- भारत की DAC ने 114 राफेल लड़ाकू विमान और 6 P-8I पोसिडॉन समुद्री निगरानी विमान खरीद को मंजूरी दी है.
- राफेल विमान वायुसेना को मजबूती देंगे.
- भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है.
भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council- DAC) ने अपनी बैठक में 114 Rafale लड़ाकू विमानों और 6 P‑8I Poseidon समुद्री निगरानी विमान की खरीद को मंजूरी दे दी है. यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में से एक मानी जा रही है.
114 Rafale क्यों जरूरी?
चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना को आधुनिक, भरोसेमंद और तेज प्रतिक्रिया देने वाले लड़ाकू विमानों की जरूरत है. राफेल, 4.5‑जनरेशन का अत्याधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है.
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क्या हैं खूबियां?
- मॉडर्न AESA रडार सिस्टम
- लॉन्ग-रेंज Meteor मिसाइल
- SCALP स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल
- उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट
इन तकनीकों के कारण राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन- दोनों तरह के मिशन बेहद प्रभावी तरीके से अंजाम दे सकता है. ऑपरेशन सिंदूर में भी राफेल के जरिए ही भारत ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था. जिससे यह विमान वायुसेना के लिए पहले से ट्रायल‑एंड‑टेस्टेड साबित हो चुका है. इसी वजह से वायुसेना राफेल को प्राथमिकता पर खरीदना चाहती है.
भारत को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत
DAC की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम स्वीकृति के लिए जाएगा. 114 राफेल से भारतीय वायुसेना को 6-7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे. वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है.
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6 P‑8I एयरक्राफ्ट से नेवी को मिलेगी मजबूती
DAC की मंजूरी के बाद भारतीय नौसेना को 6 नए P‑8I Poseidon विमान भी मिलेंगे. यह विमान समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों की निगरानी, लंबी दूरी की समुद्री गश्त और मल्टी‑मिशन ऑपरेशन जैसे कार्यों में बेहद प्रभावी माने जाते हैं. भारतीय नौसेना पहले से ही 12 P‑8I ऑपरेट कर रही है, जिनके 40,000+ दुर्घटना‑मुक्त उड़ान घंटे इन्हें और विश्वसनीय बनाते हैं.
भारत की सुरक्षा जरूरतों के लिए बड़ा फैसला
114 राफेल और 6 P‑8I की DAC मंजूरी वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल में बेहद अहम है. विशेषकर जब चीन LAC पर अपनी तैनाती बढ़ा रहा है, पाकिस्तान लगातार सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है. ऐसे में वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या ऐतिहासिक रूप से कम है.
अब यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा, जहां अंतिम मुहर लगनी है.
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