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बगैर किसी भेदभाव के हर किसी के कल्याण के लिए काम करे सरकार: पीएम मोदी

संसद की संविधान सभा में हो रहे इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों की 53 संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं.इस सम्मेलन में संसद में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के उपयोग,सोशल मीडिया और सांसदों पर इसके प्रभाव,संसद के बारे में जनता की समझ बढ़ाने के लिये नई रणनीति और मतदान के बाद भी नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा शामिल है . 

बगैर किसी भेदभाव के हर किसी के कल्याण के लिए काम करे सरकार: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने भविष्य के भारत की बात भी की
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नई दिल्ली:

भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाना और सरकार बिना किसी भेदभाव के हर किसी के कल्याण की भावना से काम कर रही है...ये बात  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28 वें सम्मेलन का उद्घाटन करने के दौरान कही. उन्होंने इसके पहले कहा कि स्पीकर को ज्यादा बोलने का मौका नहीं मिलता. उनका काम दूसरों को बोलते हुए सुनना और यह पक्का करना है कि सबको मौका मिले. अध्यक्षों में एक आम बात उनका धैर्य है. वे शोर मचाने वाले और ज्यादा उत्साहित सदस्यों को भी मुस्कान के साथ संभालते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं है, बल्कि लास्ट माइल डिलीवरी है. लोक कल्याण की भावना के साथ हम बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक तक सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं .

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इसी भावना के कारण पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं .भारत में लोकतंत्र इसलिए परिणाम देता है कि यहां जनता सर्वोपरि है. जनता की आकांक्षाओं और सपनों को हमने अपनी प्राथमिकता बनाया है. इसी विश्वास और इस इसी भावना के साथ भारत आगे बढ़ रहा है. पीएम ने उम्मीद जताई कि यहां हम सब एक दूसरे के साथ अपने अनुभवों को साझा कर लोकतांत्रिक प्रकियाओं को सीखने और सिखाने  पर चर्चा करेंगे .  

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संसद की संविधान सभा में हो रहे इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों की 53 संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं.इस सम्मेलन में संसद में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के उपयोग,सोशल मीडिया और सांसदों पर इसके प्रभाव,संसद के बारे में जनता की समझ बढ़ाने के लिये नई रणनीति और मतदान के बाद भी नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा शामिल है . 

इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत की संसद ने जन केन्द्रित नीतियों,कल्याणकारी कानूनों और निष्पक्ष निवार्चन प्रणाली के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत बनाया है.बिरला ने कहा कि एआई और सोशल मीडिया ने लोकतांत्रिक संसथाओं को मजबूत बनाया है लेकिन इनके दुरुपयोग से गलत सूचना और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं . उन्होंने नैतिक एआई और जिम्मेदार सोशल मीडिया को समय की जरूरत बताया . 

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राष्ट्रमंडल देशों के इस सम्मेलन में पाकिस्तान से कोई नुमाइंदा नही आया है.बांग्लादेश से भी कोई प्रतिनिधि नहीं है, क्योंकि वहां फिलहाल संसद अस्तिव में नहीं है. मगर इस बार राष्ट्रमंडल देशों के सम्मेलन में सबसे अधिक देशों की भागीदारी हो रही है .यह सम्मेलन 16 जनवरी तक चलेगा . यह चौथा मौका है जब भारत राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है .वैसे इस सम्मेलन में न तो लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहुंचे और न ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे. इसको लेकर सत्ता पक्ष के सांसदो ने काफी आलोचना की. उनका कहना था कि इससे दूसरे देशों में अच्छा संकेत नही गया. केवल संविधान की कॉपी जेब में रखकर लोकतंत्र की दुहाई देने से काम नही होता है . 

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