इंदौर में दूषित पानी के कारण उत्पन्न हुई गंभीर स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है. CM मोहन यादव ने मुख्य सचिव सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की और राज्य शासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाइयों का जायजा लिय.। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर गहन चर्चा की और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए
मुख्यमंत्री ने इस मामले में जवाबदेही तय करते हुए इंदौर नगर निगम के आयुक्त और अपर आयुक्त को तत्काल 'कारण बताओ' नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं. साथ ही, उन्होंने अपर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश भी जारी किए. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम में रिक्त पड़े आवश्यक पदों को तत्काल प्रभाव से भरने का निर्देश दिया है ताकि प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा सके.

इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौत मामले में अब शुरुआती रिपोर्ट भी आ गई है. जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट में पानी में मिलावट और उसका दूषित होने की तरफ ही इशारा किया गया है. सरकार इस मामले में अब डिटेल रिपोर्ट भी मंगवाई है. इंदौर के डीएम शिवम वर्मा ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी है. गौरतलब है कि देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के कारण कई लोगों की जान चली गई जबकि कुछ लोग बीमार लोग अभी अस्पताल में भर्ती हैं. गौरतलब है कि गंदा पानी पीने से अबतक इंदौर में 11 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है.
मरने वालों की संख्या को लेकर सवाल
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दूषित पानी से मरने वालों की संख्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. परिजनों और अस्पतालों के मुताबिक अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है। सभी मरीज उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के साथ भर्ती हुए थे. कुछ को बुखार भी था. मृतकों में पांच महीने का एक शिशु और बुजुर्ग लोग भी शामिल हैं. इस सिलसिले में आज शाम प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के महापौर, अध्यक्ष और आयुक्त, जिला कलेक्टरों तथा स्वास्थ्य विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक बुलाई गई है, जिसमें पूरे प्रदेश की समीक्षा की जाएगी.
कोर्ट में सरकार की रिपोर्ट, केवल 4 मौतें
हालांकि इससे पहले सरकार ने हाईकोर्ट में पेश की गई अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा था कि दूषित पानी से केवल चार मौतें हुई हैं. इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर की घटना में सख्त कार्रवाई के बाद सरकार प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सुधारात्मक कदम उठा रही है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए गए हैं. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में गुरुवार को इस मामले की सुनवाई हुई और राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर ली गई. कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है. शीतकालीन अवकाश के कारण यह सुनवाई जबलपुर से की गई.
रिपोर्ट में मुआवजे के विवरण का उल्लेख नहीं
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता गोविंद सिंह बैस ने मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन अदालत ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की. इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी, जिन्होंने जनहित याचिका दायर की है, ने अदालत को बताया कि स्टेटस रिपोर्ट में मौतों और मरीजों की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं है. जहां रिपोर्ट में चार मौतें बताई गई हैं, वहीं जमीनी स्तर पर यह संख्या 8 से 15 के बीच मानी जा रही है. रिपोर्ट में मुआवजे के विवरण का भी उल्लेख नहीं है.
5 याचिकाएं दाखिल
इस मामले में कुल पांच याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें से एक पर नोटिस जारी हो चुका है. पूर्व पार्षद महेश गर्ग ने भी याचिका दायर कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी और मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की है. उधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
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