- विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा सांसद मौसम नूर ने TMC छोड़ कांग्रेस में शामिल होकर बड़ा राजनीतिक कदम उठाया
- मौसम नूर ने TMC प्रमुख ममता बनर्जी को अपना इस्तीफ़ा भेजा और राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा देने का फैसला किया
- राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मौसम नूर ने कांग्रेस में घर वापसी की है
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद मौसम नूर ने कांग्रेस में घर वापसी कर ली. दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी महासचिव जयराम रमेश, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने मौसम नूर को पार्टी में शामिल कराया. मौसम नूर 2009 और 2014 में मालदा उत्तर सीट से कांग्रेस की लोकसभा सांसद रही हैं. 2019 का लोकसभा चुनाव मौसम नूर ने टीएमसी से लड़ा लेकिन जीत नहीं पाईं. 2020 में ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजा जिसका कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है. नूर ने कहा कि उन्होंने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है और सोमवार को राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगी.
मौसम नूर मालदा के कद्दावर कांग्रेस नेता रहे बरकत गनी खान चौधरी की भांजी हैं. कांग्रेस में शामिल होने के बाद एनडीटीवी से बात करते हुए मौसम नूर ने कहा, “मौसम बदल गया, टीएमसी से किसी परेशानी की वजह से नहीं गनी ख़ान चौधरी परिवार और कांग्रेस की एकजुटता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने घर वापसी की है. कांग्रेस में भूमिका को लेकर नूर ने कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे निभाऊँगी. नूर ने यह भी कहा कि वे चाहती हैं कि बंगाल में बदलाव हो और कांग्रेस सरकार में आए.
मौसम नूर के आने से कांग्रेस को मुस्लिम बहुल मालदा इलाके में मजबूती मिलेगी. मालदा दक्षिण लोकसभा सीट पर कांग्रेस के ईशा ख़ान चौधरी सांसद हैं. ईशा ख़ान, गनी ख़ान चौधरी के भतीजे हैं. ईशा ख़ान और मौसम नूर का एक रिश्ता भाई–बहन का है दूसरा रिश्ता यह है ईशा की पत्नी मौसम की सगी बहन हैं.
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि मौसम नूर के टीएमसी में जाने के बावजूद उनके पारिवारिक रिश्तों में दरार नहीं आई थी. टीएमसी में मौसम नूर को पहले मालदा का जिला अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन हाल में उन्हें मालदा दक्षिण लोकसभा सीट का कोऑर्डिनेटर बना दिया गया. यानी साफ़ था कि टीएमसी उन्हें उनके भाई कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी के सामने इस्तेमाल करना चाहती थी. या तो मौसम को सियासत के लिए परिवार में आर–पार की लड़ाई लड़नी पड़ती या फिर टीएमसी में उपेक्षा का शिकार होना पड़ता. यदि मौसम नूर कांग्रेस में घर वापसी नहीं करतीं तो कन्फ्यूजन और पेचीदगी बढ़ती जाती. ऐसे में गनी ख़ान चौधरी परिवार ने आपस में बात की और फिर कांग्रेस आलाकमान से संपर्क साधा.
वहीं, मौसम नूर के तृणमूल छोड़ कांग्रेस में शामिल होने को इंडिया गठबंधन में दरार के रूप में देखने को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने टीएमसी पर तंज कसते हुए कहा कि मुझे ख़ुशी है कि जिन्हें इंडिया गठबंधन का नाम लेने में हिचकिचाहट हो रही थी, वो आज इंडिया गठबंधन को याद कर रहे हैं! जयराम रमेश ने कहा कि गनी ख़ान चौधरी कांग्रेस के स्तंभ थे. इंदिरा गांधी उनका बेहद सम्मान करती थीं. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ज़िंदा है, फिर उभर कर आएगी.
बंगाल विधानसभा में फिलहाल कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं है. कुछ ही दिनों में होने वाले विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर कांग्रेस अपने पत्ते नहीं खोल रही. राज्य में दो बार से कांग्रेस वाम मोर्चे के साथ चुनाव लड़ रही है लेकिन इस बार प्रदेश कांग्रेस के ज्यादातर नेता सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने की वकालत इस दलील के साथ कर रहे हैं कि उसके पास खोने को कुछ भी नहीं है. वहीं, अधीर रंजन जैसे नेता वाम मोर्चे के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं लेकिन ऐसी स्थिति में कांग्रेस पहले से ज़्यादा सीटें माँगेगी.
कांग्रेस महासचिव और बंगाल के प्रभारी ग़ुलाम अहमद मीर ने कहा कि हम पूरे बंगाल में कांग्रेस को जमीन पर मजबूत कर रहे हैं, चुनावी अखाड़े में कल क्या होगा उसके लिए अभी समय है. बांग्लाभाषी लोगों के साथ कथित भेदभाव के मुद्दे को लेकर वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी के ओडिशा के निजी दौरे का भी मीर ने बचाव किया.
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