- तेलंगाना के वारंगल जिले के एक खेत में सोना मिलने के बाद उसके मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है
- मजदूरों ने सोने के गहने खेत के मालिक को दे दिए, जबकि जमीन के पिछले मालिक के बेटे ने पुलिस में शिकायत की
- शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन पहले उसके परिवार की थी और उसे सोने का कोई हिस्सा नहीं दिया गया है
तेलंगाना के वारंगल जिले के एक खेत में सोना मिलने की खबर के बाद उस पर मालिकाना हक को लेकर विवाद खड़ा हो गया. 24 जून को एक महिला मजदूर छह एकड़ के खेत में घास हटा रही थी, तभी उसे मिट्टी में धातु के चमकदार टुकड़े दिखाई दिए. खुदाई करने पर उसे सोने के गहने मिले. ग्रामीणों का दावा है कि खेत से मिला सोना करीब 50 तोला था, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इसकी मात्रा या कीमत की पुष्टि नहीं की है.
सोने पर मालिकाना हक को लेकर विवाद
ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों ने गहने उस किसान को दे दिए जो उस जमीन का मालिक था. मामलें में नया मोड़ तब आया जब जमीन के पिछले मालिक के बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उसने कहा कि जमीन बेचने से पहले यह उसके परिवार की थी. मौजूदा मालिक और मजदूरों ने उसे बताए बिना सोना आपस में बांट लिया.
शिकायतकर्ता ने पुलिस से कहा कि सोना उस जमीन पर मिला है जो कभी उसके परिवार की थी. उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. न ही उसे कोई हिस्सा दिया गया. पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. वह ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गहने कैसे मिले और उन पर कानूनन किसका हक है. यह मामला चेन्नाराओपेट मंडल के कोपाकुलापाडु गांव का है.
सोना मिलते ही वारंगल का इतिहास फिर चर्चा में
यह खबर फैसले ही बड़ी संख्या में उत्सुक लोग गांव पहुंच गए. कई लोग खेत की सोने वाली जगह को देखने पहुंचे. इससे वारंगल के समृद्ध इतिहास की कहानियां फिर से चर्चा में आ गई हैं. दरअसल पहले ओरुगल्लू के नाम से जाना जाने वाला वारंगल, काकतीय राजवंश की राजधानी था, जिसने 12वीं और 14वीं शताब्दी के बीच तेलुगु क्षेत्र के बड़े हिस्से पर शासन किया था. काकतीय शासकों ने वारंगल किला, हजार खंभों वाला मंदिर (थाउज़ेंड पिलर टेम्पल) और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर बनवाया था. यह राज्य अपनी अपार संपत्ति, जिसमें सोना, हीरे और कीमती गहने शामिल थे, के लिए जाना जाता था.
अधिकारियों ने अभी तक पुष्टि नहीं की है कि मिले हुआ सोना पुरानी कलाकृतियां हैं या आधुनिक गहने. अगर उनमें ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व पाया जाता है, तो मालिकाना हक पर कोई भी फैसला लेने से पहले पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों उनकी जांच कर सकते हैं.
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