High Speed Rail Corridor Explained: देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए बजट में सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया गया है. दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों को इस हाईस्पीड बुलेट ट्रेन के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. अभी देश में मुंबई से अहमदाबाद तक हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर काम चल रहा है, जो 15 अगस्त 2027 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन 7 कॉरिडोर के निर्माण पर 16 लाख करोड़ रुपये निवेश का अनुमान जताया है. ऐसे हाईस्पीड रेलवे ट्रैक पर ट्रेनें 250 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी. सरकार इसके लिए स्वदेशी 'वंदे भारत' हाई-स्पीड प्लेटफॉर्म और जापानी बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगी.
बजट 2026-27 में घोषित 7 नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल बड़े महानगरों को जोड़ेंगे, बल्कि अनुमान है कि देश के लगभग 40 से 50 प्रमुख बड़े शहर इंटीग्रेटेड हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क के दायरे में आएंगे.ये ट्रेनें औसतन हर 100-150 किमी पर ठहरेंगी. लिहाजा टियर-2 और टियर-3 शहर भी कनेक्ट हो जाएंगे.
- 4 हजार किलोमीटर लंबे ये सात हाई-स्पीड कॉरिडोर
- 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा इस प्रोजेक्ट में
- 40 से 50 शहर जुड़ेंगे इस हाईस्पीड नेटवर्क से
- 2025-2040 तक पूरा होंगे, एक साथ शुरू होगा काम
दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर
प्रमुख शहर: दिल्ली (सराय काले खां), नोएडा, जेवर (इंटरनेशनल एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या (कनेक्टिंग लिंक), रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी
कुल स्टेशन: लगभग 12-13
मुंबई- पुणे-हैदराबाद रेल कॉरिडोर
प्रमुख शहर: हाईस्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई (BKC/नवी मुंबई), लोनावला, पुणे, दौंड, पंढरपुर, सोलापुर, कलबुर्गी (गुलबर्गा), जहीराबाद और हैदराबाद. यह महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना को आपस में जोड़ देगा
हैदराबाद -बेंगलुरु-चेन्नई (दक्षिण भारत का ट्राएंगल)
प्रमुख शहर: इन तीन कॉरिडोर के माध्यम से दक्षिण भारत के मुख्य आईटी और औद्योगिक शहर जुड़ेंगे. हैदराबाद – बेंगलुरु: महबूबनगर, कुरनूल, गुंतकल, अनंतपुर, डोड्डाबल्लापुरा और बेंगलुरु.
कुल स्टेशन: बेंगलुरु-चेन्नई: बेंगलुरु (KSR), होसुर, कृष्णगिरि, जोलारपेट्टई, वेल्लोर, रानीपेट, कांचीपुरम और चेन्नई. हैदराबाद – चेन्नई: नलगोंडा, गुंटूर, नेल्लोर और तिरुपति.
वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर
यह पूर्वोत्तर भारत (Northeast) और यूपी, बिहार और बंगाल के लिए गेमचेंजर साबित होगा. यूपी, बिहार और बंगाल को जोड़ते हुए उत्तर-पूर्व भारत के लिए सबसे तेज रास्ता बनेगा
प्रमुख शहर: वाराणसी, पटना (बिहार), गया, पूर्णिया और सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल).

High Speed Rail Corridor
मुंबई-पुणे-हैदराबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
रेल मंत्री ने कहा कि मुंबई और पुणे के बीच ट्रेन यात्रा का समय सिर्फ 48 मिनट रह जाएगा. पुणे-हैदराबाद की यात्रा में लगभग 1 घंटा 55 मिनट लगेंगे. निर्माणाधीन अहमदाबाद मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को भी पुणे और हैदराबाद तक बढ़ाया जाएगा. इसी से आगे बेंगलुरु और चेन्नई तक रेल कनेक्टिविटी होगी.
दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर
देश की राजधानी दिल्ली से सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी तक यात्रा का समय घटकर 3 घंटे 50 मिनट हो जाएगा. बिहार की राजधानी पटना होते हुए वाराणसी सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) की यात्रा में लगभग 2 घंटे 55 मिनट लगेंगे. इससे दिल्ली से उत्तर प्रदेश और बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल तक एक नया इकोनॉमिक कॉरिडोर बनेगा.
उत्तर और पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी
दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन (मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज) को बड़ा फायदा देगा. दिल्ली हावड़ा रूट काफी व्यस्त है और काफी ट्रेनों की आवाजाही रहती है. ऐसे में स्पेशल डेडिकेटेड कॉरिडोर से फायदा होगा.वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी यूपी, बिहार और बंगाल के जरिये पूर्वोतर भारत (Northeast) के प्रवेश द्वार सिलिगुड़ी से जुडे़गा.
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का फायदा
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर से हवाई यात्रा और सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा, इससे प्रदूषण में भारी कमी आएगी. बिजनेस, पर्यटन और आम आवाजाही को रफ्तार मिलेगी. इन हाई स्पीड स्टेशनों के आसपास नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होंगे, जिससे लाखों रोजगार पैदा होंगे।
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का रूट मैप
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की DPR की बात करें तो नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन (NHSRCL) ने इन 7 में से छह कॉरिडोर की परियोजना रिपोर्ट पहले ही रेल मंत्रालय को सौंप दी है. वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण अभी होना है.
हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का खर्च
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अनुभव का फायदा उठाते हुए नए हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट पर काम एक साथ काम शुरू करने की तैयारी है. ताकि इनमें से कुछ सेक्शन 2035-2040 तक चालू हो जाएंगे.
हाईस्पीड कॉरिडोर का मकसद
दक्षिण भारत के हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का ट्रायंगल भी इस नेटवर्क का हिस्सा होगा. चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर से एक हाइब्रिड डायमंड कॉरिडोर बनेगा. ये शहर आपस में बुलेट रफ्तार वाली ट्रेनों से कनेक्ट होंगे. जैसे चीन में बीजिंग, शंघाई जैसे शहरों को जोड़ा गया है. इससे साउथ इंडिया के आईटी और मैन्युफैक्चरिंग हब के बीच व्यापार, आवाजाही आसान होगी.
रेलवे बजट में बंपर बढ़ोतरी
रेलवे के बजट में 2.78 लाख करोड़ (पूंजीगत खर्च 2.93 लाख करोड़) का रिकॉर्ड आवंटन किया गया है. इसका एक बड़ा हिस्सा हाई स्पीड रेलवे कॉरिडोर के डीपीआर, डिजाइन, भूमि अधिग्रहण जैसे कामों के लिए किया जाएगा.
पर्यटन से ट्रांसपोर्ट तक
- धार्मिक तीर्थस्थल जुड़ेंगे- अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज, तिरुपति और पंढरपुर आदि
- टेक-आईटी हब: बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और नोएडा हाईस्पीड ट्रेन नेटवर्क से जुड़ेंगे
- ट्रांसपोर्ट हब: जेवर एयरपोर्ट (नोएडा), नवी मुंबई एयरपोर्ट और सिलीगुड़ी (नेपाल/भूटान बॉर्डर जुड़ेंगे

रेल मंत्री
2047 तक विकसित भारत का सपना
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि हाई स्पीड रेल कॉरिडोर देश में एक साथ विकसित किए जाएंगे. 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में ये क्रांतिकारी कदम होगा. ये सात नए कॉरिडोर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बड़ा बदलाव लाएंगे. लॉजिस्टिक्स में लागत घटेगी, बिजनेस बढ़ेगा. चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद को मिलाकर साउथ हाई स्पीड ट्रायंगल बनेगा. यह प्रोजेक्ट 5 दक्षिणी राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के साथ पुडुचेरी के लिए एक बड़ा बूस्टर डोज होगा.
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