- रूस-यूक्रेन युद्ध में जबरन भर्ती किए गए भारतीयों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है
- याचिका में कहा कि भारतीयों को रोजगार, पर्यटन या शिक्षा के नाम पर रूस भेजकर रूसी सेना में जबरन भर्ती कराया
- प्रभावित भारतीयों के पासपोर्ट और पहचान दस्तावेज जब्त कर लिए गए, उन्हें धमकी दी गई
यूक्रेन युद्ध में जबरन भर्ती किए गए भारतीयों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) को नोटिस जारी किया है. CJI सूर्यकांत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि ये राष्ट्रीय महत्व का मामला है. बता दें कि मामला उन भारतीयों से जुड़ा है जिन्हें एजेंटों ने रोजगार, पर्यटन और शिक्षा के नाम पर रूस भेजा और बाद में कथित तौर पर युद्ध में जबरन भर्ती कर लिया गया. उनके परिजनों की आशंका है कि कई की मौत हो चुकी है.
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर यह याचिका उन गंभीर संवैधानिक प्रश्नों से जुड़ी है, जिनमें विदेश में फंसे, हिरासत में लिए गए या कथित रूप से जबरन भर्ती किए गए भारतीय नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा और आजीविका की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है. याचिकाकर्ता 26 भारतीय नागरिकों के परिजन और करीबी रिश्तेदार हैं, जो छात्र वीजा, टूरिस्ट वीजा या अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर रोजगार या शिक्षा के उद्देश्य से विदेश गए थे. रूस पहुंचने के बाद कई प्रभावित व्यक्तियों की स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर हो गई.
पासपोर्ट छीन जबरन रूसी सेना में भर्ती कराया
उनके पासपोर्ट और पहचान दस्तावेज कथित तौर पर जब्त कर लिए गए, उनकी आवाजाही सीमित कर दी गई और उन्हें धमकी व दबाव का सामना करना पड़ा. कई मामलों में उन्हें ऐसी भाषाओं में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया जिन्हें वे समझ नहीं सकते थे, और इसके बाद उन्हें रूसी सशस्त्र बलों से जुड़े सैन्य ढांचे में कथित रूप से शामिल कर लिया गया.
दूतावास से गुहार लगाई, नहीं मिली ठोस जानकारी
परिवारों को अंतिम संपर्क सितंबर-अक्टूबर 2025 के बीच मिला, जिसमें बताया गया कि वे रूसी-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र से जुड़े कुप्यांस्क, सेलिडोव, माकीवका, चेल्याबिंस्क और अन्य इलाकों में तैनात हैं. इसके बाद उनके परिजनों ने विदेश मंत्रालय, रूस स्थित भारतीय दूतावास, गृह मंत्रालय, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन सहित कई जगहों पर लगातार गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली. आज तक परिजनों को उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य स्थिति, हिरासत या लोकेशन को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है.
सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
यह याचिका वकील ऋत्विक भनोत, अध्यायन गुप्ता और आयुष शंकर द्वारा दायर की गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है. याचिका में आरोप है कि छात्र या टूरिस्ट वीजा पर गए भारतीय नागरिकों को रूस में ले जाकर युद्ध में जबरन शामिल किया जा रहा है.विदेश मंत्रालय द्वारा परिजनों के अभ्यावेदन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है.
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