- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य घोषित किया है
- भारत ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नोट किया है और इसके प्रभाव का अध्ययन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर अमेरिकी टैरिफ फैसले का इंतजार न करने का आरोप लगाया है
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के "रेसिप्रोकाल टैरिफ" को अमान्य घोषित करने के फैसले के बाद दुनियाभर में हलचल बढ़ गयी है. अंतराष्ट्रीय व्यापार जगत में इसके संभावित असर की समीक्षा शुरू हो गयी है.शनिवार को केंद्र सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि भारत शुक्रवार को आये टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नोट किया है.
वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि इस संबंध में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया है. अमेरिकी प्रशासन की ओर से कुछ कदमों की घोषणा की गई है. हम इन सभी घटनाक्रमों के असर का अध्ययन कर रहे हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐसे समय पर आया है जब अगले सोमवार से भारत और अमेरिका के ट्रेड वार्ताकारों के बीच वाशिंगटन में एक महत्वपूर्ण दौर की बातचीत शुरू हो रही है. भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन अगले दौर की बातचीत के लिए सोमवार को अमेरिका पहुंच रहे हैं.
उम्मीद की जारी है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उभरी नयी परिस्थिति पर दोनों देशों के बीच पहली बातचीत होगी.इसी सोमवार को वाणिज्य सचिव ने कहा था कि हमारा प्रयास मार्च, 2026 में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देना है. यह एक प्रयास है, लेकिन मैं इसके लिए कोई समयसीमा नहीं रखूंगा.मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन अगले सप्ताह अमेरिका की यात्रा करेंगे. वह अमेरिका में कानूनी समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे.
उधर, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राजनीति तेज़ हो रही है.कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर एक बयान जारी कर कहा कि अनजान विदेश नीति या एकतरफा समर्पण? मोदी सरकार ने ट्रैप डील में फंसने से पहले टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया, जिसने भारत से भारी रियायतें लीं? संयुक्त वक्तव्य में भारत को होने वाले कई अमेरिकी निर्यातों पर शून्य टैरिफ, भारतीय कृषि को अमेरिकी वस्तुओं के लिए खोलने, 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान आयात करने की योजना, हमारी ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता और डिजिटल मोर्चे पर कई कर रियायतों की बात की गई. पीएम मोदी को भारतीयों के सामने खड़ा होना चाहिए और सच बताना चाहिए.
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