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'केरल का नाम बदलने से लेकर अहम मुद्दों पर चर्चा तक', सेवा तीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक की पूरी इनसाइड स्टोरी

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि हमें सेवा का संकल्प लेना है. यहां से यह संदेश जाए कि सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं.पीएम ने मंत्रियों से यह भी कि कहा कि रिफॉर्म को लेकर वे अपने सुझाव दें. इसके बाद सेवा संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया. सभी कैबिनेट मंत्रियों ने इसका समर्थन किया.

'केरल का नाम बदलने से लेकर अहम मुद्दों पर चर्चा तक', सेवा तीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक की पूरी इनसाइड स्टोरी
सेवा तीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक
NDTV
  • सेवा तीर्थ परिसर में पहली बार मोदी कैबिनेट की बैठक आयोजित हुई, जहां मंत्रियों ने सेवा का संकल्प लिया
  • कैबिनेट बैठक में केरल का नाम बदलकर केरलम करने सहित आठ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए
  • नया सेवा तीर्थ भवन चार सितारा GRIHA मानकों के अनुरूप सौर ऊर्जा और जल संरक्षण जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं से लैस है
नई दिल्ली:

दिन 24 फ़रवरी

समय सुबह पौने ग्यारह

स्थान सेवा तीर्थ 

अवसर- मोदी कैबिनेट की सेवा तीर्थ में पहली बैठक

नए प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय मंत्रियों के जुटने का सिलसिला शुरू हो चुका है. मंत्रियों में भी पहली कैबिनेट बैठक को लेकर ख़ासा उत्साह देखने को मिल रहा है. मंत्री गोल्फ कार्ट से कैबिनेट बैठक रूम तक पहुंच रहे हैं. नए प्रधानमंत्री कार्यालय में कैबिनेट बैठक हॉल ग्राउंड फ़्लोर पर ही बनाया गया है.ग्यारह बजने से पहले सभी मंत्री अपनी जगह ले लेते हैं. यह नया हॉल साउथ ब्लॉक के कैबिनेट रूम की तुलना में काफ़ी बड़ा है. अगली पंक्ति में  ही सभी मंत्रियों के बैठने की जगह है. प्रधानमंत्री के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भी नियत जगह है. 

ग्यारह बजते ही प्रधानमंत्री कैबिनेट कक्ष में प्रवेश करते हैं. चेहरे पर मुस्कान और चाल में तेज़ी. उनके आते ही सभी मंत्री उनका अभिवादन करते हैं. नई इमारत में पहली बार मिल रहे हैं. पीएम के बैठते ही सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अपना स्थान ले लेते हैं.प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है. सेवा तीर्थ में पहली बार कैबिनेट की बैठक हो रही है.

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि हमें सेवा का संकल्प लेना है. यहां से यह संदेश जाए कि सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं.पीएम ने मंत्रियों से यह भी कि कहा कि रिफॉर्म को लेकर वे अपने सुझाव दें. इसके बाद सेवा संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया. सभी कैबिनेट मंत्रियों ने इसका समर्थन किया. इसमें कहा गया है कि “इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित होगा. यह स्थान सत्ता के प्रदर्शन का नहीं, वरन् प्रत्येक भारतवासी के सशक्तिकरण का केंद्र बनेगा.यहां से चलने वाली प्रत्येक फाइल, और यहां कार्य करने वाला प्रत्येक कर्मयोगी, इस भाव से प्रेरित होगा कि उसका कार्य देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने से जुड़ा है.

इसमें सेवा तीर्थ को 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प भी लिया गया.मंगलवार को हुई पहली कैबिनेट बैठक क़रीब एक घंटे तक चली. इसमें आठ बड़े फ़ैसले हुए जिनमें केरल का नाम बदल कर केरलम करना भी है. सूत्रों के अनुसार कैबिनेट में काफ़ी देर तक अनौपचारिक चर्चा भी हुई. पिछले कुछ समय से मंत्रियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने मंत्रालय से जुड़ी कोई गुड न्यूज़ कैबिनेट में साझा करें. यह गुड न्यूज़ मंत्रालयों के कामकाज से जुड़ी हो सकती है जो आम लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला रही हो. गुड न्यूज़ में व्यक्तिगत समाचार भी हो सकता है. 

कैबिनेट की बैठक के बाद कुछ मंत्रियों ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय का दौरा भी किया. इस भवन के अलग अलग पहलुओं के बारे में जानने की उनमें उत्सुकता दिखी. साउथ ब्लॉक की तुलना में यहाँ अधिकारियों के रूम भी काफ़ी बड़े हैं.महत्वपूर्ण बात यह है कि सेवा तीर्थ में मंत्रिमंडल की बैठक के हॉल के साथ ही मंत्रिपरिषद की बैठक के लिए भी अलग बड़ा हॉल बनाया गया है.

अभी तक मंत्रिपरिषद की बैठकें अलग-अलग जगहों जैसे सुषमा स्वराज भवन, भारत मंडपम आदि में होती आई हैं. बताया गया है कि आगे से मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल की अधिकांश बैठकें सेवा तीर्थ में ही होंगी. इससे मंत्रियों को आने-जाने में आसानी रहेगी.  'सेवा तीर्थ' का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसने अलग-अलग जगहों पर बिखरे हुए महत्वपूर्ण विभागों को एक छत के नीचे ला खड़ा किया है. अब इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तीनों एक ही जगह आ गए हैं. 

गौरतलब है कि नया सेवा तीर्थ परिसर 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप बनाया गया है. इसमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था की गई है.नया कार्यालय पूरी तरह से डिजिटल रूप से एकीकृत हैं. यह ‘पेपरलेस' और कुशल कामकाज को बढ़ावा देते हैं. इसी परिसर में अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों के लिए 'इंडिया हाउस' नामक एक उच्च-तकनीकी क्षेत्र भी बनाया जा रहा है.

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