
नई दिल्ली:
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राजधानी दिल्ली में लोकायुक्त की नियुक्ति न होने को लेकर शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को नोटिस जारी किया।
लोकायुक्त पद नवंबर 2013 से ही खाली है, जिसे भरने का निर्देश देने के लिए एक याचिका दाखिल की गई थी।
न्यायाधीश राजीव शकधर ने केंद्र सरकार, दिल्ली के उपराज्यपाल तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री को नोटिस जारी किया और 24 जुलाई तक उनसे जवाब मांगा।
पूर्व विधायक सत्य प्रकाश राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सरकार से जितनी जल्दी हो सके पद को भरने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा, 'जितनी जल्दी आप (दिल्ली सरकार) पद को भरेंगे, उतना ही बेहतर होगा।' इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने न्यायालय से कहा कि लोकायुक्त का पद भरने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से कहा कि 14 फरवरी को कार्यभार ग्रहण करने वाली दिल्ली की आप सरकार ने लोकायुक्त तथा उपलोकायुक्त पद पर नियुक्ति को लेकर कोई कदम नहीं उठाए हैं। जबकि ये पद बीते 18 महीने से खाली पड़े हैं।
याचिका में लोकायुक्त की तत्काल नियुक्ति की मांग करते हुए कहा गया है कि नियुक्ति नहीं होने से इससे संबंधित कई मामले लंबित पड़े हैं और सबसे अहम बात तो यह है कि दिल्ली के निवासियों के कानूनी अधिकार का हनन हो रहा है।
गौरतलब है कि बीते साल 26 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी मामले पर एक अन्य याचिका की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कहा था।
लोकायुक्त पद नवंबर 2013 से ही खाली है, जिसे भरने का निर्देश देने के लिए एक याचिका दाखिल की गई थी।
न्यायाधीश राजीव शकधर ने केंद्र सरकार, दिल्ली के उपराज्यपाल तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री को नोटिस जारी किया और 24 जुलाई तक उनसे जवाब मांगा।
पूर्व विधायक सत्य प्रकाश राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सरकार से जितनी जल्दी हो सके पद को भरने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा, 'जितनी जल्दी आप (दिल्ली सरकार) पद को भरेंगे, उतना ही बेहतर होगा।' इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने न्यायालय से कहा कि लोकायुक्त का पद भरने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से कहा कि 14 फरवरी को कार्यभार ग्रहण करने वाली दिल्ली की आप सरकार ने लोकायुक्त तथा उपलोकायुक्त पद पर नियुक्ति को लेकर कोई कदम नहीं उठाए हैं। जबकि ये पद बीते 18 महीने से खाली पड़े हैं।
याचिका में लोकायुक्त की तत्काल नियुक्ति की मांग करते हुए कहा गया है कि नियुक्ति नहीं होने से इससे संबंधित कई मामले लंबित पड़े हैं और सबसे अहम बात तो यह है कि दिल्ली के निवासियों के कानूनी अधिकार का हनन हो रहा है।
गौरतलब है कि बीते साल 26 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी मामले पर एक अन्य याचिका की सुनवाई करते हुए लोकायुक्त के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कहा था।
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