- गैंगस्टर मैनपाल 17 जुलाई 2018 को 6 हफ्ते की पैरोल पर आया और वापस जेल वापस नहीं गया.
- सोनू कुमार के नाम से फर्जी पासपोर्ट T3218793 बनवाया, 7 जुलाई 2019 को बैंकॉक गया.
- जुलाई 2025 में वीजा रिन्यू के दौरान पकड़ा गया, सितंबर 2025 में डिपोर्ट कर भारत लाया गया.
हरियाणा के झज्जर जिले के बादली गांव का रहने वाला मैनपाल उर्फ मैनपाल बादली पुलिस रिकॉर्ड में एक कुख्यात अपराधी के तौर पर दर्ज है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मैनपाल के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, डकैती, आपराधिक धमकी और पुलिसकर्मियों को उनकी ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला करने जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं. उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 24 अलग-अलग आपराधिक मामलों का जिक्र है. वहीं, एक अन्य पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 22 मामलों और तीन मामलों में दोषसिद्धि की बात कही गई है. मैनपाल को हत्या के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और वह हिसार सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा था. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

पैरोल मिली और फरार...
मैनपाल को 17 जुलाई 2018 को हिसार सेंट्रल जेल से छह सप्ताह की पैरोल मिली थी. यह पैरोल हिसार डिवीजन के कमिश्नर और झज्जर के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर दी गई थी. उसे 29 अगस्त 2018 तक वापस हिसार जेल पहुंचकर अपनी बाकी उम्रकैद की सजा काटनी थी. लेकिन मैनपाल जेल वापस नहीं पहुंचा. इसके बाद उसके खिलाफ FIR नंबर 639, 10 सितंबर 2018 दर्ज की गई. यह केस 'हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजन एक्ट' की धारा 8/9 के तहत थाना सदर बहादुरगढ़ में दर्ज हुआ.
यह मामला झज्जर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में विचाराधीन है और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मैनपाल के फरार रहने के कारण ट्रायल प्रभावित रहा.
मैनपाल पर 5 लाख रुपये का था इनाम
जेल से फरार होने के बाद मैनपाल की तलाश तेज की गई. हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने वाले के लिए 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया. लेकिन पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मेंनपाल देश से बाहर निकलने में कामयाब हो गया. जांच में सामने आया कि मैनपाल ने भारत से बाहर निकलने के लिए अपनी असली पहचान छिपाई.
पुलिस और खुफिया जानकारी के मुताबिक, उसने सोनू कुमार पिता रणवीर सिंह, निवासी गुरुग्राम के नाम से फर्जी पहचान तैयार कर पासपोर्ट हासिल किया. पासपोर्ट नंबर T3218793 बताया गया है. जांच में यह भी सामने आया कि पासपोर्ट बनवाने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों में गुरुग्राम का जो पता दिया गया था, वह भी फर्जी था. इस मामले में गुरुग्राम के थाना सेक्टर 17/18 में FIR दर्ज की गई. इसमें धारा 420, 467, 468, 471, 120B IPC और पासपोर्ट एक्ट की धारा 12(1) लगाई गई.
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कोलकाता से बैंकॉक... फिर कंबोडिया
फर्जी पासपोर्ट तैयार होने के बाद मेनपाल भारत से बाहर निकल गया. 7 जुलाई 2019 को वह कोलकाता एयरपोर्ट से थाईलैंड के बैंकॉक के लिए रवाना हुआ. उसने Thai Airways की फ्लाइट TG-314 से यात्रा की. मैनपाल के मुताबिक वह करीब 20 से 22 दिन थाईलैंड में रहा. इसके बाद वह थाईलैंड से कंबोडिया पहुंच गया.
मैनपाल की कंबोडिया वाली जिंदगी...
कंबोडिया में रहने के दौरान मैनपाल ने पूछताछ में अपनी कहानी बताई. उसके कथित कबूलनामे में कहा, "मैं कोलकाता एयरपोर्ट से फ्लाइट से थाईलैंड गया. मैं करीब 20-22 दिन थाईलैंड रहा. उसके बाद मैं कंबोडिया गया और वहां पर रहने लगा. थाईलैंड से कंबोडिया आने के बाद मेरी मुलाकात चेन मेटा से हुई और हम दोनों साथ रहने लगे."
मैनपाल के मुताबिक, इसके बाद वह Siem Reap शहर में किराये के होटल में रहने लगा. करीब एक महीने बाद उसने और चेन मेटा ने मिलकर 10 हजार डॉलर जमा करके अपना मकान खरीदा. इसके बाद दोनों अपने मकान में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे.

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कंबोडिया पहुंचने के बाद उसने वहां कारोबार भी शुरू कर दिया. उसने अपना एक डिस्को कॉनतिआई और एक रेस्टोरेंट अंकुर खोला. यानी भारत में पुलिस से फरार चल रहा मैनपाल कंबोडिया में एक कारोबारी बन गया.
एक तरफ भारत में उसके खिलाफ गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित था, वहीं दूसरी तरफ कंबोडिया में उसने घर बनाया, कारोबार शुरू किया और परिवार भी बसाया.
कंबोडिया में मैनपाल का परिवार
मैनपाल के कथित बयान के मुताबिक कंबोडिया में रहने के दौरान उसके और चेन मेटा से तीन बच्चे हुए. उसके बच्चों के नाम बाहुबली (5), भगत कुमार (4) और आस्था (1) हैं. मैनपाल के मुताबिक, कंबोडिया में उसका परिवार बढ़ता गया और वह अपनी जिंदगी आगे बढ़ाता रहा. लेकिन करीब छह साल तक फरार रहने के बाद उसकी कहानी में बड़ा मोड़ आया. जुलाई 2025 में वह अपना वीजा रिन्यू कराने के लिए गया था. यहीं पर उसकी असली पहचान सामने आ गई और उसे पकड़ लिया गया. यानी जिस पहचान के सहारे वह सालों से कंबोडिया में रह रहा था, आखिरकार उसी दौरान वह कानून की गिरफ्त में आ गया.

मैनपाल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस
मैनपाल के खिलाफ भारत सरकार की तरफ से लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया. इसका मकसद था कि विदेश में मौजूद मेनपाल की पहचान की जा सके और उसे भारत वापस लाने की कार्रवाई की जा सके. इसके बाद वो सितम्बर 2025 में डिपोर्ट करवाकर भारत लाया गया. झज्जर जेल में बंद है. उसे तीन मामलों में सजा भी हो चुकी है.
जुर्म, उम्रकैद, पैरोल उल्लंघन, फर्जी पासपोर्ट और विदेश में करीब छह साल की फरारी के बाद मैनपाल की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया. शादी के लिए उसे जेल से सुबह 8 बजे से 12 घंटे की कस्टडी पैरोल दी गई. झज्जर के दुलीना स्थित एक फार्म हाउस में कड़ी सुरक्षा के बीच मैनपाल की शादी हुई. मैनपाल ने कंबोडिया की रहने वाली मेटाचान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए.

मैनपाल को हिसार सेंट्रल जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच झज्जर के फार्म हाउस तक लाया गया. शादी के दौरान फार्म हाउस के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा. हर आने-जाने वाले शख्स पर नजर रखी गई. मैनपाल की शादी में करीब 500 मेहमानों के शामिल होने की बात सामने आई. मैनपाल की मां रोशनी के लिए यह दिन बेहद भावुक था. करीब आठ साल बाद उन्होंने अपने बेटे मैनपाल को आमने-सामने देखा.
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