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परिवार, चरित्र और परवरिश, आखिर कितने लांछन सहेंगी बेटियां? ट्विशा शर्मा केस में हर्षा रिछारिया ने दहेजलोभियों को घेरा

Twisha Sharma Suicide Case: हर्षा ने दहेज के भूखों पर तंज कसते हुए कहा कि सदियों से महिलाओं और लड़कियों के लिए न जने कितने केस सामने आते रहे हैं. फिर लड़की समाज में इसे लेकर कोई डर पैदा नहीं होना चाहिए, क्यों कि दहेज तो सरकार की प्रथा है. लड़की को तो इसकी बलि चढ़ना ही पड़ेगा. लेकिन इस बीच चार-पांच केस लड़कों के क्या आ जाते हैं तो पूरे मर्द समाज में ये भय फैल जाता है.

परिवार, चरित्र और परवरिश, आखिर कितने लांछन सहेंगी बेटियां? ट्विशा शर्मा केस में हर्षा रिछारिया ने दहेजलोभियों को घेरा
दहेज प्रथा पर हर्षा रिछारिया का तंज.
  • महाकुंभ की वायरल गर्ल हर्षा रिछारिया ने दहेज प्रथा को बेटियों की मौत का प्रमुख कारण बताया है
  • ट्विशा शर्मा, पलक और दीपिका के मामले दहेज के लालच की वजह से सामने आए हैं, जो पूरे समाज को झकझोर देने वाले हैं
  • दहेज की मांग पूरी न होने पर प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे मानसिक, शारीरिक रूप से खत्म हो जाती हैं

भोपाल के ट्विशा शर्मा सुसाइड मामले में महाकुंभ की वायरल गर्ल हर्षा रिछारिया और स्वामी हर्षानंद गिरि ने दहेज प्रथा को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दहेज प्रथा पर करारा प्रहार करते हुए इसे बेटियों की मौत की बड़ी वजह बताया. हर्षा ने कहा कि ट्विशा शर्मा, पलक और दीपिका जैसे तीन मामलों ने पूरे समाज को झकझोर दिया है, जिनमें दहेज का लालच प्रमुख वजह बनकर सामने आया है. उन्होंने कहा कि माता-पिता तो ये सोचकर अपनी बेटी को ससुराल भेजते हैं कि उन्होंने पर्याप्त दिया है. लेकिन दहेज के लालच की कोई सीमा नहीं होती. जब यह लालच बढ़ता है, तो अंततः: बेटी की जिंदगी ही खत्म हो जाती है. पीड़िता मौत से पहले हर दिन घुटती है.

दहेज के भूखों के मुंह पर खून लग गया

हर्षा ने कहा कि ट्विशा शर्मा, पलक और दीपिका नागर, इन तीनों मामलों ने देश को झकझोर कर रख दिया है. कारण है दहेज और दहेज के भूखों का. माता-पिता को लगता है कि बेटी को इतना दे रहे हैं, इतना तो इनके लिए काफी होगा. वो कहते हैं ना कि मुंह पर खून लग गया तो अब वह नहीं जाएगा. अब वो मुंह फाड़ते ही जाएंगे. अगर नहीं मिलेगा तो उस दिन आपकी बेटी का अंत निश्चित है. 
तीन बेटियां ऐसी दहेज की बलि चढ़ी हैं.

कोई मर जाता है तो किसी को मार दिया जाता है

हर्षा ने आगे कहा कि सबसे बुरी बात यह है कि मरने वाला तो मर जाता है या उसे मार दिया जाता है. कोई लड़की प्रताड़ित होती है और अपने मां-बाप को और नहीं सताना चाहती तो मर जाती है और किसी को मार कर उसे सुसाइड करार दिया जाता है. जाने वाला तो चला जाता है उसके पीठ पीछे उसकी बदनामी रह जाती है. मरने वाले को पता होता है कि उसने क्या-क्या और किस हद तक सहा है.

घुटने के बाद मौत का एक दिन निश्चित करती हैं बेटियां

एक इंसान मौत को गले लगाने से पहले हर रोज मर रहा होता है. वह रोज घुट रहा होता है. तब जाकर वह अपनी मौत का एक दिन निश्चित करता है. उसके मरने के बाद ये दहेज के भूखे ससुरालवाले उसके चरित्र पर, उसके परिवार पर, उसकी परवरिश पर, उसके संस्कारों पर सिर्फ और सिर्फ घटिया तंज कसते रहते हैं और घटिया बातें बोलते रहते हैं.

दहेज के नाम पर लड़कियां भेंट चढ़ रहीं

हर्षा ने दहेज के भूखों पर तंज कसते हुए कहा कि सदियों से महिलाओं और लड़कियों के लिए न जाने कितने केस सामने आते रहे हैं. फिर लड़की समाज में इसे लेकर कोई डर पैदा नहीं होना चाहिए, क्यों कि दहेज तो सरकार की प्रथा है. लड़की को तो इसकी बलि चढ़ना ही पड़ेगा. लेकिन इस बीच चार-पांच केस लड़कों के क्या आ जाते हैं तो पूरे मर्द समाज में ये भय फैल जाता है कि आजकल की लड़कियां ऐसी हैं हमें तो शादी करने से डर लगता है.

मां-बाप अपनी बेटियां खो रहे

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तुमको किस बात से शादी करने से डर लगता है.तुमको को दहेज के नाम पर सब मिल जाएगा. नहीं मिलेगा तो लड़की लौटा दोगे या उसे मार दोगे. सोचो उन मां-बाप का जो अपनी बेटियां खो रहे हैं. आज समाज चाहे कितना भी आगे निकल गया हो लेकिन दहेज बलि के नाम पर लड़कियां भेंट चढ़ रही हैं.मां-बाप को बेटियों के मरने के बाद उनका चरित्र साबित करना पड़ता है. बेटी को न्याय दिलाने के लिए और उनेक हत्यारों को सजा दिलवाने के लिए उनको एक अलग जंग लड़नी होती है. 

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