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This Article is From Feb 22, 2023

शिवसेना मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में विपक्षी एकता की ज़रूरत पर BJP के राम कदम ने कसा तंज़

सामना ने लिखा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कांग्रेस से की गई अपील महत्वपूर्ण है. कांग्रेस को विपक्ष की एकता के लिए पहल करनी चाहिए. यह एकता सही तरीके से हुई तो भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनाव में ‘100’ पर ही ‘ऑल आउट’ कर देंगे.

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शिवसेना मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में विपक्षी एकता की ज़रूरत पर BJP के राम कदम ने कसा तंज़
सामना के संपादकीय में लिखा है कि देश के लोकतंत्र को वधस्तंभ की ओर धकेला जा रहा है.
मुंबई:

शिवसेना के मुखपत्र कहे जाने वाले सामना में विपक्ष की एकता का पेच शीर्षक से संपादकीय लिखा गया है. इसमें कहा गया है कि अगर सभी विपक्षी दल समय पर सतर्क नहीं हुए और एक साथ नहीं आए तो 2024 का लोकसभा चुनाव देश का आखिरी चुनाव साबित होगा. संपादकीय पर तंज कसते हुए भाजपा ने कहा है कि जो लोग अपने खून के रिश्तेदार, भाई, भाभी और परिवार को भी साथ में जोड़कर नहीं रख सके, वह चले हैं विपक्ष को एक करने के लिए.

कांग्रेस से आस, ममता और केसीआर पर वार
सामना के संपादकीय में लिखा है कि देश के लोकतंत्र को वधस्तंभ की ओर धकेला जा रहा है. अगर सभी विपक्षी दल समय पर सतर्क नहीं हुए और एक साथ नहीं आए तो 2024 का लोकसभा चुनाव देश का आखिरी चुनाव साबित होगा, ऐसी चेतावनी शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने दी है. इस पृष्ठभूमि पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा कांग्रेस से की गई अपील महत्वपूर्ण है. कांग्रेस को विपक्ष की एकता के लिए पहल करनी चाहिए. यह एकता सही तरीके से हुई तो भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनाव में ‘100' पर ही ‘ऑल आउट' कर देंगे, ऐसा विश्वास नीतीश कुमार ने व्यक्त किया है. कुमार का यह भी कहना है कि विपक्ष के गठबंधन चाहे जितने भी होते हों, लेकिन कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता संभव नहीं है. नीतीश कुमार ने सच कहा है. भारतीय जनता पार्टी से लड़ना मोदी-शाह की हद से ज्यादा तानाशाही प्रवृत्ति से लड़ने जैसा है. प. बंगाल में ममता बनर्जी, तेलंगाना में के. सी. चंद्रशेखर राव भाजपा से लड़ने के लिए स्वतंत्र चूल्हे लगाकर बैठे हैं, लेकिन ऐसे चूल्हे का कोई मतलब नहीं है. कांग्रेस से द्वेष करके भाजपा की मौजूदा तानाशाही से कैसे लड़ेंगे? इस पहेली को पहले सुलझाना होगा.

ईवीएम पर भी उठाए सवाल
आगे लिखा है, महाराष्ट्र में शिवसेना को तोड़ा और बागी गुट को असली ‘शिवसेना' ठहराकर उन्हें धनुष-बाण चिह्न ‘बेच'दिया. पार्टी के अंदरूनी झगड़े में या तो चिह्न फ्रीज किया जाता है या फिर मूल पार्टी के पास ही रहने दिया जाता है. यहां तो स्पष्ट नजर आ रहा है बागियों ने उसे खरीद लिया. बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी को तोड़ने की कोशिश हुई और अब उपेंद्र कुशवाहा को महाराष्ट्र के मिंधों की तरह तोड़ लिया गया. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के कई कांग्रेस नेताओं को भाजपा ने थोक में खरीद लिया. गुजरात में भी उन्होंने हार्दिक पटेल समेत कई युवा नेताओं को तोड़ा. आज की भाजपा कल की कांग्रेस हो गई है. उस पार्टी के मूल विचार, संस्कार और संस्कृति इसीलिए बारह के भाव में चले गए हैं. चुनावी प्रक्रिया संदेहास्पद हो गई है. ‘ईवीएम' घोटाला करने के लिए इजराइल की ‘टीम जॉर्ज' कंपनी को ठेका देने का खुलासा हो ही गया है. ऐसे समय में विपक्ष को अपने अहंकार को त्याग कर देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ आना चाहिए.

"अब तक शायद उतरी नहीं है?"
सामना के संपादकीय पर भाजपा नेता राम कदम ने ट्वीट कर लिखा, "जो लोग अपने खून के रिश्तेदार, भाई, भाभी और परिवार को भी साथ में जोड़कर नहीं रख सके, इतना हीं नही बल्कि बालासाहेब की सेवा करने वाले सेवक, घर के कर्मचारी, नौकर भी जिन्हें छोड़कर एकनाथ  शिंदेजी के साथ चले गए.. विधायक, सांसद छोड़िए कैबिनेट मंत्री तक वे खुद के साथ जोड़कर नहीं रख पाए और वे निकले हैं मोदीजी के खिलाफ सबको एक करने के लिए. लगता है रात की अब तक शायद उतरी नहीं है?"

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