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भारत में खत्म होने वाला है तेल संकट, दोस्त ने दे दिया बड़ा ऑफर

मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत की ऊर्जा चिंता बढ़ी है. ऐसे में रूस ने तेल‑गैस सप्लाई बढ़ाने का ऑफर दिया है. रूस के डिप्टी पीएम डेनिस मंटूरोव की भारत यात्रा में ऊर्जा, उर्वरक और रणनीतिक सहयोग पर फोकस रहा.

भारत में खत्म होने वाला है तेल संकट, दोस्त ने दे दिया बड़ा ऑफर
फाइल फोटो
  • रूस ने भारत को पहले से अधिक तेल और प्राकृतिक गैस सप्लाई बढ़ाने का ऑफर दिया है, जो ऊर्जा संकट में राहत होगा.
  • डेनिस मंटूरोव ने PM मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार और कनेक्टिविटी सहयोग पर चर्चा की.
  • रूस की कंपनियों के पास भारत को तेल, एलएनजी और उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने की पूरी क्षमता मौजूद है.
नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में जारी जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच रूस ने भारत के सामने बड़ा ऑफर रख दिया है. रूस के पहले डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंटूरोव की भारत यात्रा के दौरान मॉस्को ने संकेत दिया है कि वह भारत को पहले से ज्यादा तेल और प्राकृतिक गैस सप्लाई करने के लिए तैयार है. ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन डगमगा रही है, यह पेशकश भारत के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखी जा रही है.

मोदी-जयशंकर से मुलाकात, ऊर्जा पर फोकस

डेनिस मंटूरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. पीएम मोदी ने इसे 'म्यूचुअली बेनिफिशियल कोऑपरेशन' बताया, जबकि जयशंकर ने साफ किया कि बातचीत का फोकस ऊर्जा और इंडस्ट्री समेत कई सेक्टर पर रहा. खास बात यह रही कि इन बैठकों में तेल और गैस सहयोग को प्राथमिकता दी गई.

रूस का दावा- भारत की मांग पूरी करने की क्षमता

रूसी दूतावास के मुताबिक, उनकी कंपनियों के पास भारत को तेल और एलएनजी की सप्लाई लगातार बढ़ाने की पूरी क्षमता है. मंटूरोव ने यह भी बताया कि 2025 के अंत तक रूस ने भारत को उर्वरकों की सप्लाई 40% तक बढ़ा दी है और आगे भी जरूरत पूरी करने के लिए तैयार है. यानी ऊर्जा के साथ-साथ खेती से जुड़े इनपुट में भी रूस भारत के लिए बैकअप बनकर उभर रहा है.

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होर्मुज संकट में ‘रूस फैक्टर' क्यों अहम?

ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से भारत जैसे देशों को तेल और गैस की सप्लाई में दिक्कत आ रही है. ऐसे में रूस का यह ऑफर रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है, क्योंकि भारत पहले ही रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है. हाल ही में अमेरिका की ओर से मिली छूट के बाद रूस फिर से भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा सप्लायर बनकर उभरा है.

सिर्फ तेल नहीं, उर्वरक और न्यूक्लियर सेक्टर भी एजेंडे में

इस दौरे में सिर्फ तेल-गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक, न्यूक्लियर एनर्जी और इंडस्ट्रियल सहयोग पर भी चर्चा हुई. कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर काम तय समय के अनुसार चल रहा है और दोनों देश इस सेक्टर में साझेदारी और गहरी करने की योजना बना रहे हैं. इसके अलावा टेक्नोलॉजी, स्पेस और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर तलाशे जा रहे हैं.

रणनीतिक संतुलन की चुनौती

हालांकि रूस के इस ऑफर के साथ भारत के सामने संतुलन की चुनौती भी बनी हुई है. एक तरफ सस्ता और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत, दूसरी तरफ पश्चिमी देशों के साथ रिश्तों का दबाव. लेकिन मौजूदा संकट में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता है.

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संकट में ‘दोस्त' का सहारा

कुल मिलाकर, ईरान युद्ध के बीच रूस का यह ऑफर भारत के लिए बड़ी राहत का संकेत है. अगर यह सप्लाई बढ़ती है, तो देश में तेल संकट की आशंकाएं काफी हद तक कम हो सकती हैं. यह सिर्फ एक डील नहीं, बल्कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है.

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