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अमेरिका में अदाणी के खिलाफ खत्म होगा केस, DOJ की सिफारिश पर हरीश साल्वे ने बताई वजहें

अमेरिका में भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी सहित 7 अन्य के खिलाफ केस समाप्त हो सकता है. अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी सिफारिश में कहा यह मामला फाइल ही नहीं होनी चाहिए थी. न्याय विभाग की सिफारिशों पर वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अपनी बातें रखी है.

अमेरिका में अदाणी के खिलाफ खत्म होगा केस, DOJ की सिफारिश पर हरीश साल्वे ने बताई वजहें
गौतम अदाणी सहित 7 अन्य पर अमेरिका में दायर केस पर वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अपनी बातें रखी है.
NDTV
  • US न्याय विभाग ने गौतम अदाणी समेत 8 के खिलाफ मामले को कानूनी और राजनयिक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया.
  • DOJ ने एक साल पहले इस मामले को बंद करने या शुरू ही न करने की सिफारिश की है.
  • पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने DOJ की सिफारिश का समर्थन करते हुए ट्रायल की संभावना कम बताई.
नई दिल्ली:

अमेरिका में भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी सहित 7 अन्य के खिलाफ दायर आपराधिक मामले में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने कई खामियां पकड़ी है. अमेरिकी न्याय विभाग ने 10 पन्नों के हलफनामें में इस मामलों को बंद किए जाने की सिफारिश की है. हलफनामे में न्याय विभाग ने लिखा कि इस मामले को एक साल पहले ही हटा दिया जाना चाहिए था या इसे कभी शुरू ही नहीं किया जाना चाहिए था. DOJ ने कहा कि यह मुकदमा न केवल कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बल्कि राजनयिक रूप से प्रतिकूल और ट्रंप प्रशासन की प्रवर्तन प्राथमिकताओं के विपरीत भी है. अमेरिकी न्याय विभाग की इस सिफारिश का पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने समर्थन किया है.  

हरीश साल्वे बोले- इसे ट्रायल तक पहुंचने की संभावना बहुत कम

NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में DOJ की फाइलिंग का हवाला देते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि एजेंसी को निवेशकों का कोई नुकसान नहीं मिला. उन्होंने सिक्योरिटीज से जुड़े आरोपों के आधार पर ही सवाल उठाए और इस आरोप-पत्र को 'नाम खराब करने और शर्मिंदा करने' वाली कार्रवाई बताया. हरीश साल्वे ने कहा कि इस मामले के ट्रायल तक पहुंचने की संभावना बहुत कम है. .

हरीश साल्वे ने कहा, 'मैंने पहले भी यह बात कही थी, फिर दोहरा रहा हूं. अब मेरे पास इसे कहने का एक ठोस आधार भी है. DOJ ने साफ तौर पर कहा है कि प्रतिभूतियों के इस मामले में किसी भी निवेशक का एक भी पैसा कभी नहीं डूबा है'.

DOJ ने खुद कहा- तोड़-मरोड़कर लगाए गए आरोप

वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने आगे कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग का यह कहना बहुत दिलचस्प है कि शुरुआत कहां से करें, प्रतिभूतियों के आरोप कभी लगाए ही नहीं जाने चाहिए थे. वे फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (FCPA) के दावों में फेल रहे. यह अधिनियम इन प्रतिवादियों (defendants) के खिलाफ लागू ही नहीं किया जा सकता था, लेकिन इसे तोड़-मरोड़कर सिक्योरिटीज के आरोपों में बदला गया. साल्वे ने कहा कि ये मेरे शब्द नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी न्याय विभाग के शब्द हैं.

जब DOJ ने खामियां पकड़ ली तो हम क्यों नहीं स्वीकार करेंः साल्वे

क्या जज के लिए इस रिपोर्ट को मानना जरूरी है... इस सवाल पर हरीश साल्वे ने कहा कि जज के सामने अब समस्या यह है कि जब खुद DOJ कह रहा है कि हमने जांच की है, ऐसा कोई सबूत नहीं है जिसके आधार पर हम इस मुकदमे को पूरा कर सकें. धोखाधड़ी का आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है. साल्वे ने आगे कहा कि जब DOJ ने ही सारी खामियां पकड़ ली है तो हमारे लिए इसे स्वीकार न करने का कोई कारण नहीं है.

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