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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चार दिन का आंदोलन- क्या हासिल कर पाया INDIA गठबंधन?

इंडिया गठबंधन के नेताओं का ये मानना है कि इस तीन-चार दिनों के प्रदर्शन ने विपक्ष को एक नई धार दी है और तमाम मतभेदों के बाद भी एक साथ रहना सिखा दिया है.

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चार दिन का आंदोलन- क्या हासिल कर पाया INDIA गठबंधन?
  • इंडिया गठबंधन ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की और दिल्ली में 3 दिन विरोध जताया
  • पहले दिन राहुल गांधी और अन्य नेताओं को आकाशवाणी भवन के सामने हिरासत में लिया गया, बाद में रिहा कर दिया गया
  • प्रदर्शन के दूसरे दिन कनॉट प्लेस के पास राहुल और प्रियंका गांधी सड़क पर लेट गए और हिरासत में लिए गए
नई दिल्ली:

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लगातार हमलावार है. दिल्ली में पिछले तीन दिन धरना प्रदर्शन चला. इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सबसे पहले 6 अक्टूबर को संसद भवन से अपने आंदोलन की शुरुआत की. 200 से ज्यादा सांसदों का संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक जाने का प्रोग्राम था, लेकिन इन्हें आकाशवाणी भवन के सामने रोक दिया गया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और बाकी नेता आकाशवाणी भवन के अंदर धरने पर बैठ गए. रात को पुलिस ने राहुल, प्रियंका और अन्य नेताओं को आकाशवाणी भवन से उठाकर हिरासत में लिया और फिर उन्हें रिहा कर दिया. उसके बाद अगले दो दिनों तक लंच डिप्लोमेसी चली.

7 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में सागर रत्ना रेस्टोरेंट में इंडिया गठबंधन के 100 से ज्यादा सांसद खाना खाते हैं और योजना के तहत बसों में भरकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं. देर शाम को जब काफिला अशोक रोड के गोलंबर पर पहुंचता है, तो पुलिस उन्हें रोक देती है और वहीं पर राहुल और प्रियंका सड़क पर लेट जाते हैं. पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच खूब धक्कामुक्की भी होती है. राहुल और प्रियंका को हिरासत में लिया जाता है, फिर देर रात उन्हें छोड़ दिया जाता है.

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तीसरा दिन 8 अक्टूबर, इस बार जगह कनॉट प्लेस ही था, लेकिन रेस्टोरेंट अलग था, मोएट में इंडिया गठबंधन के सांसद मिले और बैठक में ये तय हुआ कि लंच करने के बाद राजघाट जाएंगे, लेकिन इंडिया गठबंधन के नेताओं को उस वक्त हैरानी हुई, जब पुलिस ने उन्हें कहीं नहीं रोका. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ये दूसरे दिन जो पुलिस के साथ धक्कामुक्की हुई, उसका ये नतीजा था कि पुलिस ने हमें कहीं नहीं रोका. इंडिया गठबंधन इसे अपनी जीत मानता है.

इंडिया गठबंधन के नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति से मिलने का वक्त मिला, वह भी हमारी जीत है, और करीब 200 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ इंडिया गठबंधन के 10 नेताओं का महामहिम से मिलना भी छोटी बात नहीं है. इंडिया गठबंधन के नेताओं का कहना है कि इन तीन-चार दिनों में हमने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है और ये हमारे लिए बड़ी सफलता है. लोग अब विपक्ष की बातों पर विश्वास करने लगे हैं.

इंडिया गठबंधन के एक नेता ने एनडीटीवी से कहा कि बीजू जनता दल के नेताओं का हमारे प्रर्दशन में शामिल होना ये दर्शाता है कि बीजेपी का संसद में साथ देने वाली पार्टियों में भी अब यह सोच पनप रही है कि विपक्ष अच्छा कर रहा है. आने वाले दिनों में इंडिया गठबंधन में और भी कुछ दल जुटेंगे.

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इंडिया गठबंधन में कांग्रेस पर लगे संवादहीनता के आरोप

हालांकि इन तीन-चार दिनों में कांग्रेस पर संवादहीनता के आरोप भी लगे. उद्धव शिवसेना ने कहा कि हमें या तो बताया नहीं जाता और यदि बताया भी जाता है तो देर से. कुछ ऐसी ही शिकायत की वजह से समाजवादी पार्टी के सांसद पहले दिन यानि सागर रत्ना के लंच में शामिल नहीं हो सके थे. वैसे उसके बाद सपा सांसद लगातार इंडिया गठबंधन के प्रर्दशन में शामिल हो रहे हैं. संसद भवन वाले प्रर्दशन में तो अखिलेश यादव खुद मौजूद थे. राष्ट्रपति से मिलने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष ने अखिलेश यादव को फोन भी किया था और उद्धव ठाकरे तथा आदित्य ठाकरे से राहुल गांधी ने बात की. बाद में आदित्य ठाकरे ने कहा कि हमारा पूरा सर्मथन इंडिया गठबंधन और कांग्रेस को है और हम डेलिगेशन का भी समर्थन करते हैं, एसएलसी चुनाव की वजह से दिल्ली नहीं आ सके. एनसीपी शरद गुट की नेता सुप्रिया सुले ने भी एनडीटीवी से कहा कि हम लोगों के बीच कोई मतभेद नहीं है. दरअसल कभी-कभी प्रोग्राम इतनी जल्दी बनता है कि जो दिल्ली से बाहर हैं, उनका आना संभव नहीं हो पाता, लेकिन जो दिल्ली में हैं वो तो आ ही जाते हैं.

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अब इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रर्दशन की वजह से जो मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं या जिस तरह से बाहर से आने वाली ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है. उसको लेकर सरकार की आलोचना करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस की रणनीति है कि शनिवार को दिल्ली में क्या कुछ घटता है उसके बाद वो अपना प्रोग्राम बनाएगी.

इंडिया गठबंधन के नेताओं का ये मानना है कि इस तीन-चार दिनों के प्रदर्शन ने विपक्ष को एक नई धार दी है और तमाम मतभेदों के बाद भी एक साथ रहना सिखा दिया है. इंडिया गठबंधन के कई दल एक दूसरे के खिलाफ राज्यों में लड़ते हैं, लेकिन दिल्ली की राजनीति में इकट्ठा होते हैं. हालांकि अभी भी आम आदमी पार्टी और डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनने से कतरा रही है. हां संसद के अंदर वो विपक्ष का हिस्सा होते हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन की बैठक में नहीं आते.
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इंडिया गठबंधन की ताकत का पहला अंदाजा उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले देखने को मिलेगा, जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव आमने-सामने बैठकर सीटों का बंटवारा करेंगे. सपा के सांसद राजीव राय ने एनडीटीवी से कहा कि इंडिया गठबंधन साथ-साथ था और आगे भी साथ-साथ रहेगा, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए.

इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन 6 अक्टूबर को जो संसद भवन से शुरू हुआ था उसका समापन भी संसद भवन के सेंट्रल हॉल में हुआ, जहां 100 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने महामहिम राष्ट्रपति को देने के लिए ज्ञापन पर अपने हस्ताक्षर किए. शनिवार को राहुल गांधी चेन्नई में हैं, छात्रों की गूंज वाले प्रोग्राम में रहेंगे और माना जा रहा है कि कांग्रेस रविवार या सोमवार को नई रणनीति के साथ उतरेगी.

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