- भारत ने साफ किया है चाबहार पोर्ट अमेरिकी हमलों में पूरी तरह सुरक्षित है.
- मई में ईरान के विदेश मंत्री ने चाबहार पोर्ट को भारत और ईरान के सहयोग का प्रतीक बताया.
- उन्होंने कहा कि ये बंदरगाह हमारे लिए और कई दूसरे देशों के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है.
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को साफ किया कि ईरान में भारत की ओर से विकसित किए गए चाबहार पोर्ट टर्मिनल को हाल ही में अमेरिका की ओर से किए गए हवाई हमलों में कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.नई दिल्ली में शुक्रवार को हुई विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने इन हवाई हमलों से जुड़ी खबरें देखी हैं, लेकिन चाबहार पोर्ट का टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ. जब उनसे अमेरिकी सेना की ओर से चाबहार को निशाना बनाने और हमलों का पोर्ट के कामकाज पर असर के बारे में पूछा गया तो जायसवाल ने कहा कि चाबहार के बारे में अगर आप इस मामले को देख रहे हैं तो पहले अमेरिका की तरफ से एक छूट दी गई थी. वह कुछ समय पहले खत्म हो गई. उसके बाद से हम इस मुद्दे को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं। जहां तक हमले की बात है, हमने भी ऐसी खबरें देखी हैं, लेकिन हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि चाबहार का टर्मिनल किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है." इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें लगातार हवाई हमलों के बीच एक टावर गिरता हुआ दिखाई दे रहा था। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह तस्वीर किस जगह की है. पिछले साल अक्टूबर में भारत को ईरान के चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट मिली थी, जिसकी अवधि 29 अप्रैल तक थी.
मई में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चाबहार पोर्ट को भारत और ईरान के सहयोग का प्रतीक बताया. उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की ओर से विकसित यह बंदरगाह मध्य एशिया, कॉकेसस और यूरोप तक पहुंचने का एक 'सुनहरा प्रवेश द्वार' बनेगा. नई दिल्ली में 'ब्रिक्स' देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अराघची ने माना कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से चाबहार पोर्ट का विकास धीमा पड़ा है, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा.
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उन्होंने कहा कि चाबहार पोर्ट भारत और ईरान के सहयोग की सबसे अहम पहचान में से एक है. हमें खुशी है कि भारत ने इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से इसकी रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेसस और फिर यूरोप तक पहुंचने का सुनहरा रास्ता बनेगा। साथ ही यूरोप, मध्य एशिया और दूसरे देशों के लिए भी यह हिंद महासागर तक पहुंचने का महत्वपूर्ण मार्ग होगा.
सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यह बंदरगाह हमारे लिए भारत के लिए और कई दूसरे देशों के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. मुझे उम्मीद है कि भारत चाबहार पोर्ट पर अपना काम जारी रखेगा, ताकि इसका पूरा विकास हो सके और इससे भारत तथा आसपास के देशों के हित पूरे हों. भारत की दुनिया में अच्छी छवि है और वह इस क्षेत्र में कूटनीति, शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. भारत की फारस की खाड़ी के उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ के लगभग सभी देशों से अच्छी दोस्ती है, इसलिए हम इस क्षेत्र में भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का स्वागत करते हैं. इससे पहले भारत और ईरान ने चाबहार पोर्ट के संचालन को लेकर 10 साल का समझौता किया था। इस समझौते के तहत भारत ने ओमान की खाड़ी में स्थित इस रणनीतिक बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर (250 मिलियन डॉलर) की क्रेडिट सुविधा देने का वादा किया था.भारत और ईरान की योजना चाबहार पोर्ट को ईरान के रेल नेटवर्क से जोड़ने की भी थी। इसके लिए चाबहार से जाहेदान शहर तक करीब 700 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई जानी थी.
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