- स्वच्छ भारत, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना ने महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और समय की बचत सुनिश्चित की.
- तीन तलाक खत्म करने, आवास योजना में मालिकाना हक, महिला सुरक्षा ढांचे ने उनकी सामाजिक स्थिति को मजबूत किया.
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम और पंचायती राज में भागीदारी ने महिलाओं को नीति निर्माण में भी मजबूत स्थान दिया.
2014 में गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही पीएम नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाने को बड़ी प्राथमिकता दी. इन वर्षों में मोदी सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को सुरक्षित, सम्मानजनक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एक विस्तृत और लंबे समय का नजरिया अपनाया. इन 12 वर्षों में महिलाओं के लिए कुछ ऐसी नीतियां लागू की गईं, जिनसे समाज में उनके प्रति सोच और उनके लिए आर्थिक सोच दोनों में बदलाव आया. इसकी शुरुआत स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के स्वतंत्रता दिवस के भाषण से की. उन्होंने महिलाओं की गरिमा और स्वच्छ भारत मिशन पर जोर देते हुए एक बड़ा संदेश दिया. इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन देश में एक बड़ा मूवमेंट बन गया और इसके तहत जो बदलाव आए उनसे सीधे तौर पर महिलाए बड़े स्तर पर लाभान्वित हुईं.
देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए. इसका सबसे अधिक लाभ देश के ग्रामीण इलाकों को मिला. यहां महिलाओं को खुले में शौच की मजबूरी से राहत मिली. माहवारी के दौरान सफाई और आम स्वास्थ्य के प्रति सजगता से कुल मिलाकर महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ. पीएम सरकार की इस पहल ने महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान तीनों को बेहतर किया.

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जल जीवन मिशन और उज्ज्वला योजना लाया बड़ा बदलाव
मोदी सरकार ने जब जल जीवन मिशन शुरू किया तो ग्रामीण महिलाओं को ही इसका सबसे बड़ा लाभ मिला. ग्रामीण इलाकों में नल के पानी की सुविधा 2019 के 3.23 करोड़ घरों से बढ़कर मई 2026 तक 15.84 करोड़ घरों तक पहुंच गई. सुदूर इलाके से सिर पर पानी ढो कर लाने की रोजमर्रा की परेशानी से महिलाओं को मुक्ति मिली. जिन घरों में पानी लाने में घर की बच्चियां लगी थीं उनके समय की बचत हुई जो पढ़ाई और रोजमर्रा के अन्य कामों में लगाया गया. एक स्टडी के मुताबिक पानी लाने की निर्भरता घटने से महिलाओं की कृषि और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ी.
इसी तरह जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना लाया गया और यह करोड़ों घरों तक पहुंचा तो इसने भी महिलाओं को जीवन को आसान बनाया. पीएम उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए. पहले वो लकड़ी और कोयले के चूल्हे के धुंए से होनी वाली बीमारियों से जूझा करती थीं साथ ही उन्हें ही चूल्हे के लिए लकड़ियां भी इकट्ठा करनी पड़ती थी. पीएम उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन मिलने से घरों के अंदर होने वाला प्रदूषण कम हुआ. इसका सीधा लाभ महिलाओं को मिला, क्योंकि अधिकांश घरों में महिलाएं ही खाना बनाने का काम करती हैं.

सामाजिक सुधार और महिला अधिकारों की रक्षा
सरकार ने केवल सुविधा नहीं दी बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े सुधार भी किए. इनमें तीन तलाक जैसी पुरानी प्रथा को खत्म किया जाना शामिल है. इससे मुस्लिम महिलाओं को संवैधानिक सुरक्षा मिली और साथ ही महिला अधिकारों को मजबूत कानूनी आधार भी हासिल हुआ.
