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ईरान से जंग लड़ रहे ट्रंप की अपने ही देश में फजीहत, एक दो नहीं टोटल 24 राज्यों ने कोर्ट में घसीटा

Donald Trump Tariff Controversy: अमेरिका के 24 राज्यों ने मिलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत के नए टैरिफ के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर दिया है.

ईरान से जंग लड़ रहे ट्रंप की अपने ही देश में फजीहत, एक दो नहीं टोटल 24 राज्यों ने कोर्ट में घसीटा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक और मुसीबत खड़ी
  • अमेरिका के 24 राज्यों ने ट्रंप द्वारा लगाए गए दस प्रतिशत नए टैरिफ के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है
  • राज्यों के अटॉर्नी जनरल का आरोप है कि ट्रंप ने बिना अधिकार के अवैध टैरिफ लगाए हैं जो कानून के खिलाफ हैं
  • नए टैरिफ अभी 150 दिनों के लिए लागू हैं और अमेरिकी संसद से अनुमति मिलने पर ही आगे बढ़ेंगे
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ईरान के खिलाफ जंग छेड़ने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपने देश के अंदर फजीहत कम होने के नाम नहीं ले रही है. अमेरिका के 24 राज्यों ने मिलकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत के नए टैरिफ के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर दिया है. दरअसल पिछले महीने अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया.

24 राज्यों ने ट्रंप पर क्या आरोप लगाए

अपने मुकदमे में न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, ओरेगन और अन्य राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ट्रंप ने “फिर से ऐसे टैरिफ लगाने की शक्ति का इस्तेमाल किया जो उनके पास नहीं है.” उन्होंने यह बात तब कही जब ट्रंप ने पहले वाले टैरिफ को अवैध ठहराए जाने के बाद 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू किया. 24 राज्यों के इस समूह ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत में अपनी याचिका में कहा, “क्योंकि ये टैरिफ अवैध हैं, इसलिए अदालत को घोषित करना चाहिए कि ये लागू नहीं हैं और लोगों को पैसे वापस किए जाने का आदेश देना चाहिए.”

ट्रंप के नए टैरिफ अभी 150 दिनों के लिए हैं. अगर अमेरिकी संसद इन्हें अपनी अनुमति देती है तभी ये आगे बढ़ेंगे. लेकिन ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वे इसे 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं और उनकी सरकार इसे लंबे समय तक लागू रखने की कोशिश कर रही है. फिलहाल 24 राज्यों ने कहा कि 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 ट्रंप को इतने बड़े और लगातार बदलते टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देती.

इस समूह ने कहा कि यह कानून केवल सीमित टैरिफ लगाने के लिए बनाया गया था, जैसे तब जब किसी देश को भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में बड़ी कमी का सामना करना पड़े. लेकिन उनका कहना है कि अमेरिका अभी ऐसी स्थिति में नहीं है. कानून यह भी कहता है कि नए टैरिफ भेदभावपूर्ण तरीके से लागू नहीं किए जाने चाहिए. मुकदमे में कहा गया है कि ट्रंप ऐसा ही कर रहे हैं.

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि नए टैरिफ में कनाडा, मेक्सिको, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास और निकारागुआ से आने वाले कई सामानों को छूट दी गई है. बयान में यह भी कहा गया कि इसमें 84 पन्नों की सूची है जिसमें कई खास उत्पादों को टैरिफ से बाहर रखा गया है.

लेटिशिया जेम्स ने कहा, “एक बार फिर राष्ट्रपति ट्रंप कानून और संविधान को नजरअंदाज कर रहे हैं और इससे उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों पर टैक्स बढ़ रहा है.” कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बॉन्टा ने एक अलग बयान में कहा कि राज्य ने बार-बार इन अवैध टैरिफ को चुनौती दी है, क्योंकि यह मुद्दा कैलिफोर्निया के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो पहले ही बढ़ती कीमतों से परेशान हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर ट्रंप के खास उद्योगों पर लगाए गए टैरिफ पर नहीं पड़ेगा. लेकिन इससे आयात करने वाली कंपनियों के लिए पैसे वापस मांगने का रास्ता खुल गया है. जो टैरिफ अब अवैध घोषित किए गए हैं, उनसे 2025 के अंत तक अमेरिकी सरकार को 130 अरब डॉलर से ज्यादा की आय हो चुकी थी.

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