
गुजरात में दूसरे चरण और आखिरी दौर का मतदान सोमवार को होना है. सत्ताधारी पार्टी बीजेपी समेत आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस आखिरी दौर में मतदाताओं तक पहुंचने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. हालांकि, राजनीति के जानकार इस चुनाव को बीजेपी बनाम आम आदमी पार्टी का चुनाव बता रहे हैं. लेकिन कांग्रेस भी खुदको मैदान में प्रमुख दावेदार मान रही है. एक तरफ जहां बीजेपी एक बार फिर सत्ता में आने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी गुजरात में अपने लिए नई जमीन तलाश रही है.
गुजरात चुनाव तमाम पार्टियों के लिए कितना अहम है इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि इस चुनाव में एक तरफ अपने उम्मीदवार के लिए पीएम मोदी ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं तो दूसरी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी प्रचार अभियान में कोई कोर कसर नहीं रहने देना चाह रहे हैं.
हालांकि, अगर बीते कुछ दिनों में राज्य के वोटरों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की बात करें तो इसमें बीजेपी अन्य पार्टियों की तुलना में काफी आगे दिखती है. चाहे बात चौबिसों घंटे प्रचार अभियान चलाने के लिए ऑनलाइन और ऑफ लाइन माध्यम के इस्तेमाल की हो या फिर जनसभाएं और बड़ी रैलियां कराने की. इन सब में बीजेपी अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे दिखती है. मोदी फैक्टर के अलावा भी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बूथ मैनेजमेंट से लेकर ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने की नीति बेहद खास है.
BJP कार्यकर्ता रमेश भाई एक ऐसे ही उदाहरण हैं. रमेश भाई अहमदाबाद के दानिलिमदा सीट के उन 300 कार्यकर्ताओं में से एक हैं, जो वोटरों को पार्टी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. हाथ में बीजेपी का रिस्ट बैंड लिए वो युवाओं को भी समझाते दिखते हैं तो बुजुर्गों से भी बात करते दिख जाते हैं. दानिलिमदा शुरू से मुस्लिम बहुल इलाका रहा है, और यहां कांग्रेस की पकड़ अच्छी है. लेकिन बावजूद इसके बीजेपी के कार्यकर्ता यहां के युवाओं और अन्य मतदाताओं को समझाते दिखते हैं.
रमेश भाई जो एक पन्ना प्रमुख भी हैं, का कहना है कि मेरे अंदर छह कार्यकर्ता हैं. अकेले दानिलिमदा में हमारे 14 हजार कार्यकर्ता हैं जो डोर-टू -डोर कैंपेन चलाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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