भारत और अमेरिका के संबंध आज अपने सबसे मजबूत और ऐतिहासिक मोड़ पर हैं. फार्मास्युटिकल (दवाओं) से लेकर सैन्य बिक्री, सैन्य अभ्यास, आईटी, डेटा सेंटर और यहां तक कि अंतरिक्ष में 'मिशन मून' तक दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं. ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के सालाना सम्मेलन के मंच से भारत और अमेरिका के बीच गहराते रक्षा, व्यापारिक और औद्योगिक संबंधों की एक नई और बुलंद तस्वीर सामने आई है.
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, "हम भारत पर भरोसा करते हैं और भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. भारत और अमेरिका सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि हम मोबिलिटी के भविष्य को एक साथ मिलकर डिजाइन कर रहे हैं."
Delhi: At 66th Annual Session of the Automotive Component Manufacturers Association of India (ACMA), United States Ambassador to India Sergio Gor says, "Our two governments are working closely together to build a trade relationship that is fair, reciprocal, and mutually… pic.twitter.com/FnIzMb3dR9
— IANS (@ians_india) September 2, 2026
सर्जियो गोर ने आगे कहा कि दोनों देश एक ऐसे व्यापारिक रिश्ते का निर्माण कर रहे हैं जो निष्पक्ष, पारस्परिक और दोनों के लिए फायदेमंद हो. उन्होंने घोषणा की कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा करेंगे.
'पैक्स सिलिका' से लेकर फोर्ड की वापसी तक अमेरिका का भारत पर भरोसा
सर्जियो गोर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अमेरिका के संबंध आम व्यापार से कहीं आगे निकल चुका है. भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो 'पैक्स सिलिका'पहल में सबसे पहले शामिल हुए.
उन्होंने भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग की तारीफ करते हुए कहा कि भारत का ऑटो सेक्टर पूरी तरह आत्मनिर्भर है और वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय साझेदार बन चुका है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिकी दिग्गज कार निर्माता कंपनी 'फोर्ड' है. फोर्ड ने हाल ही में भारत में अपने चेन्नई प्लांट को फिर से शुरू करने और उसका पुनर्गठन करने की घोषणा की है. इस फैसले के तहत फोर्ड अब भारत से पूरी दुनिया के लिए गाड़ियों के इंजन का निर्माण करेगा.
'अमेरिकी कंपनियों को लेकर भारत में अच्छा माहौल बने'
अमेरिकी राजदूत ने जोर देकर कहा कि अमेरिका केवल भारत का ग्राहक नहीं है, बल्कि एक सक्रिय भागीदार है. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को ऐसा माहौल बनाना जारी रखना चाहिए जहां अमेरिकी कंपनियों को अच्छी बाजार पहुंच मिले और प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिले. साथ ही उन्होंने भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया कि वे भी अमेरिका में अपने परिचालन और कारोबार का विस्तार करें, क्योंकि अमेरिका सभी के लिए व्यापार के दरवाजे खोले हुए है.
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