इतना ही नहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मोदी सरकार ने महिलाओं को घरों में मालिकाना हक देने पर विशेष जोर दिया. इसके तहत 70 फीसद से अधिक घर महिलाओं के नाम या संयुक्त नाम पर दर्ज किया गया. इससे एक ओर परिवार और समाज में महिलाओं के निर्णय की अहमियत बढ़ी तो दूसरी तरफ उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिला.
In Jhabua district, COVID-19 pushed 16-year-old Durga out of school and into farm labour.
— UNICEF India (@UNICEFIndia) February 27, 2026
Through the District Action Plan under Beti Bachao Beti Padhao, supported by UNICEF, 14 departments converged to bring her back, this time into skills training, life skills education,… pic.twitter.com/V5oxXyJRp5
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से सोच में बदलाव
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने समाज में गहरी सोच बदल दी. बेटियों को बोझ नहीं बल्कि शक्ति माना जाने लगा. इसका असर लिंग अनुपात में भी दिखा, जहां सुधार देखा गया. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 में 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है. बता दें कि मोदी सरकार लिंगानुपात की स्थिति के आधार पर जिलों को फंड भी देती है. इसके तहत प्रति जिले 20 से 40 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है.
जिन जिलों में लिंगानुपात 918 या उससे कम है, उन्हें प्रति वर्ष 40 लाख रुपये की सहायता दी जाती है. 919 से 952 के बीच लिंगानुपात वाले जिलों को प्रति वर्ष 30 लाख रुपये की सहायता दी जाती है. वहीं जिन जिलों का एसआरबी 952 से अधिक है, उन्हें प्रति वर्ष 20 लाख रुपये की सहायता दी जाती है.
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा में भी लड़कियों की भागीदारी बढ़ी. इन आंकड़ों के मुताबिक माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 फीसद से बढ़कर 2024-25 में 80.2 फीसद हो गया.
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पोषण भी, पढ़ाई भी, आर्थिक सशक्तिकरण भी और उद्यमिता का विस्तार भी
महिलाओं के लिए सबसे बड़ा लाभ उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए मोदी सरकार के कई नीतिगत कदम हैं. इसके तहत सबसे पहले बुनियादी सेवाओं को मजबूत किया गया. आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए मिशन वात्सल्य शुरू किया गया. इसके तहत मां एवं बच्चे के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई. परिवार कल्याण विभाग का दावा है कि इससे अधिक स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी तैयार हो रही है.
'पोषण भी पढ़ाई भी' योजना के तहत 0–6 वर्ष के बच्चों के लिए पोषण के साथ ही साथ खेल-खेल में पढ़ाई को भी शामिल किया गया. पिछले साल दिसंबर तक इसके लिए देशभर में 8.55 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और 41,645 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. आधारशिला (0–3 वर्ष) और नवचेतना (3–6 वर्ष) नाम से 12 क्षेत्रीय भाषाओं में देशभर में पाठ्यक्रम लागू किए गए हैं.
पीएम पोषण के तहत पोषक स्कूल भोजन बच्चों, खासकर लड़कियों को भूख से मुक्त रखने, नियमित रूप से कक्षा में आने, ध्यान केंद्रित करने और कक्षा में सफल होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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महिलाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत सिस्टम
मोदी सरकार के कार्यकाल के दौराान महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई संस्थागत व्यवस्थाएं बनाई गईं. इसमें वन स्टॉप सेंटर की स्थापना, महिला हेल्पलाइन सिस्टम, थानों में महिला हेल्प डेस्क और मिशन शक्ति के तहत समग्र सुरक्षा ढांचा बनाना शामिल है. इससे संकट में फंसी महिलाओं को तुरंत सहायता और न्याय मिलना आसान हुआ.
स्टार्टअप में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी. आज कई स्टार्टअप में महिला डायरेक्टर शामिल हैं. वहीं पीएम मुद्रा योजना की 70 फीसद लाभार्थी महिलाएं हैं. तो स्टैंडअप इंडिया में 75 फीसद ऋण महिलाओं को दिया गया है. जब मोदी पीएम बने थे तब उन्होंने जनधन योजना लागू की थी, इन खातों में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है. ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब लाभार्थी से आगे बढ़कर उद्यमी बन रही हैं.
