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न बेल देंगे न नोटिस जारी करेंगे, यह छोटा अपराध नहीं है, शराब घोटाला मामले में SC से के. राजशेखर रेड्डी को झटका

₹3,200 करोड़ के आंध्र प्रदेश शराब घोटाले के आरोपी के. राजशेखर रेड्डी की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि यह गंभीर अपराध है.

न बेल देंगे न नोटिस जारी करेंगे, यह छोटा अपराध नहीं है, शराब घोटाला मामले में SC से के. राजशेखर रेड्डी को झटका
  • SC ने ₹3,200 करोड़ के आंध्र प्रदेश शराब घोटाले के मुख्य आरोपी के. राजशेखर रेड्डी की जमानत याचिका खारिज कर दी
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह घोटाला नौकरशाहों और राजनीतिक नेताओं के आपराधिक गठजोड़ के बिना संभव नहीं
  • अदालत ने साफ किया कि इस मामले में जमानत पर विचार करने का कोई आधार नहीं है और कोई नोटिस भी जारी नहीं करेगा
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नई दिल्ली:

₹3,200 करोड़ के कथित आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में मुख्य आरोपी के. राजशेखर रेड्डी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. बुधवार को हुई सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई से ही इनकार करते हुए साफ कहा कि इस मामले में “न बेल देंगे, न नोटिस जारी करेंगे.” अदालत के कड़े रुख के बाद अंततः उनकी ओर से याचिका वापस ले ली गई.

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बेहद सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि इस तरह का घोटाला किसी छोटे‑मोटे नेटवर्क से नहीं हो सकता. CJI ने कहा, “इस प्रकार का भ्रष्टाचार नौकरशाहों और राजनीतिक नेताओं के आपराधिक गठजोड़ के बिना संभव ही नहीं है. यह कोई छोटा अपराध नहीं है.”

जमानत पर विचार करने का कोई आधार नहीं बनता: सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने याचिका पर कोई दया दिखाने से इनकार करते हुए साफ कहा कि जमानत पर विचार करने का कोई आधार नहीं बनता. CJI ने यह भी कहा कि कई बार नौकरशाह खुद को विशेषाधिकार प्राप्त मानने लगते हैं, जबकि कानून सभी के लिए समान है-चाहे पद कितना ही बड़ा क्यों न हो. अदालत के रुख को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार, जो रेड्डी की ओर से पेश हुए थे, ने कहा कि वे याचिका वापस लेना चाहते हैं. इस पर अदालत ने अनुमति देते हुए कहा कि अभियुक्त ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट में जमानत के लिए जा सकते हैं.

राजशेखर रेड्डी पर क्या है आरोप?

राजशेखर रेड्डी पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर आंध्र प्रदेश में शराब की खरीद, सप्लाई और वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया. मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है. एजेंसियों का दावा है कि घोटाले में नौकरशाही और राजनीतिक स्तर पर मिलीभगत हुई, जिसमें अवैध कमाई का बड़ा खेल चला.

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों ने संकेत दे दिया है कि इस मामले में अदालत कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है. अदालत का साफ संदेश है कि बड़े आर्थिक अपराधों में शामिल लोगों को “नियमों के सहारे” राहत नहीं मिलेगी. अब मामला निचली अदालतों में आगे बढ़ेगा, जहां रेड्डी को जमानत के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखनी होगी.

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