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This Article is From Mar 05, 2025

'25 करोड़ जमा करें या जेल जाएं', सुप्रीम कोर्ट ने सोना घोटाला की आरोपी नौहेरा शेख को दिया अल्टीमेटम

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया कि अगर 90 दिन की अवधि समाप्त होने पर एजेंसी के पास 25 करोड़ रुपये जमा नहीं किए जाते हैं तो शेख को हिरासत में ले लिया जाए.

'25 करोड़ जमा करें या जेल जाएं', सुप्रीम कोर्ट ने सोना घोटाला की आरोपी नौहेरा शेख को दिया अल्टीमेटम

सुप्रीम कोर्ट ने सोना घोटाले की आरोपी नौहेरा शेख को दिए दो विकल्प दिए हैं. SC ने कहा कि या तो पैसा दें या फिर जेल जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर 3 महीने में 25 करोड़ रुपये नहीं चुकाए तो जमानत रद्द कर दी जाएगी. कोर्ट ने सोना घोटाले की आरोपी नौहेरा शेख को निवेशकों से इकट्ठा किए गए पैसे का एक हिस्सा तीन महीने के भीतर वापस करने या जेल जाने का अल्टीमेटम दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया कि अगर 90 दिन की अवधि समाप्त होने पर एजेंसी के पास 25 करोड़ रुपये जमा नहीं किए जाते हैं तो शेख को हिरासत में ले लिया जाए. कोर्ट ने नोट किया कि शेख 11 नवंबर, 2024 से अदालत के लगातार आदेशों की अवहेलना कर रही है, जब आत्मसमर्पण के लिए समय बढ़ाया गया था, बशर्ते कि वह 25 करोड़ रुपये का भुगतान करे.

हीरा गोल्ड एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड की प्रबंध निदेशक शेख पर लाखों निवेशकों से 5600 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है और वह कई राज्यों में एफआईआर का सामना कर रही है.

जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम आरोपी को अंतिम अवसर के रूप में प्रस्ताव देते हैं कि वह तीन महीने की अवधि के भीतर 25 करोड़ रुपये जमा कराए. ऐसा न करने पर उसकी जमानत स्वतः रद्द हो जाएगी और उसे ईडी द्वारा वापस जेल भेज दिया जाएगा.

शेख की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि उसके पास पैसे नहीं हैं. लेकिन, ईडी ने बताया कि शेख के स्वामित्व वाली कई संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है और जब शेख के वकील से उन संपत्तियों की सूची मांगी गई जिन्हें नीलाम किया जा सकता है, तो अदालत को उनका खुलासा नहीं किया गया. शेख ने केवल तीन संपत्तियों की सूची साझा की थी, जिनमें से ईडी को तेलंगाना में दो की नीलामी करने की अनुमति दी गई थी.

हीरा गोल्ड और उसके एमडी के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा जांच शुरू की गई थी और जांच अभी भी जारी है. कंपनी के खिलाफ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली में कई मामले लंबित हैं. कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत निगमित यह कंपनी आभूषण और सोने की वस्तुओं का कारोबार करती थी और इसने निवेश की गई राशि पर 36% लाभांश देने का वादा करते हुए योजनाएं शुरू की थीं. शुरुआत में कंपनी ने लाभांश का भुगतान किया, लेकिन 2018 के आसपास, कुछ निवेशकों ने कंपनी और शेख के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई. उसे अक्टूबर 2018 में गिरफ्तार किया गया था.

लेखक के बारे में
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आशीष भार्गव
Senior Editor – Legal News
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