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प्रशांत किशोर के बांकीपुर से चुनाव लड़ने पर कल होगा फैसला, BJP के लिए कितनी होगी चुनौती

जन सुराज का दावा है कि करीब 40 साल से बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का दबदबा है, लेकिन अब लोग नई राजनीति और नया नेतृत्व चाहते हैं.

प्रशांत किशोर के बांकीपुर से चुनाव लड़ने पर कल होगा फैसला, BJP के लिए कितनी होगी चुनौती
जन सुराज नेता प्रशांत किशोर (IANS)
Bihar News:

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित चुनाव बनता जा रहा है. जन सुराज के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर इसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. 4 जुलाई को जन सुराज की अहम बैठक होगी. माना जा रहा है कि इस बैठक में उनके नाम पर अंतिम फैसला होगा. इसके बाद 5 जुलाई को उनके नाम का आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है. बांकीपुर सीट पिछले कई वर्षों से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है. इस सीट से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन विधायक थे. उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई है और अब यहां उपचुनाव होना है. ऐसे में अगर प्रशांत किशोर यहां से चुनाव लड़ते हैं, तो मुकाबला सीधा भाजपा और जन सुराज के बीच माना जाएगा.

बांकीपुर चुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है. भाजपा के लिए इसलिए क्योंकि यह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट रही है. अगर भाजपा यह सीट हारती है तो विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक झटका बताएगा. वहीं अगर भाजपा जीतती है तो वह इसे जनता के भरोसे और अपनी मजबूत पकड़ के रूप में पेश करेगी.

दूसरी ओर, प्रशांत किशोर के लिए भी यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होगा. पिछले कुछ वर्षों से वह बिहार की राजनीति में बदलाव की बात कर रहे हैं. उन्होंने पूरे राज्य में पदयात्रा की, जन सुराज अभियान चलाया और फिर अपनी पार्टी बनाई. लेकिन अब पहली बार उन्हें सीधे जनता के बीच चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करनी होगी.

लोगों की राय पर ही होगा प्रशांत के नाम पर विचार

जन सुराज का कहना है कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है. पार्टी का दावा है कि करीब 40 साल से इस इलाके में भाजपा का दबदबा है, लेकिन अब लोग नई राजनीति और नया नेतृत्व चाहते हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और लोगों की राय के बाद ही प्रशांत किशोर के नाम पर विचार किया गया है.

प्रशांत के चुनाव लड़ने से पूरे बिहार की रहेगी नजर

अगर प्रशांत किशोर इस चुनाव में उतरते हैं, तो यह सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रहेगा. पूरे बिहार की नजर इस चुनाव पर होगी. अगले विधानसभा चुनाव से पहले यह मुकाबला यह भी बताएगा कि जन सुराज को जनता कितना समर्थन दे रही है और क्या प्रशांत किशोर खुद को एक बड़े राजनीतिक नेता के रूप में स्थापित कर पाए हैं.

इस चुनाव का असर दूसरे दलों पर भी पड़ सकता है. राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल भी इस मुकाबले पर नजर रखे हुए हैं. अगर प्रशांत किशोर मैदान में उतरते हैं, तो विपक्ष के वोटों का समीकरण भी बदल सकता है. इसलिए महागठबंधन की रणनीति पर भी इस चुनाव का असर पड़ सकता है.

बीजेपी हल्के में नहीं लेगी चुनाव

भाजपा भी इस चुनाव को हल्के में नहीं लेगी. क्योंकि यह सीट उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष से जुड़ी रही है. ऐसे में पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी. भाजपा के लिए यह अपनी साख बचाने का चुनाव होगा, जबकि जन सुराज के लिए यह अपनी पहचान बनाने का मौका होगा.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में कड़ी टक्कर देते हैं या जीत हासिल करते हैं, तो बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका काफी मजबूत हो जाएगी. वहीं अगर उन्हें हार मिलती है, तो विपक्ष उनके राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाएगा.

यानी बांकीपुर का यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं होगा. यह भाजपा की साख, प्रशांत किशोर की राजनीतिक विश्वसनीयता और जन सुराज के भविष्य की पहली बड़ी परीक्षा होगी. अब सबकी नजर 4 जुलाई को होने वाली जन सुराज की बैठक और 5 जुलाई की घोषणा पर है. अगर प्रशांत किशोर के नाम का ऐलान होता है, तो बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा मुकाबला बन जाएगा.

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