- गीतांजलि का जन्म ओडिशा के बालासोर में हुआ था
- 15 साल डेनमार्क में कॉर्पोरेट की जॉब की
- लद्दाख में गीतांजलि की सोनम वांगचुक से मुलाकात में हुई थी
नई दिल्ली: सोनम वांगचुक (59) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षा सुधारक, पर्यावरण कार्यकर्ता और रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता सोनम वांगचुक का जन्म लद्दाख के अलची के पास उलेतोकपो गांव में हुआ था. वह जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री सोनम वांग्याल के पुत्र हैं. वांगचुक इस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन के लिए चर्चा में हैं. वांगचुक के साथ अब उनकी पत्नी गीतांजली आंग्मो की भी चर्चा हो रही है, जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं.
गीतांजलि आंग्मो हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (HIAL) की को-फाउंडर और सीईओ हैं. ओडिशा के बालासोर में जन्मी गीतांजलि ने एमबीई की पढ़ाई के बाद करीब 15 साल डेनमार्क में कॉर्पोरेट की जॉब की. कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में से एक लद्दाख में शिक्षा, समाज सुधार और इनोवेशन के फील्ड में काम करना शुरू किया. लद्दाख में ही गीतांजलि की सोनम वांगचुक से मुलाकात में हुई थी. उन्होंने HIAL की स्थापना साल 2017 में सोनम वांगचुक के साथ मिलकर की थी.
कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं गीतांजलि
- गीतांजलि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की चेवनिंग स्कॉलर भी रह चुकी हैं.
- गीतांजलि को 'वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया जा चुका है.
- गीतांजलि कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं. ओडिसी और रूसी बैले डांस में भी ड्रेंड हैं.
20 दिन में 9.5 किलोग्राम कम हो गया वांगचुक का वजन
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जारी आंदोलन में शामिल होकर वांगचुक ने 28 जून को प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी. आंदोलन में उनकी भूमिका के लिए कुछ लोगों ने उन्हें ‘'नायक'' बताया, लेकिन वांगचुक ने लोगों से स्वयं अपना नायक बनने की अपील की. भूख हड़ताल के 20 दिन बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो गया है. बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता के बीच दिल्ली पुलिस उन्हें शनिवार को जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई.

गीतांजलि ने कहा- अभी भी भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक
गीतांजलि ने NDTV ने कहा, "वह (वांगचुक) अभी भी भूख हड़ताल पर हैं, कोई तरल पदार्थ नहीं ले रहे हैं- सिर्फ पानी और नमक. सफदरजंग अस्पताल का कहना है कि उनके पोटेशियम का स्तर बहुत कम हो गया है; ऐसा नहीं हो सकता. हम किसी तीसरे पक्ष से जांच करवाएंगे." गीतांजलि ने कहा कि वे अस्पताल से छुट्टी की औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे वांगचुक को या तो घर ले जा सकें या किसी ऐसे अस्पताल में ले जा सकें जिस पर उन्हें भरोसा हो.
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