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भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च, खासियत से लेकर इसे बनाने के पीछे का मकसद जानें

भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को तैयार करने में लंबा समय लगा. इसे 1,000 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद कई महीनों में तैयार किया है.

भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च, खासियत से लेकर इसे बनाने के पीछे का मकसद जानें
देश का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च. (PTI इमेज ग्रैफिक्स)
  • भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ
  • विक्रम-1 रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है
  • रॉकेट हल्के कार्बन कॉम्पोजिट से बना है और 350 किलो तक पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर सकता है
श्रीहरिकोटा:

भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' शनिवार को सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश के पहले प्राइवेट रॉकेट ने तकनीकी पेलोड और विशेष पोस्टकार्ड के साथ उड़ान भरी. यह रॉकेट 450 किलोमीटर तक पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा. भारत के लिए ये किसी ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं है. देश में पहली बार कोई प्राइवेट रॉकेट लॉन्च हुआ है. इस खास मौके पर इसरो के वैज्ञानिक भी मौजूद रहे. लॉन्चिंग से पहले पीएम मोदी ने भी बधाई दी. इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है. जिसके लिए पहले से तैयारियां जोर शोर से चल रही थीं.

इस बीच केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट, विक्रम-1 के लॉन्च का लाइव प्रसारण देखा. 

विक्रम-1 की खास बातें

  • विक्रम-1 भारत का पहला कमर्शियल लॉन्च व्हीकल 
  • रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा 
  • विक्रम-1 सैटेलाइट को 'लो अर्थ ऑर्बिट' में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया 

स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी ने 18 नवंबर, 2022 को विक्रम-S नाम का एक सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था. यह पृथ्वी की सतह से 301.4 सेकंड की दूरी तय कर 88.8 किमी. की ऊंचाई पर 'लो अर्थ ऑर्बिट' में पहुंचा. इस टेस्ट रॉकेट की सफलता के बाद तीन साल में ही विक्रम-1 बना लिया गया.

विक्रम-1 के बारे में जानें

  •  विक्रम-1 रॉकेट 24 मीटर लंबा
  • पूरी तरह हल्के कार्बन कॉम्पोजिट ढांचे से तैयार 
  • तीन सॉल‍िड फ्यूल स्‍टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से ऑपरेट 
  • लगभग 350 किलो तक के पेलोड को 450 किमी. की पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने की क्षमता
  • लैब में तैयार ‘डायमंड लोटस' भी पेलोड के रूप में भेजा गया
  •  भविष्य के वाणिज्यिक प्रक्षेपणों का मार्ग प्रशस्त 
  • पीएम मोदी का स्पेशल मैसेज भी साथ लेकर गया

विक्रम-1 लॉन्च करने की वजह क्या?

इसे अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की शुरुआत माना जा रहा है. विक्रम-1 की लॉन्चिंग देश के सरकारी स्पेस मिशन से इंडस्ट्री-लेड स्पेस मिशन की ओर बढ़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है. दरअसल केंद्र ने साल 2023 में भारतीय अंतरिक्ष नीति जारी की थी. 2024 से भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की परमिशन दी गई थी. केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले एक दशक में अंतरिक्ष क्षेत्र में 300 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू हुए हैं.

PTI फोटो.

PTI फोटो.

विक्रम-1 लॉन्चिंग के लिए कितने समय में हुआ तैयार?

भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को तैयार करने में लंबा समय लगा. इसे 1,000 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद कई महीनों में तैयार किया. जिसके बाद अब इसकी लॉन्चिंग हुई है. यह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में स्थापित हो गया है.

PTI फोटो.

PTI फोटो.

कब और किसने की स्काईरूट की शुरुआत?

स्काईरूट की शुरुआत  2018 में हुई. कंपनी के फाउंडर पवन चंदाना और नागा भरत डाका हैं. ये दोनों ISRO के पूर्व वैज्ञानिक हैं. अपना बिजनेस शुरू करने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नेशनल स्पेस प्रोग्राम में अपनी सुरक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी. एक रॉकेट कंपनी बनाने के लिए फंड जुटाने, कुशल इंजीनियरिंग टीमें बनाने, नई टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए ग्राहकों को यह भरोसा दिलाने की जरूरत थी कि एक भारतीय स्टार्टअप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकता है.

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