Monsoon Rain Alert: देश में पिछले एक महीने से पड़ रही भयंकर गर्मी के बीच सबको बेसब्री से मॉनसून आने का इंतजार है, ताकि सूरज के आग उगलते अंगारों की तपिश कम हो. मॉनसून पर मौसम विभाग की ताजा भविष्यवाणी गुड और बैड न्यूज दोनों लेकर आई है. अच्छी खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अरब सागर, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी की ओर तेजी से बढ़ रहा है. केरल में मॉनसून आने की 26 मई की तारीख बीत जाने के बाद अरब सागर, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों तक ये पहुंच गया है. लेकिन खतरे की घंटी ये है कि इस साल मॉनसून की बारिश सामान्य से कम रहेगी और चार महीनों की अवधि के दौरान औसत के 90 फीसदी तक ही होगी.
कहां कितनी मॉनसून की बारिश (Monsoon Date)
- पूर्वोत्तर भारत यानी सिक्किम, असम से लेकर त्रिपुरा तक 96-104 प्रतिशत बारिश
- दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा समेत उत्तर भारत में 92 प्रतिशत से कम
- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिणी प्रायद्वीप में औसत से 94 प्रतिशत से कम बारिश
मॉनसून कब आएगा
मॉनसून की बारिश सामान्यतया केरल में 1 जून तक आती है, जो जून से सितंबर तक मॉनसून सीजन की शुरुआत माना जाता है. 2025 में मॉनसून 24 मई को आ गया था. इस बार अगले 2-3 अनुकूल परिस्थितियों के साथ ये 1-2 जून को केरल पहुंचेगा. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जैसे इलाकों तक ये जून के अंत तक आने की संभावना है. भारत में सालाना वर्षा का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा मॉनसून के महीनों में आता है. इससे कृषि, पीने का पानी, बिजली उत्पादन और भूजल स्तर के लिए अहम हो जाता है.
कम बारिश का असर
सामान्य से कम बारिश और दिन-रात के बढ़े हुए तापमान से दिन में लू और गर्म रातें हो सकती हैं.जलवायु परिवर्तन विभाग ने कहा है कि जून 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश, हरियाणा,ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब, बिहार, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों और महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक लू चलेगी. राजस्थान और झारखंड में सामान्य से कम लू चलने के आसार हैं.
भारत में कितनी मॉनसूनी बारिश होगी
भारत में इस मौसम में 80 सेमी वर्षा होने की संभावना है. जबकि भारत में मौसमी बारिश का दीर्घकालिक औसत (1971-2020) तक 50 सालों में 87 सेमी रहा है.देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होगी, सिर्फ पूर्वोत्तर में ज्यादा वर्षा देखने को मिलेगी. सामान्य से कम वर्षा की बड़ी वजह अल नीनो है, जिससे देश में कम बारिश होती है.इससे पहले 2002, 2009, 2015 और 2023 में अल नीनो मुसीबत बना था.
अल नीनो क्या है
अल नीनो प्रशांत महासागर का एक निश्चित अवधि का तापमान है, जो पूरे एशिया में मौसम के पैटर्न पर असर डालता है.मॉनसून के आते ही जून से ये भी असर दिखाना शुरू कर देगा. भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो समुद्री सतह के सामान्य से अधिक गरम होने और दक्षिण की ओर घुमाव (ENSO) की स्थिति है. इससे दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून (SWM) के सीजन में वर्षा कम हो जाती थी.जबकि हिंद महासागर का पश्चिमी इलाका जब पूर्वी क्षेत्र से अधिक गर्म होता है तो भारत में मानसून की वर्षा बढ़ जाती है, जो अल नीनो के असर को कुछ कम करता है. लेकिन दक्षिण-पश्चिमी जलवायु (SWM) के मौसम के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की 92 प्रतिशत संभावना है. हिंद महासागर द्विध्रुव की स्थिति विकसित होने की संभावना इतनी अधिक नहीं है.

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म़ॉनसून पर अल नीनो का असर
भारत में मॉनसून के दौरान अल नीनो का असर दिखेगा और यह सितंबर तक जारी रहेगा.अल नीनो का मतलब मॉनसून की कम बारिश, लगातार लू के कहर, सूखे की आहट और नदी-तालाब और भूजल स्तर के संकट के तौर पर देखा जाता है. इससे पिछले तीन सालों में सबसे कम बारिश होगी.
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अल नीनो का भारत में कितना असर?
अल नीनो जून पहले तो कमजोर अवस्था में उभरेगा, लेकिन जुलाई- अगस्त के बीच तक ताकतवर हो जाएगा. सितंबर में अल नीनो सबसे प्रबल हो जाएगा. भारत और दुनिया भर में ये संकट का कारण बनेगा. अंतर्राष्ट्रीय मौसम एजेंसियों ने इसकी आहट दे दी है. अल नीनो प्रशांत महासागर का एक निश्चित अवधि का तापमान है, जो पूरे एशिया में मौसम के पैटर्न पर असर डालता है.मॉनसून के आते ही जून से ये भी असर दिखाना शुरू कर देगा.
दुनिया भर के देशों की चेतावनी
ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो और चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र का भी कहना है कि प्रशांत महासागर में तापमान वृद्धि अल नीनो चरण में प्रवेश कर चुकी है.आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है.नासा का कहना है कि प्रशांत महासागर की सतह के नीचे गर्म पानी का एक बड़ा भंडार बनने का पता चला है. ये गर्मी धीरे-धीरे ऊपर उठती है और पूर्वी प्रशांत महासागर क्षेत्र में फैलती है.

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सूखा पड़ने का खतरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मॉनसून पूर्वानुमान के अनुसार, जून से सितंबर के बीच बारिश का औसत 90% रहेगा. लेकिन कम वर्षा की 60% संभावना रहेगी.प्रचंड गर्मी के साथ इससे कई इलाकों में सूखा भी पड़ सकता है. जून में सामान्य से कम बारिश, ज्यादा तापमान लू का कहर बढ़ाएगी.
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मॉनसून सामान्य कब होता है
जब मॉनसून के लिए अनुमानित वर्षा देश के लिए सामान्य सालााना बारिश (LPA) के 90-95 फीसदी के बराबर होती है, तो मॉनसून को सामान्य से कम माना जाता है. जब वर्षा औसतन 90 फीसदी से कम होती है तो मॉनसून की बारिश की कमी का संकेत मिलता है. 13 अप्रैल को मौसम विभाग ने औसत 92 प्रतिशत बताया था. इसके कम वर्षा की संभावना 35 प्रतिशत थी, जो अब 60 फीसदी हो गई है.
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