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IDFC बैंक घोटाला में ED का बड़ा एक्शन, रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा गिरफ्तार

जांच एजेंसी का आरोप है कि रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा ने मुख्य आरोपी रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी की साजिश में अहम भूमिका निभाई.

IDFC बैंक घोटाला में ED का बड़ा एक्शन, रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा गिरफ्तार
ED इससे पहले 11 मई 2026 को मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और अभय कुमार को भी गिरफ्तार कर चुकी है.

देश के चर्चित IDFC बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को गिरफ्तार कर लिया है. चंडीगढ़ जोनल ऑफिस की टीम ने 29 मई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत वाधवा को हिरासत में लिया. ED के अनुसार यह मामला हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़-पंचकूला के दो निजी स्कूलों के खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की सरकारी और सार्वजनिक धनराशि के गबन से जुड़ा है. 

जांच एजेंसी का दावा है कि यह कोई सामान्य बैंक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है जिसमें बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकालकर उन्हें अलग-अलग माध्यमों से ठिकाने लगाया गया. ED की जांच में सामने आया है कि विक्रम वाधवा इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख सदस्य था.

वैध दिखाने के लिए पैसे को निवेश किया

जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने मुख्य आरोपी रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी की साजिश में अहम भूमिका निभाई. जांच के दौरान यह भी पता चला है कि वाधवा के व्यक्तिगत बैंक खाते में 70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची थी. इसके अलावा उसे भारी मात्रा में नकद धनराशि भी मिली, जो कथित तौर पर गबन की गई रकम से उत्पन्न हुई थी. ED का कहना है कि वाधवा ने इस धन को वैध दिखाने के लिए कई कंपनियों और व्यावसायिक संस्थाओं में निवेश किया तथा इससे कई अचल संपत्तियां भी खरीदीं.

जांच एजेंसी के मुताबिक इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई शेल कंपनियों और बिचौलिया संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया. इनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आर.एस. ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं.

आरोप है कि सरकारी विभागों के खातों से धनराशि सबसे पहले इन कंपनियों में भेजी गई और उसके बाद रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों में घुमाकर उसकी असली पहचान और स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई. इस पूरी प्रक्रिया को मनी लॉन्ड्रिंग की भाषा में लेयरिंग कहा जाता है, जिसका मकसद जांच एजेंसियों के लिए पैसे के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल बनाना होता है.

ज्वैलर्स के खातों में भी ट्रांसफर की गई रकम

ED की जांच में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है. एजेंसी के अनुसार सैकड़ों करोड़ रुपये की रकम कई ज्वैलर्स के खातों में भी ट्रांसफर की गई. आरोप है कि इन बैंकिंग लेन-देन के बदले ज्वैलर्स ने नकद धनराशि उपलब्ध कराई. इसके बाद मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और उसके सहयोगियों ने यह नकदी विभिन्न सरकारी अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाई. ED का दावा है कि विक्रम वाधवा भी उन लोगों में शामिल था जिन्हें इस नेटवर्क के जरिए नकदी उपलब्ध कराई गई. अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले की रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और उससे कितनी संपत्तियां खरीदी गईं.

गिरफ्तारी के बाद विक्रम वाधवा को विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 2 जून 2026 तक चार दिन की ED हिरासत में भेज दिया. इस दौरान एजेंसी उससे पूछताछ कर पैसे के रूट, निवेश, संपत्तियों और अन्य आरोपियों से जुड़े संबंधों की जानकारी जुटा रही है. ED को उम्मीद है कि वाधवा से पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क और मनी ट्रेल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं.

जांच अभी जारी है: ED

इस मामले में ED इससे पहले 11 मई 2026 को मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और अभय कुमार को भी गिरफ्तार कर चुकी है. दोनों आरोपियों से 11 दिनों तक पूछताछ की गई थी, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अब जांच एजेंसी की नजर उन सभी लोगों पर है जिन्होंने इस कथित घोटाले से फायदा उठाया या जिनकी भूमिका सरकारी धन को छिपाने और उसे वैध दिखाने में रही है.

645 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले ने सरकारी वित्तीय प्रबंधन, बैंकिंग निगरानी और सार्वजनिक धन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे पैसे के नेटवर्क, लाभार्थियों तथा इस धन से खरीदी गई संपत्तियों का पता लगाने के लिए लगातार छापेमारी, दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की जा रही है. एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे तथा नई गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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लेखक के बारे में
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मुकेश सिंह सेंगर
Deputy Editor - Crime & Investigation
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