एक तरफ ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है. 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिसमें 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. इससे महिलाओं में वित्तीय अनुशासन और बचत की आदत विकसित हुई. दूसरी तरफ महिलाओं के छोटे व्यवसाय और रोजगार के अवसर बढ़े. लखपति दीदी योजना ने इस बदलाव को और आगे बढ़ाया है. खुद पीएम मोदी ने बीते वर्ष बताया था कि इसके तहत आज 1 करोड़ से अधिक महिलाएं सालाना 1 लाख से अधिक कमा रही हैं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई.
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम और राजनीतिक भागीदारी
मोदी सरकार के इन 12 वर्षों के दौरान महिलाओं को नीति निर्माण में हिस्सेदारी देने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए. संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान, पंचायती राज में 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधि और 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय हैं. इससे आम महिलाओं की आवाज अब नीति निर्माताओं तक पहुंच रही हैं.
महिलाएं अब शिक्षा और विज्ञान में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं. उच्च शिक्षा में लगभग 50 फीसद नामांकन महिलाओं का है. पीएचडी में महिला शोधार्थियों का नामांकन 135.6% की असाधारण वृद्धि (2014–15 से 2022–23 तक) के साथ दोगुना से अधिक बढ़ गया है. इससे 64,724 अतिरिक्त महिला शोधकर्ता जुड़ी हैं.
इसका एक बेहतरीन उदाहरण चंद्रयान 3 मिशन है, जहां बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक शामिल हैं. यह बदलाव भारत को वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र में नई दिशा दे रहा है.
सरकार महिलाओं को भविष्य की तकनीक से भी जोड़ रही है. मोदी सरकार नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत ड्रोन प्रशिक्षण, कृषि में आधुनिक तकनीक का उपयोग, अतिरिक्त आय के नए अवसर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तकनीकी भागीदारी को बढ़ावा दे रही है.

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संबल, वन स्टॉप सेंटर से लेकर शक्ति सदन तक
सरकार ने संबल उप-योजना शुरू की. यह महिलाओं को हिंसा से बचने और उबरने में मदद करने के लिए बनाई गई है. इसके तहत वन स्टॉप सेंटर (सखी सेंटर) बनाए गए हैं, जो किसी भी तरह की हिंसा (घरेलू, यौन, एसिड अटैक, तस्करी आदि) की शिकार महिलाओं और लड़कियों को तत्काल मदद देते हैं. यह आपातकालीन चिकित्सा सहायता, कानूनी परामर्श, पुलिस सहायता, आदि देते हैं.
एक 24×7 टोल-फ्री आपातकालीन सेवा भी परामर्श, जानकारी और पुलिस, चिकित्सा या कानूनी सहायता के लिए दी गई है. जो संकट की स्थिति में पहले कॉन्टैक्ट पॉइंट के तौर पर काम करती है. यह हेल्पलाइन हर महीने हजारों की संख्या में कॉल हैंडल करती है और उन्हें तुरंत मदद देती है. वहीं नारी अदालतें (सामुदायिक स्तर की अनौपचारिक अदालतें) घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े विवादों को मध्यस्थता और जागरूकता के माध्यम से हल करती है.
सरकार ने शक्ति सदन का गठन किया है, जो तस्करी या कठिन परिस्थितियों से बचाई गई महिलाओं और लड़कियों को आश्रय, देखभाल, परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास प्रदान करती है. वहीं सखी निवास कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती होस्टल की सुविधा देती है, ताकि रोजगार के लिए आने-जाने में सुविधा हो.
कुल मिलाकर, पिछले 12 वर्षों में महिलाओं के लिए बनाई गई नीतियों ने भारत के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को बदल दिया है. अब महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं हैं बल्कि वे उद्यमी, नेतृत्वकर्ता और नीति निर्माण की भागीदार बन रही हैं.
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