हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सेशन के अंतिम दिन एक नया संशोधन विधेयक पारित किया गया. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार (2 अप्रैल) को हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026 सदन में पेश किया था. जिसे विपक्ष के विरोध के बावजूद पारित कर दिया गया. इस विधेयक के विरोध का कारण इसमें दिए गए प्रावधान है. जिसमें कहा गया है कि अगर कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार दिया जाता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा.
बताया जा रहा है कि इस बिल को लाने की वजह यह है कि फरवरी 2024 में कांग्रेस के 6 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के वक्त अपनी की पार्टी के कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी के खिलाफ क्रॉस वोटिंग की थी. जिससे अभिषेक मनु सिंघवी चुनाव हार गए थे और बीजेपी के उम्मीदवार हर्ष महाजन चुनाव जीते थे. उस वक्त विधानसभा स्पीकर ने कांग्रेस के 6 विधायकों को दलबदल क़ानून के तहत अयोग्य करार दिया था. उसी सन्दर्भ में आज इन विधायकों में कुछ की पेंशन समाप्त करने को लेकर ये बिल पेश होने बाद बीजेपी विधायकों के विरोध के बाद पारित किया गया.
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1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है
दरअसल यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दिए जाते है. मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 5 वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य के लिए मासिक पेंशन का प्रावधान है. हालांकि इससे पहले, उन्होंने पूर्व में हिमाचल सदन में पारित उस विधेयक को भी वापस लिया, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई थी.
दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन
विधेयक के उद्देश्य और कारणों में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा जब हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र बिका सब ने देखा कि मौजूदा कानून में दल-बदल को हतोत्साहित करने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं था. ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन लाया गया है. भाजपा विधायक दल बदल का समर्थन कर ऑपरेशन लोटस को बढ़ावा देना चाहते हैं. फरवरी 2024 का वह दिन हिमाचल के इतिहास में काला दिन था जब भाजपा ने धन बल और ईडी का दुरुपयोग कर सरकार की गिराने की साजिश की. इस बिल को इसलिए लाया गया है -ताकि भविष्य में लोकतंत्र न बिके सके.
विपक्ष ने लगाया आरोप
इस बिल पर विपक्ष ने अपना विरोध जताया और कहा कि राजनीतिक बदले की भावना से इस बिल को सदन में लाया गया है. इससे पहले भी इस विधेयक में संशोधन लाया था, उसे मंजूरी नहीं मिली, अब दोबारा इस तरह का संशोधन विधेयक सदन ने लाया गया है. जो उचित नहीं है, दलबदल करने वाले विधायकों की सदस्यता रद्द कर उनको सजा मिल चुकी है. सरकार उन विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज कर रही है. उनके परिवारों को तंग किया जा रहा है - ये सही नहीं है. बिना विचार किए मुख्यमंत्री बिल ला रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने कहा कि इससे पहले सभी विधायकों को पेंशन से बाहर करने का बिल लाए जिसे मंजूरी नहीं मिली अब दो विधायकों को टारगेट कर बिल लाया जा रहा है. लोकतंत्र में ऐसा ठीक नहीं है, फ़िर ये बिल कोर्ट में जाएगा, सरकार व सदन की फजीहत होगी. ऐसे में बिल वापिस लिया जाए. कांग्रेस पार्टी ने देश भर में 90 मर्तबा दल बदल नियमों की धज्जियां उड़ाई.
गौरतलब है कि इस विधेयक के पारित होने के बाद पूर्व में कांग्रेस के गगरेट से विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन भी बंद हो जाएगी, क्योंकि इन दोनों पूर्व विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट और कांग्रेस पार्टी व्हिव का भी उल्लंघन किया था. सुक्खू सरकार इन्हीं विधायकों को सबक सिखाने के लिए ये बिल लाया गया.
दरअसल कुलदीप सिंह पठानिया ने गगरेट के विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टो दोनों को अयोग्य घोषित ठहराया. दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि दलबदल करने वाले अन्य 4 विधायको सुधीर शर्मा, इन्द्र दत्त लखनपाल, राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर इनकी पेंशन को खत्म करने पर भी बिल पारित होकर गया राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिली क्योंकि ये विधायक पहले भी हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे हैं. इस वजह से उनकी पेंशन पर कोई संकट नहीं है. लेकिन भविष्य में यदि कोई विधायक दल बदल करता है तो उस पर कानून के प्रावधान लागू होंगे.
विधायकों को मिलने वाले पेंशन और भत्ते
हिमाचल प्रदेश में पूर्व विधायकों को प्रति माह लगभग 1.29 लाख रुपये (महंगाई भत्ते सहित) तक पेंशन मिलती है. अक्टूबर 2025 में की गई बढ़ोतरी के बाद, उनकी मूल पेंशन 36,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है, जिसमें 169% महंगाई भत्ता शामिल है. इसमें 5 वर्ष से अधिक रहे सदस्यों को अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष के लिए 1,000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त पेंशन मिलती है.
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