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बंद पुल, लाखों की भीड़ और शून्य ट्रैफिक जाम: गणपति की विदाई के लिए ये था “सत्यनारायण” का मास्टर प्लान

ट्रैफिक पुलिस की ओर से वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिये 51 वॉच टॉवर लगाये गये थे. इतने बड़े आयोजन को संभालने के लिये सत्यनारायण चौधरी के पास सिर्फ ट्रैफिक पुलिस के कुल मिलाकर सिर्फ 3800 कर्मचारी ही थे. फिर भी ये सफलता से हो गया.

बंद पुल, लाखों की भीड़ और शून्य ट्रैफिक जाम: गणपति की विदाई के लिए ये था “सत्यनारायण” का मास्टर प्लान
मुंबई में इस बार का गणपति विसर्जन संभालना पुल बंद होने के कारण बहुत बड़ी जिम्मेदारी बन गई थी.

मुंबई पुलिस के लिए हर साल सबसे बड़ी चुनौती होती है अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन. दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के आखिरी दिन शहर भर के पंडालों से भीमकाय प्रतिमाएं निकल पड़ती हैं सागर तटों की ओर विसर्जन के लिए. विसर्जन के जुलूस में लाखों लोगों का हुजूम साथ होता है. इतनी बड़ी भीड़ के मद्देनजर पुलिस के लिए कानून व्यवस्था बनाये रखने के चुनौती तो होती ही है, लेकिन साथ साथ शहर के यातायात को नियंत्रित रखना भी एक टेढ़ी खीर होती है. मुंबई ट्रैफिक पुलिस के लिए इस साल का विसर्जन और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि शहर के दो बड़े पुल मरम्मत के लिए बंद हैं.

“सत्यनारायण” की भूमिका

मुंबई पुलिस की ट्रैफिक शाखा के प्रमुख सत्यनारायण चौधरी के लिये शुक्रवार का दिन एक बडी उपलब्धि लेकर आया. दो करोड़ की आबादी वाले शहर, जिसकी सडकों पर करीब 30 से 40 लाख वाहन रोजाना दौडते हैं, वहां गणपति विसर्जन बिना किसी ट्रैफिक समस्या के निपटाना किसी जंग जीतने से कम नहीं था. यहां तक कि शहर की सबसे हाई प्रोफाईल सडक मरीन ड्राईव, जो कि मुंबई के सबसे बडे विसर्जन स्थल गिरगांव चौपाटी से लगकर है, पर भी ट्रैफिक बिना किसी व्यवधान के जारी रहा. असली चुनौती मध्य मुंबई की थी, जहां से लालबाग के राजा और चिंचपोकली के चिंतामणि की विसर्जन यात्रा गुजरती है. मध्य मुंबई के दो प्रमुख पुल – सायन ब्रिज और एलफिंस्टन ब्रिज की मरम्मत का काम गणेशोत्सव से पहले पूरा किया जाना था, लेकिन ऐसा हो न सका.

फिर बना जमीन से जुड़ा प्लान 

चूंकि सत्यनारायण चौधरी ट्रैफिक पुलिस प्रमुख के पद पर नियुक्ति से पहले मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) के पद पर कार्यरत रह चुके थे, उन्हें इस बात का अंदाजा था कि गणपति विसर्जन वाले दिन मुंबई शहर में क्या माहौल रहता है और उस दिन शहर को सामान्य रूप से चलते रहने देना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता. उन्होंने हफ्तों पहले ही रणनीति बनानी शुरू कर दी. फिर शुरू हुआ वर्ली के ट्रैफिक पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठकों का सिलसिला. रणनीति सिर्फ मुख्यालय में बैठक करके नहीं बनाई गई, बल्कि जमीनी स्तर पर भी समस्या वाले ठिकानों का जाकर मुआयना किया गया.

ऐसे निपटा सबसे बड़ा ट्रैफिक का काम

मुंबई बंदरगाह को मुंबई पोर्ट ट्रस्ट संचालित करता है, जिसके पास शहर में सबसे बडा भूखंड है. इस भूखंड का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा हुआ है. सत्यनारायण चौधरी ने मध्य मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिये इस खाली जगह को पार्किंग स्थल के तौर पर इस्तेमाल करने का फैसला किया. जिसमें कभी 1200 वाहन खड़े किया जा सकते थे. कुछ सड़कों पर ट्रैफिक को डाईवर्ट किया गया और इसके लिये गूगल से सहयोग मिला. डाईवर्ट किये गये रास्तों की जानकारी गूगल के जरिये वाहन चालकों को दी गयी. 200 ट्रैफिक कांस्टेबल बतौर राइडर लगातार विसर्जन वाले मार्ग पर गश्त लगा रहे थे और विसर्जन मार्ग को नो पार्किंग जोन घोषित कर दिया गया था. इन रास्तों पर अगर कोई वाहन बिगड़ जाये तो तुरंत उन्हें हटाने के लिये 90 क्रेन का इंतजाम किया गया था. वाहन चालकों और विसर्जन में शामिल भक्तों को जानकारी देने के लिये शहर भर में साइन बोर्ड लगाये गये थे. भारी वाहनों की आवाजाही पर दिन भर के लिये रोक लगा दी गयी.

मुंबई के सभी विसर्जन स्थलों पर भी व्यापक तैयारियां की गयीं थीं. ट्रैफिक पुलिस की ओर से वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिये 51 वॉच टॉवर लगाये गये थे. इतने बड़े आयोजन को संभालने के लिये सत्यनारायण चौधरी के पास सिर्फ ट्रैफिक पुलिस के कुल मिलाकर सिर्फ 3800 कर्मचारी ही थे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिये ज्यादा लोगों की जरूरत थी और इसलिये एनसीसी और स्वयंसेवी संगठनों के करीब 700 स्वयंसेवकों की मदद ली गयी.

विसर्जन वाले दिन ज्वाइंट कमिश्नर चौधरी अपने दफ्तर में सीसीटीवी कैमरों पर नजर रखे हुए थे और कुछ वक्त के लिये सड़क पर भी मुआयने के लिये उतरे. डेढ़ करोड़ की आबादी वाले शहर के ट्रैफिक का विसर्जन वाले दिन बिना किसी गड़बड़ी के नियंत्रित करना उनके पुलिसिया करियर की दूसरी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. पिछले साल बतौर ज्वाइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर चौधरी ने बिना एक लाठी चलाये मुंबई में हुए मराठा आंदोलन को निपटाया था.

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