- दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और IAS उदित प्रकाश राय को जेल भेजा गया है
- IAS उदित प्रकाश राय ने 2007 में UPSC परीक्षा में 25वीं रैंक प्राप्त की थी
- उदित प्रकाश राय ने दिल्ली जल बोर्ड के CEO के रूप में अक्टूबर 2021 से मई 2022 तक कार्यभार संभाला था
IAS Udit Prakash Rai: दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन के साथ साल 2007 बैच के आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय को भी जेल भेजा गया है. एंटी करप्शन ब्रांच ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर घोटाले में यह कार्रवाई की है. मई 2024 को विजिलेंस की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था. भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे IAS उदित प्रकाश राय के लिए विवादों से नाता कोई नया नहीं है.
इंजीनियरिंग से IAS बनने तक का सफर
IAS उदित प्रकाश राय का जन्म 23 दिसंबर 1983 को हुआ था. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले उदित प्रकाश ने स्कूली शिक्षा सेंट पॉल्स स्कूल, गोरखपुर से पूरी की. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी में स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस उन्होंने से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवा की तैयारी करते हुए संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2007 में अखिल भारतीय स्तर पर 25वीं रैंक हासिल की और AGMUT कैडर के आईएएस अधिकारी बने.

दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे IAS उदित प्रकाश राय के लिए विवादों से नाता कोई नया नहीं है.
दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ के पद पर रहे
उदित प्रकाश ने 18 अगस्त 2007 को भारतीय प्रशासनिक सेवा ज्वाइन की. शुरुआत अंडमान-निकोबार प्रशासन से हुई, जहां उन्होंने भूमि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग में अपनी सेवाएं दीं. फिर दिल्ली के शिक्षा विभाग में एडिशनल डायरेक्टर, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर, साउथ अंडमान के डीएम और दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी जैसे पद संभाले. अक्टूबर 2021 से मई 2022 तक वह दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ के पद पर रहे.
विवादों से भरा प्रशासनिक करियर
मीडिया की खबरों के अनुसार अपने सेवाकाल के दौरान आईएएस उदित प्रकाश राय का नाम कई गंभीर मामलों में सामने आया. साल 2020 में दिल्ली एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के वाइस चेयरमैन रहते हुए उन पर एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को बचाने के एवज में 50 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा.

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APAR में फर्जी दस्तखत का आरोप
साल 2017 से 2021 के बीच अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ रहने के दौरान उन पर जल विहार स्थित पठान काल के ऐतिहासिक ढांचे को गिराकर करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से 5500 वर्गमीटर में सरकारी आवास बनवाने का आरोप लगा. इसी मामले के चलते 31 जुलाई 2023 को गृह मंत्रालय ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
अब STP टेंडर मामले में हुई गिरफ्तारी
19 अगस्त 2026 को एंटी करप्शन ब्रांच ने दिल्ली जल बोर्ड के STP प्रोजेक्ट्स के टेंडर में धांधली और एक निजी कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचाने के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में ईडी भी दिसंबर 2025 में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
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