समंदर में भारत की बढ़ेगी ताकत, नेवी को मिलेगा एक और विमानवाहक पोत, चीन को देगा पछाड़

नया विमानवाहक पोत स्वदेशी विक्रांत की तरह ही होगा. इसकी लंबाई 262 मीटर और चौड़ाई 62 मीटर और ऊंचाई 59 मीटर होगी.

नई दिल्ली:

भारत समंदर में अपनी ताकत में इजाफा कर रहा है. अब भारतीय नौसेना को एक और विमानवाहक देने की तैयारी की जा रही है. रक्षा खरीद परिषद (DAC) में इसको लेकर फैसला होगा. भारतीय नेवी के पास पहले से ही दो विमानवाहन पोत आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत हैं. नया विमानवाहक पोत 40 हजार करोड़ की लागत से बनेगा. 45 हजार टन वजनी इस विमानवाहक पोत को कोचीन शिपयार्ड में बनाया जाएगा. इस पर करीब 28 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात हो सकेंगे.

भारत अब हिन्द महासागर में अपनी ताकत बढ़ा रहा है. चीन के पास दो विमानवाहक पोत हैं, जबकि पाकिस्तान के पास एक भी नहीं है.

यह नया विमानवाहक पोत स्वदेशी विक्रांत की तरह ही होगा. इसकी लंबाई 262 मीटर और चौड़ाई 62 मीटर और ऊंचाई 59 मीटर होगी. इसकी रफ्तार 52 किलोमीटर प्रतिघंटा की होगी. इसे तैयार करने में करीब 8 से 10 वर्ष लगेंगे. 

आने वाले वर्षों में भारत के पास तीन कैरियर बैटल ग्रुप होगा. यह पानी मे तैरते हुए किसी सैन्य अड्डे की तरह होता है. इसमें लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मिसाइल, रॉकेट, गन और बम समेत खतरनाक हथियार होते हैं. यह 400 किलोमीटर एरिया पर नजर रखता है. इस रेंज में आने वाले खतरों का सामना कर सकता है.

नेवी की ताकत बढ़ाता ‘इंफाल'
वहीं, एक अन्य खबरें के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भारतीय नौसेना की स्टील्थ निर्देशित मिसाइल विध्वंसक ‘इंफाल' के क्रेस्ट (शिखा) का अनावरण किया है. इंफाल मिसाइल विध्वंसक सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों और पनडुब्बी रोधी स्वदेशी रॉकेट लांचर से सुसज्जित है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), मुंबई ने 20 अक्टूबर को यह युद्धपोत भारतीय नौसेना को सौंपा था. 

आईएनएस इंफाल ‘15बी स्टील्थ निर्देशित मिसाइल विध्वंसक परियोजना' के तहत निर्मित चार युद्धपोतों में से तीसरा युद्धपोत है. 

अत्याधुनिक हथियारों और प्रणाली से लैस

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इंफाल युद्धपोत का द्रव्यमान 7,400 टन है और लंबाई 164 मीटर है. यह विध्वंसक जहाज अत्याधुनिक हथियारों और प्रणाली से लैस है, जिसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, पोत रोधी मिसाइल और टॉरपीडो शामिल हैं. यह 30 समुद्री मील यानी 56 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है.