भारतीय सेना ने अपनी तोपखाना (आर्टिलरी) ताकत को और मजबूत करने के लिए पुणे की नाइब लिमिटेड कंपनी को करीब 292.69 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर दिया है. यह ऑर्डर इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रावधान के तहत दिया गया है, ताकि कम समय में आधुनिक हथियार सेना तक पहुंच सकें. इस समझौते के तहत नाइब लिमिटेड भारतीय सेना को यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम उपलब्ध कराएगी, जिससे सेना की मारक क्षमता और फायर पावर में बड़ा इजाफा होगा.
कंपनी ने इस सौदे की जानकारी शेयर बाजार को भी दी है. इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट का मतलब है कि मौजूदा सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए सिस्टम की सप्लाई तेजी से की जाएगी. सीमाओं पर बदलते हालात और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की जरूरत को देखते हुए सेना ऐसे आधुनिक रॉकेट सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रही है. यह यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम एक खास प्लेटफॉर्म है, जिसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज और कैलिबर के रॉकेट दागे जा सकते हैं.
नाइब लिमिटेड को इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत लॉन्चर, ग्राउंड इक्विपमेंट, एक्सेसरीज, प्रोजेक्टाइल्स और गोला-बारूद की सप्लाई करनी होगी. पूरी डिलीवरी 12 महीनों में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी. यह सिस्टम इजरायल की डिफेंस कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के PULS (प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) पर आधारित है. सेना में इसे “सूर्या” नाम दिए जाने की भी चर्चा है. यह एक मल्टी-कैलिबर और मल्टी-रेंज सिस्टम है, जिससे 150 किलोमीटर से लेकर 300 किलोमीटर तक मार करने वाले रॉकेट दागे जा सकते हैं.
इससे सेना को अलग-अलग दूरी के लिए अलग लॉन्चर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह लॉन्चर 6×6 या 8×8 व्हीकल पर लगाया जा सकता है और पहाड़, रेगिस्तान व मैदानी इलाकों में आसानी से तैनात किया जा सकता है. इसमें “शूट एंड स्कूट” की क्षमता भी है, यानी फायरिंग के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचाव होता है. दरअसल यह पूरी खरीद भारतीय सेना की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है जिसके तहत उसकी रॉकेट फोर्स और डीप स्ट्राइक क्षमता को मजबूत किया जा रहा है.
इससे पहले, सेना पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांच सिस्टम के दो रेजीमेंट भी खड़े कर चुकी है. इसे सेना का गॉड ऑफ वार भी कहा जाता है यानी यह दुश्मन की ताकत को दूर से ही भारी नुकसान पहुंचाने में आम भूमिका निभाता है. यह सौदा ‘मेक इन इंडिया' और ‘आत्मनिर्भर भारत' के लिए भी अहम है. इससे देश में रक्षा उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बनेंगे और भविष्य में ऐसे सिस्टम के निर्यात की संभावना भी खुलेगी. कुल मिलाकर यह सौदा भारतीय सेना की रणनीतिक और ऑपरेशनल ताकत को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगा.
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