विज्ञापन
This Article is From May 01, 2024

सूरत से निर्विरोध निर्वाचन संबंधी जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई से गुजरात HC का इनकार

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप उस प्रक्रिया की खामी को रेखांकित कर रहे हैं जिसके जरिये उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया है. क्या यह आपकी दलील है? यह दलील चुनाव याचिका के माध्यम से एक प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आती है.’’

सूरत से निर्विरोध निर्वाचन संबंधी जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई से गुजरात HC का इनकार
अहमदाबाद:

गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार मुकेश दलाल को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया. मुख्य न्यायधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी माई ने मंगलवार को याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उन्हें जनहित याचिका के बजाय चुनाव याचिका दाखिल करनी चाहिए.

याचिकाकर्ता भावेश पटेल ने मामले की तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध करते हुए दलील दी कि वह सूरत का पंजीकृत मतदाता है और निर्वाचन आयोग ने बिना मतदान कराए दलाल को विजेता का प्रमाण पत्र देकर उन्हें दलाल के खिलाफ मत देने के विकल्प से वंचित कर दिया है.

मुख्य न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा, ‘‘यदि कोई उम्मीदवार निर्विरोध चुना जाता है, तो वह भी उस विजेता उम्मीदवार के समान होता है, जिसे मतदान और मतों की गिनती की प्रक्रिया के बाद विजयी उम्मीदवार घोषित किया जाता है. वह किसी अन्य अलग श्रेणी में नहीं आता है और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में उसके साथ अलग व्यवहार करने का कोई प्रावधान नहीं है. इसे जनहित याचिका का मुद्दा न बनाएं.''

उन्होंने कहा कि अगर उम्मीदवार के चुनाव को लेकर विवाद है तो व्यक्ति को चुनाव याचिका दाखिल करना चाहिए.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप उस प्रक्रिया की खामी को रेखांकित कर रहे हैं जिसके जरिये उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया है. क्या यह आपकी दलील है? यह दलील चुनाव याचिका के माध्यम से एक प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आती है.''

न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा कि जब यह मामला उनके सामने आएगा तो वह इसे सामान्य तरीके से सुनवाई करेंगे और इसमें कोई आकस्मिक स्थिति नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता ने गलत मंच पर यह मामला उठाया है. मुख्य न्यायधीश ने वकील द्वारा हाथ जोड़कर तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने पर भी उन्हें फटकार लगाई. उन्होंने कहा, ‘‘अधिवक्ताओं को अदालत में हाथ नहीं जोड़ना चाहिए बल्कि उन्हें पक्षकारों के अधिकारों के लिए तर्क रखना चाहिए. अगर आप किसी का मामला सामने रख रहे हैं तो आपको कभी भी हाथ नहीं जोड़ना चाहिए.''

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता नीलेश कुम्भानी का नामांकन पत्र तकनीकी कारणों से खारिज होने और अन्य उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के बाद दलाल को सूरत लोकसभा सीट से विजयी घोषित कर दिया गया था.

ये भी पढ़ें:- 
लंदन में मेयर चुनाव : क्या पाकिस्तानी मूल के सादिक खान को हरा पाएंगे भारतीय मूल के तरुण गुलाटी?

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Gujarat High Court, Surat Lok Sabha Seat, BJP, Mukesh Dalal
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com