ये हैं भारत की तीन महान महिला वैज्ञानिक डॉ. रितु त्रिवेदी, डॉ. मोनिका सचदेव और डॉ. राधा रंगराजन. तीनों का ही जीवन देश में विज्ञान, अनुसंधान और मानव स्वास्थ्य को समर्पित है. ये अपने शोध के जरिए आम इंसान की जिंदगी आसान बनाने में लगी हैं. इनके वैज्ञानिक पतियों ने भी ऐसी कई सौगातें दी हैं, जिनके लिए पूरा हिंदुस्तान उनका शुक्रगुजार है.
CDRI लखनऊ की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन के पति कंप्यूटर इंजीनियर डॉ. शांतनु पॉल डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े रहे हैं. उन्होंने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बोर्ड और इनोवेशन काउंसिल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. डॉ. मोनिका सचदेव के पति चावल की कमला वैरायटी विकसित करने वालों में से एक हैं. वहीं, डॉ. रितु त्रिवेदी शीशम वाली लेडी के रूप में भी पहचान बना चुकी हैं.
डॉ. रितु त्रिवेदी कौन हैं?
भारत की प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक डॉ. रितु त्रिवेदी का शोध हड्डियों के स्वास्थ्य और उनसे जुड़ी ऑस्टियोपोरोसिस व ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियों पर आधारित है. उन्होंने साल 2000 में संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ से पीएचडी की.
डॉ. रितु त्रिवेदी ने साल 2000 से 2002 तक अमेरिका के प्रसिद्ध नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में शोध किया. साल 2004 में वह CSIR-CDRI से जुड़ीं. वर्तमान में डॉ. त्रिवेदी CSIR-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में मुख्य वैज्ञानिक और एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की प्रमुख हैं. इसके साथ ही वह प्रोफेसर भी हैं.
डॉ. त्रिवेदी ने न केवल प्रयोगशाला में शोध किया, बल्कि प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवाओं का विकास भी किया. उन्होंने शीशम पर शोध करके एक ऐसी दवा विकसित की, जो हड्डियों के फ्रैक्चर को जल्दी ठीक करने और महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज में मदद करती है. डॉ. त्रिवेदी ने पालक पर भी शोध करके एक खास दवा बनाई, जिसके इस्तेमाल से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है.
150 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र और पेटेंट प्रकाशित
उनके 150 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र और पेटेंट प्रकाशित हो चुके हैं. उन्हें नेशनल टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस अवॉर्ड 2022, रिलायंस इंडस्ट्रीज प्लेटिनम जुबली अवॉर्ड 2020 और टाटा इनोवेशन फेलोशिप 2019 आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें विज्ञान प्रसार द्वारा "75 अंडर 50: भारत को आकार देने वाले वैज्ञानिक" की सूची में भी शामिल किया गया था.
डॉ. मोनिका सचदेव कौन हैं?
डॉ. मोनिका सचदेव देश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक हैं. उन्होंने प्रजनन जीवविज्ञान, स्टेम सेल थेरेपी और कैंसर बायोलॉजी पर शोध किए हैं. बीते 16 से अधिक वर्षों से वह केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में वरिष्ठ मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत हैं. CSIR-CDRI से जुड़ने से पहले उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के स्कूल ऑफ मेडिसिन में NIH-फ़ोगार्टी फेलो के रूप में 5 साल का पोस्ट-डॉक्टोरल प्रशिक्षण पूरा किया. वह वर्तमान में संस्थान की 'ट्रांसजेनिक एनिमल फैसिलिटी' की प्रमुख भी हैं.
उन्होंने पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने की समस्या के इलाज के लिए एक फाइटो-ड्रग विकसित कर उसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा है. कीमोथेरेपी के कारण प्रभावित हुए जननांगों के इलाज के लिए उन्होंने स्टेम सेल थेरेपी की अवधारणा पर काम किया. साथ ही, वह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच के लिए आसान 'पॉइंट ऑफ केयर' टेस्ट विकसित करने पर काम कर रही हैं.
डॉ. मोनिका सचदेव ने CDRI में भ्रूणविज्ञान प्रशिक्षण के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की है, जो नए IVF क्लीनिक स्थापित करने में मदद करती है. वह 'गेट्स फाउंडेशन' के एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट की टीम सदस्य हैं, जो बिना दुष्प्रभावों वाली नई गर्भनिरोधक दवाओं और बांझपन के इलाज पर काम कर रही है. वह महिलाओं में PCOS की समस्या को समझने के लिए CSIR के एक बड़े मिशन प्रोजेक्ट को भी लीड कर रही हैं.
डॉ. राधा रंगराजन कौन हैं?
डॉ. राधा रंगराजन CDRI-लखनऊ की निदेशक हैं. बीते दो दशकों से जन स्वास्थ्य, दवा खोज और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं डॉ. राधा रंगराजन देश की प्रमुख वैज्ञानिक हैं. उन्होंने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ साइंस, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से मास्टर ऑफ साइंस और रॉकफेलर यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है.
साल 2003 से 2009 तक डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, हैदराबाद में काम करते हुए उन्होंने संक्रमण, मधुमेह और दिल की बीमारियों से जुड़ी शुरुआती दवाओं के विकास में भूमिका निभाई. वह 'विटास फार्मा' कंपनी की सह-संस्थापक रही हैं. यह कंपनी गंभीर और जिद्दी बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के लिए नई दवाओं और पेटेंट से संबंधित काम करती है. साल 2020 में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के रूप में काम करते हुए उन्होंने सस्ती जांच और मेडिकल उपकरणों के विकास तथा क्लिनिकल परीक्षण का नेतृत्व किया. डॉ. राधा रंगराजन को कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें चैंपियंस ऑफ चेंज 2017, FICCI अवॉर्ड 2019 और डिस्कवरी अवॉर्ड 2016 आदि शामिल हैं.
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