भारतीय रेलवे (Indian Railways) अपनी पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू कर रहा है. यह कदम देश के इस ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के टेक्निकल डेवलप्मेंट में एक और अहम पड़ाव है. भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन हरियाणा में नॉर्दर्न रेलवे के तहत 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी. साल 1853 में देश की पहली पैसेंजर ट्रेन वजूद में आई. उसके बाद से अब तक इंडियन रेलव ने काफी लंबा सफर तय किया है.
पिछले 173 साल में रेल नेटवर्क में अब तक कई बदलाव आ चुके हैं. स्टीम से डीजल, फिर इलेक्ट्रिक और अब इंडियन रेलवे ने हाइड्रोजन-पावर्ड टेक्नोलॉजी डेवलप किया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत की पहली डीजल ट्रेन और इलेक्ट्रिक ट्रेन का क्या इतिहास रहा है और रेलवे ने यह सफर कैसे तय किया.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
स्टीम इंजन का वो दौर...
भारत की पहली पैसेंजर ट्रेन ने 16 अप्रैल, 1853 को मुंबई के बोरी बंदर स्टेशन से अपनी कमर्शियल यात्रा शुरू की. बोरी बंदर को अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के नाम से जाना जाता है. उस वक्त, इस ट्रेन को ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) द्वारा चलाया जाता था. साल 1900 में, GIPR का विलय इंडियन मिडलैंड रेलवे कंपनी के साथ कर दिया गया. ट्रेन ने बोरी बंदर से थाणे तक करीब 35 किलोमीटर की अपनी यात्रा 57 मिनट में पूरी की. इस ट्रेन में 14 पैसेंजर कोच थे और इसे तीन स्टीम लोकोमोटिव - सुल्तान, सिंध और साहिब द्वारा खींचा गया था.

Photo Credit: File Photo: NDTV
ये भी पढ़ें: ट्रेन में रखा है 'बिजलीघर', बिना धुएं और बगैर तार के कैसे दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन? हैरान कर देगा इसका साइंस
डीजल लोकोमोटिव ने बढ़ाई सहूलितय
20वीं सदी के दौर में दुनिया भर में रेलवे नेटवर्क ने स्टीम लोकोमोटिव (ट्रेन का इंजन) की जगह ज्यादा बेहतर तरीके का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. भारत ने भी 1950 और 1960 के दशक में डील इंजन लाकर इस राह को अपनाया. इन इंजनों में डीजल फ्यूल और इंटरनल कंबशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता था, जिससे कोयले और शारीरिक श्रम पर निर्भरता कम हो गई.
भारतीय रेलवे ने 1950 के दशक के आखिरी दौर में अमेरिका की अमेरिकन लोकोमोटिव कंपनी (ALCo) से डीजल लोकोमोटिव की अपनी पहली खेप मंगाकर डीजल के दौर में कदम रखा. भारत के सबसे मशहूर डीजल लोकोमोटिव में से एक WDM-2 था, जिसे 1960 के दशक में पेश किया गया था. इसे ALCO यानी अमेरिकन लोकोमोटिव कंपनी के साथ मिलकर बनाया गया था. यह इंजन पैसेंजर और माल ढुलाई, दोनों तरह के ट्रैफिक के लिए भारतीय रेलवे की रीढ़ बन गया. इस सुविधा से डीजल लोकोमोटिव का लगातार प्रोडक्शन मुमकिन हुआ, जिससे स्टीम से डीजल वाले दौर में बदलाव की प्रक्रिया काफी तेज हो गई.
ये भी पढ़ें: Hydrogen Train Photos: पहली हाइड्रोजन ट्रेन के अंदर की तस्वीरें देखिए, जिसका कल PM मोदी करेंगे उद्घाटन
भारत में इलेक्ट्रिक ट्रेन की शुरुआत
हिंदुस्तान में जैसे-जैसे तेज, पर्यावरण के अनुकूल और ज्यादा क्षमता वाले ट्रांसपोर्ट की जरूरत बढ़ी, भारतीय रेलवे ने इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल शुरू किया. मुंबई के पास 1920 के दशक में ही इलेक्ट्रिफिकेशन शुरू हो गया था, लेकिन बड़े पैमाने पर इसे 1980 के दशक के बाद अपनाया गया. देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 1925 में बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस (अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) और कुर्ला के बीच चली थी.
साल 1985 से रेलवे ने धीरे-धीरे स्टीम लोकोमोटिव को हटाना शुरू किया और ट्रेनों का ऑपरेशन डीजल और इलेक्ट्रिक प्रक्रिया पर शिफ्ट होने लगा, जिससे ज्यादा क्षमता, तेज स्पीड और कम ऑपरेटिंग लागत जैसे कई फायदे मिले.
इसके बाद रेलवे ने साल 2030 तक 'नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक' बनने का टारगेट रखा है. इसे हासिल करने के लिए, भारतीय रेलवे राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है. रेलवे ट्रैक के बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण के जरिए डीजल की खपत कम हो रही है. अब अपने कामकाज को और ज्यादा डी-कार्बोनाइज करने के लिए हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत हो रही है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं