केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण के नियमों में बदलाव के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और हाल ही में इस संबंध में बैठक भी हुई है. शेखावत को उम्मीद है कि जल्द ही ऐसा समाधान निकलेगा जिससे पात्र लोगों को ज्यादा न्याय मिल सके. इस बार सरकार EWS में कृषि की इनकम को लेकर सुधार करने पर विचार कर रही है. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इसका कोई रास्ता निकलेगा.
क्या हैं मौजूदा EWS नियम?
मौजूदा नियमों के मुताबिक EWS आरक्षण का लाभ लेने के लिए यह जरूरी है कि परिवार की सालाना इनकम 8 लाख रुपये से अधिक न हो. इसमें फिलहाल कृषि, बिजनेस, सैलरी और प्रोफेशनल इनकम समेत सभी माध्यमों से होने वाली कमाई को शामिल किया जाता है. सवर्ण समाज के कुछ संगठन इस मामले में लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि EWS रिजर्वेशन में खेती वाली इनकम और 5 एकड़ खेती से अधिक न होने वाले प्रावधान को हटाया जाए. उनका तर्ज रहा है कि खेती की 5 एकड़ सीमा गैरवाजिब है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार रकबा बड़ा होने के बाद भी पैदावार कम होती है और ऐसे में 5 एकड़ भूमि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता. EWS आरक्षण की पात्रता हेतु एक परिवार की सभी प्रकार की आय को जोड़ा जाता है और इसकी लिमिट 8 लाख तय है. अब यदि खेती से होने वाली इनकम और 5 एकड़ का रकबा वाली शर्त हट जाएगी तो फिर यह EWS में बड़ी राहत का संकेत होगा.
खेती पर निर्भर परिवारों को हो रही परेशानी
जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान शेखावत ने कहा कि मौजूदा नियमों के कारण कई ऐसे परिवार EWS के लाभ से वंचित रह जाते हैं जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है. ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक परिवारों के पास जमीन तो है लेकिन उनकी वास्तविक आय सीमित होती है. ऐसे मामलों में मौजूदा पात्रता शर्तें उनके साथ न्याय नहीं कर पातीं.
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने से रुका था फैसला
उन्होंने बताया कि इस विषय को पहले भी सरकार के स्तर पर उठाया गया था लेकिन यूथ फॉर इक्वलिटी की विशेष अनुमति याचिका (SLP) सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण कोई निर्णय नहीं लिया जा सका. अब मामले का निपटारा हो चुका है और सरकार विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है. हालांकि कुछ राज्य मौजूदा नियमों में बदलाव के पक्ष में नहीं हैं इसलिए केंद्र को पूरे देश के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करना होगा.
राजस्थानी भाषा पर भी जल्द निर्णय की उम्मीद
शेखावत ने राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने के मुद्दे पर भी उम्मीद जताई. उन्होंने कहा कि यह केवल भाषा का नहीं बल्कि राजस्थान की पहचान और सम्मान का विषय है. उन्होंने बताया कि विभिन्न भाषाओं को मान्यता देने से जुड़े 32 से अधिक प्रस्ताव लंबित हैं और गृह मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है.
भाजपा को पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
आगामी पंचायती राज चुनावों पर शेखावत ने विश्वास जताया कि भाजपा अच्छा प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता पूरे पांच साल संगठन और समाज के बीच सक्रिय रहते हैं. नगर निकाय चुनावों में सफलता के बाद अब भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपने जनाधार को और मजबूत करने की तैयारी में है. उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार पार्टी का प्रदर्शन और बेहतर रह सकता है.
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