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भूख, उत्पीड़न सब सहा और फिर भी सैलरी के लाले... ओमान में फंसी शबनम बेगम ने दिलाई यूपी की शहजादी की याद

हैदराबाद की शबनम बेगम ने वीडियो जारी करके अपील की है कि उसे ओमान में प्रताड़ित किया जा रहा था, वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और भागकर दूतावास आ गई. उसने हैदराबाद के नेता से अपील की है उसे यहां से निकालने में मदद करें.

भूख, उत्पीड़न सब सहा और फिर भी सैलरी के लाले... ओमान में फंसी शबनम बेगम ने दिलाई यूपी की शहजादी की याद
  • ओमान के मस्कट में घरेलू नौकरानी शबनम बेगम को एजेंटों ने भेजा, जहां उसे बिना वेतन और भोजन के प्रताड़ित किया गया
  • शबनम ने बताया कि उसे रोजाना पंद्रह घंटे काम कराना पड़ता था और उसका मोबाइल भी एजेंटों ने छीन लिया था
  • तेलंगाना के हैदराबाद निवासी शबनम ने भारतीय विदेश मंत्रालय से सुरक्षा और जल्द वापसी की मांग की है

इंसान की जरूरत और उसके सपने जो उसे देश से खींचकर परदेस ले जाते हैं. कोई खुद से मजबूर है तो कोई परिवार की जरूरतों से. मजबूर दोनों हैं, तभी तो अपनों को छोड़ बेगानों की दुनिया संवारने को मजबूर होता है.बता दें कि ओमान के मस्कट से एक भारतीय महिला शबनम ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई है कि कैसे वो एजेंटों के जरिए ओमान पहुंच गई और वहां उसे बिना खाने, सैलरी और फोन के प्रताड़ित किया गया. इस घटना को सुनकर यूपी के बांदा की शहजादी की याद आ गई जो अपने सपनों को पूरा करने अबू धाबी गई थी. वह अपने प्रेमी की बातों में आकर वहां एक घर में काम करने लगी और वहां बीमार बच्चे की मौत का जिम्मेदार बनाकर उसे फांसी दे दी गई. इन मामलों में अक्सर एजेंट झूठे वादे करके और बड़े-बड़े सपने दिखाकर लोगों को विदेश में ले जाते हैं, लेकिन शहजादी तो प्रेम में चली गई थी. खैर, आज बात कर रहे हैं ओमान के मस्कट से गुहार लगा रही शबनम बेगम की. वहां घरेलू नौकरानी के तौर पर काम करने वाली शबनम ने आरोप लगाया है कि उसे वहां रोज 15 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया गया और तीन महीने से अधिक समय से उसको न सैलरी मिली और न ही पेटभर खाना. बता दें कि तेलंगाना के हैदराबाद की रहने वाली शबनम ने एक नेता को भेजे गए वीडियो में बताया कि उसे एक स्थानीय एजेंट ने 26 मार्च को ओमान भेजा था.

दिन-रात काम करवाया, मोबाइल छीन लिया,पेटभर खाना भी नहीं दिया- शबनम बेगम

हैदराबाद के मजलिस बचाओ तहरीक के अहमद उल्लाह खान को भेजे गए वीडियो में उन्होंने कहा कि मेरा नाम शबनम बेगम है. मैं काम के लिए मार्च 2026 में यहां आई थी. एजेंट के जरिए मैं यहां पहुंची. मुझसे यहां दिन-रात काम करवाया जा रहा था और सैलरी भी नहीं दे रहे थे. मुझसे मेरा मोबाइल भी छीन लिया था. मेरे 4 बच्चे हैं, 3 बेटी और 1 बेटा. मुझे बहुत टॉर्चर किया गया तो मैं भागकर मस्कट की एंबेसी आ गई. उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंटों ने उसका पासपोर्ट छीन लिया है और अमजद उल्लाह से मदद की अपील भी की.

अमजद उल्लाह ने की विदेश मंत्रालय से अपील

अमजद उल्लाह ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करके भारत के विदेश मंत्रालय से अपील की. उसमें उन्होंने बताया कि उसे 200 ओमानी रियाल (लगभग 50,000 रुपये) के मासिक वेतन पर घरेलू नौकरानी के रूप में काम करने के लिए मस्कट बुलाया गया था. ओमान पहुंचने के बाद उसे अलग-अलग घरों में प्रतिदिन 12-15 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया गया. उसे सही ढंग से खाना और आवास नहीं दिया गया. करीब चार महीने तक कोई सैलरी नहीं दी गई.  उन्होंने बताया कि उसके परिवार ने विदेशमंत्री एस जयशंकर से अनुरोध किया है कि वे मस्कट स्थित भारतीय दूतावास को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और तुरंत हैदराबाद वापस भेजने का निर्देश दें. वहीं इस पोस्ट के बाद दूतावास ने उनके पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने मामले का संज्ञान लिया है. अमजद उल्लाह ने ये मांग भी की कि झूठे वादों के तहत उसे भेजने के लिए जिम्मेदार एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए.

अबू धाबी पहुंची यूपी की शहजादी के साथ क्या हुआ था, जाने लें

यूपी के बांदा की रहने वाली शहजादी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था. 8 साल की उम्र में उसके चेहरे पर खौलता पानी गिर गया था, जिसके कारण उसका पूरा चेहरा झुलस गया था. इसके बाद शहजादी के मन में यही था कि इतना पैसा कमा ले ताकि चेहरे की सर्जरी करवा ले. 2020 में उसकी मुलाकात आगरा के उजैर से हुई. दोनों के बीच मोहब्बत परवान चढ़ने लगी. शहजादी उजैर पर आंख बंद करके भरोसा करने लगी. उजैर ने उसे अबू धाबी जाने के लिए राजी कर लिया. उजैर ने कहा कि वहां उसके चेहरे की सर्जरी भी हो जाएगी. लेकिन उजैर ने उसे डेढ़ लाख रुपये में अपनी फूफी नाजिया के घर भेज दिया. नाजिया वहीं प्रोफेसर थी. इस दौरान उजैर भी दूरी बढ़ाने लगा. धीरे-धीरे शहजादी को अहसास होने लगा कि वह फंस चुकी है. उसका पासपोर्ट भी नाजिया के पास था.

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(शहजादी और उसके माता-पिता)

इसी बीच नाजिया ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसकी देखरेख शहजादी को दी गई. बच्चा जब 4 महीने का था तो उसे टीका लगाया गया, जिसके कुछ घंटों पर उसकी मौत हो गई. इसका इल्जाम उन्होंने शहजादी पर लगाया गया कि बच्चे को उसने ही मारा है. उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया. कोर्ट ने शहजादी को दोषी माना और मौत की सजा सुना दी. शहजादी ने रोते हुए अपने पिता को फोन भी किया था कि उसे फंसाया गया है और शायद वह उनसे कभी नहीं मिल पाएगी.माता-पिता ने रोते-रोते कई जगह जाकर गुहार लगाई, लेकिन कुछ नहीं हो पाया. उसे अबू धाबी में ही मौत की सजा दे दी गई. उसके मां-बाप आखिरी बार उसे देख भी नहीं पाए.

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