड़े में 22 जुलाई 2026 यानी कल एक ऐसा एंटी-सबमरीन शामिल हुआ है, जो 17वीं सदी के शिवाजी महाराज के शासनकाल से जुड़ा हुआ है. हम बात कर रहे हैं INS मालवन की. यह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी का ‘एंटी सबमरीन वॉरफेयर शेलो वाटर क्राफ्ट' है. यह वॉरशिप समंदर की गहराई में भारत की ताकत बढ़ाएगा. इसे दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और जरूरत पड़ने पर उन पर हमला करने के लिए बनाया गया है.
आईएनएस मालवन का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत मालवन के नाम पर रखा गया है, जिसे वर्ष 2003 में 19 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवामुक्त किया गया था.
शिवाजी महाराज की सेना से क्या कनेक्शन
इस युद्धपोत के नाम की एक बेहद खास कहानी भी है. 17वीं सदी में जब विदेशी नौसेनाएं भारत के तटों पर हावी होने की कोशिश कर रही थीं, तब छत्रपति शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र के 'मालवन' तट पर एक अभेद्य किला बनवाया था. इस किले का नाम था सिंधदुर्ग. शिवाजी की सेना इस किले में तैनात रहती थी और यहीं से पूरे मालवन तट की सुरक्षा करती थी. शिवाजी की सेना दुश्मन को तट तक पहुंचने से पहले ही पानी में खत्म कर देती थी. अब करीब 350 साल बाद इंडियन नेवी ने अपने इस जहाज का नाम 'मालवन' रखा है. इस जंगी जहाज का भी लगभग वही काम है- दुश्मन का गहरे समंदर में काम-तमाम कर देना.

INS मालवन क्यों है बेहद खास
जब भी किसी देश की नेवी की बात होती है, तो सबसे पहले एयरक्राफ्ट कैरियर की चर्चा होती है. लेकिन असल में समंदर में सबसे बड़ा खतरा छिपकर हमला करने वाली पनडुब्बियों यानी सबमरीन से होता है. INS इसी मामले में सबसे अनोखा है. यह कोई बहुत भारी-भरकम युद्धपोत नहीं है, बल्कि एक छोटा और हल्का जहाज है. यह दुश्मन की पनडुब्बियों को ट्रैस करके अपनी 25 नॉट्स की तेज रफ्तार और बिना शोर मचाए चलने वाली 'वाटर-जेट प्रोपल्शन' टेक्नोलॉजी के साथ उन पर जबरदस्त हमला कर सकता है.
बेहद एडवांस रडार से लैस
INS मालवन चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है. दरअसल चीन को अपनी स्टील्थ टेक्नोलॉजी का बहुत गुरूर है. चीन के पास ऐसे सबमरीन हैं, जो सामान्य रडार से बच जाती हैं. लेकिन INS मालवन में DRDO द्वारा डेवलेप बेहद एडवांस 'अभय' सोनार सिस्टम लगा है. यह पानी के नीचे साउंड वेव्स भेजकर छिपी हुई पनडुब्बी का 3D मैप बना लेता है. एक बार जब दुश्मन के सबमरीन की लोकेशन लॉक हो गई, उसके बाद INS मालवन से RBU-6000 रॉकेट और लाइटवेट टॉरपीडो की जबरदस्त बारिश से दुश्मन का बच पाना मुश्किल है.

इस युद्धपोत का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों के साथ किया गया है. यह माहे श्रेणी का दूसरा पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत है, जिसके शामिल होने से नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी. आईएनएस मालवन के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने की.
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