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हम अपने देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में लहराएंगे- केजरीवाल

अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये कहीं से भी सही नहीं है. क्या हम अपने ही देश में तिरंगा नहीं लहरा सकते. लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार हमें संविधान से मिला है.

हम अपने देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में लहराएंगे- केजरीवाल
अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी के खिलाफ आम आदमी पार्टी
NDTV
नई दिल्ली:

जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने वाले जेन-जी को जेल भेजने पर आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को तिरंगा यात्रा निकाल कर मोदी सरकार का विरोध किया। ‘‘आप'' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने पार्टी मुख्यालय से ली मेरेडियन तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल मार्च किया। उधर, अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी पर पार्टी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मोदी सरकार पर तीखे हमले बोले। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये सही नहीं है। क्या तिरंगा लहराना जुर्म है? अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी दिखाती है कि केंद्र सरकार इनसे कितने डरते हैं। हम अपने देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में लहराएंगे? जिन्हें भारतीय तिरंगे से परेशानी है, वो पाकिस्तान चले जाएं।

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वहीं, तिरंगा लहराने के बाद “आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने धारा 163 और पुलिस की पाबंदियों पर कहा कि यह पुलिस का जुल्म, सरकार की नाकामी और निकम्मापन है। पुलिस ने तो घर से निकलने की भी मंजूरी नहीं दे रखी है, लेकिन उनकी मंजूरी से क्या होता है? हमारे संविधान ने हमें पूरे देश में आजादी से घूमने और अपनी बात रखने की मंजूरी दी है। सरकार के ये सारे प्रतिबंध गैर-कानूनी हैं।

अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने पर सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह बहुत गलत है। अभिजीत दीपके सिर्फ कनॉट प्लेस में तिरंगा लहराने की बात कह रहे थे। जो सरकार कहती थी कि हम कश्मीर में जाकर तिरंगा लहराएंगे और लोगों ने उनका साथ दिया, आज वही सरकार देश के एक दलित युवा को कनॉट प्लेस में तिरंगा नहीं फहराने दे रही है। इससे युवा इनसे और नाराज होंगे।

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इस दौरान “आप” के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा कि हमारा एक ही संदेश है कि इस देश में तिरंगा लहराया जाएगा। देश के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता। अभिजीत दीपके और उससे पहले सीजेपी के दो नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार लगातार लोगों की आवाज कुचलना चाह रही है, लेकिन इनके दमन के बावजूद 2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह आंदोलन पिछले 15 दिनों से जारी है। जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता और एसआईआर रद्द नहीं होता, तब तक पुलिस के दम पर यह आंदोलन न रुका है और न रुकेगा। 

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