- भारत-चीन के बीच सीमा मामलों पर डब्ल्यूएमसीसी की 35वीं बैठक बीजिंग में संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में हुई
- दोनों पक्षों ने परिसीमन, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण एवं सीमा सहयोग से संबंधित मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा की
- भारत ने सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ स्तरीय अगली बैठक शीघ्र आयोजित करने पर जोर दिया और ठोस तैयारी पर सहमति बनी
भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 35वीं बैठक के अवसर पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की राजधानी बीजिंग में डब्ल्यूएमसीसी की एक बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता हमारे संयुक्त सचिव ने की. चर्चाएं रचनात्मक रहीं और एक कदम आगे बढ़ने का संकेत मिला है. आने वाले दिनों में जैसे-जैसे घटनाक्रम और प्रगति सामने आएगी, हम आपको उनसे अवगत कराते रहेंगे.
उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों ने परिसीमन, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा सहयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की. भारतीय पक्ष ने सीमा पार नदियों पर अगली विशेषज्ञ स्तरीय बैठक शीघ्र आयोजित करने पर भी बल दिया. हम सीमा पार नदियों पर हुई वार्ता के दौरान हुए सभी समझौतों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, और दोनों पक्ष सीमा पार नदियों पर अगली वार्ता के लिए ठोस तैयारी करने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए, जो अब चीन में आयोजित होने वाली है."
#WATCH | Delhi: On the 35th meeting of the Working Mechanism for Consultation & Coordination on India-China Border Affairs (WMCC), MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "...The two sides discussed issues relating to delimitation, border management, mechanism building and border… https://t.co/CIwfGtmn35 pic.twitter.com/z81lKkaXWl
— ANI (@ANI) May 29, 2026
रणधीर जायसवाल ने कहा, "कश्मीर मुद्दे के संबंध में, आपने देखा होगा कि हमने इस मामले पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए एक बयान जारी किया है."
म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के संबंध में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा, "म्यांमार के राष्ट्रपति आधिकारिक दौरे पर भारत आ रहे हैं. वे 30 मई को यहां पहुंचेंगे और 2 जून तक यहीं रहेंगे. वे दिल्ली में रहेंगे. व्यापारिक बैठकों के लिए वे बोधगया और मुंबई भी जाएंगे. वे प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे, जिसमें दोनों नेता इन संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे."
#WATCH | Delhi: Responding to ANI's question regarding the Myanmar President's trip to India, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "The President of Myanmar is visiting India on an official visit. He will be arriving here on 30th May, and till 2nd June, he'll be here. He'll… pic.twitter.com/dAMHidCe43
— ANI (@ANI) May 29, 2026
उन्होंने कहा, "म्यांमार के राष्ट्रपति के दौरे का एक व्यापारिक पहलू भी है, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होगी. यह एक आधिकारिक दौरा है और हम म्यांमार के राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं."
सीमा सुरक्षा, संपर्क और अन्य मुद्दों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने कहा, "म्यांमार और भारत के बीच संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होगी और हमारा उद्देश्य यह होगा कि हम म्यांमार के साथ अपने सभ्यतागत और मैत्रीपूर्ण संबंधों को कैसे आगे बढ़ाएं."
#WATCH | Delhi: Responding to ANI's question regarding India sending medical supplies to CDC Africa, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, We have sent medical supplies to the Africa CDC. This was handed over by our High Commissioner in Uganda to the CDC office there. We look… pic.twitter.com/lIP3e0ru1B
— ANI (@ANI) May 29, 2026
भारत द्वारा अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सामग्री भेजने को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमने अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सामग्री भेजी है. युगांडा में हमारे उच्चायुक्त ने इसे वहां के सीडीसी कार्यालय को सौंप दिया है. हम इस महाद्वीप में उत्पन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने में अफ्रीका सीडीसी और संबंधित देशों की हर संभव सहायता करने के लिए तत्पर हैं. इस संबंध में जैसे ही हमें कोई और जानकारी मिलेगी, हम आपको अपडेट करते रहेंगे. फिलहाल, हमने अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सामग्री की पहली खेप भेज दी है."
उन्होंने आगे कहा, "कई मामलों में, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था, ये सत्यापन 5 साल या उससे ज़्यादा समय से लंबित हैं. हमें उम्मीद है कि इस खास मुद्दे पर हमें बांग्लादेश से जल्द ही जवाब मिलेगा, ताकि दोनों देशों के बीच मौजूद द्विपक्षीय व्यवस्था के आधार पर, यहां रह रहे इन लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा या निर्वासित किया जा सके."
MEA के प्रवक्ता कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार, 11 भारतीय जहाज़ अभी भी फ़ारसी खाड़ी क्षेत्र में हैं और इनमें से 14 जहाज़ वापस आ चुके हैं. मेरा मतलब है कि वे फ़ारसी खाड़ी में थे लेकिन वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहे और भारत पहुंच गए हैं.
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