भारत की विदेश नीति को आक्रामक, स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरी दिशा देने वाले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का आज जन्मदिन है. 9 जनवरी 1955 को जन्मे जयशंकर उन चुनिंदा नेताओं में हैं, जिन्होंने नौकरशाही से निकलकर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए भारत की विदेश नीति को मज़बूत करने में उनकी भूमिका की खुलकर सराहना की. प्रधानमंत्री ने लिखा कि एक विशिष्ट राजनयिक के रूप में देश की सेवा करने के बाद जयशंकर अब वैश्विक मंच पर भारत के हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं.
Best wishes to Dr. S. Jaishankar Ji on his birthday. He has served the nation as a distinguished diplomat and is now playing a key role in strengthening India's foreign policy and ties with the world. Praying for his long and healthy life.@DrSJaishankar
— Narendra Modi (@narendramodi) January 9, 2026
राजनयिक परिवार में जन्म
एस. जयशंकर का जन्म एक प्रतिष्ठित सिविल सर्विस परिवार में हुआ. उनके पिता के. सुब्रमण्यम भारत के जाने-माने रणनीतिक विशेषज्ञ और सिविल सेवक रहे. जयशंकर ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बाद में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उन्हें वैश्विक राजनीति और कूटनीति की गहरी समझ दी.
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चार दशक का राजनयिक अनुभव
1977 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल होने वाले जयशंकर का राजनयिक करियर करीब चार दशकों तक फैला रहा. वे अमेरिका, चीन, सिंगापुर और चेक गणराज्य जैसे अहम देशों में भारत के राजदूत रहे. खास तौर पर चीन और अमेरिका जैसे संवेदनशील देशों में उनकी तैनाती को भारत की विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
2015 में वे भारत के विदेश सचिव बने और 2018 तक इस पद पर रहे. इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों, चीन नीति और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा मिली.
राजनीति में प्रवेश और विदेश मंत्री का दायित्व
2019 में जयशंकर ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और उसी वर्ष उन्हें मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया. राज्यसभा सांसद के तौर पर उन्होंने संसद और वैश्विक मंच- दोनों जगह भारत का पक्ष मुखरता से रखा. विदेश मंत्री के रूप में जयशंकर की पहचान सीधे, स्पष्ट और तथ्यों पर आधारित कूटनीति की रही है. चाहे यूक्रेन संकट हो, चीन के साथ सीमा विवाद या पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते. हर मंच पर उन्होंने भारत के राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी.
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वैश्विक मंच पर भारत की मज़बूत आवाज
जयशंकर को ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो बिना किसी झिझक के भारत का पक्ष रखते हैं. उनके बयानों में आत्मविश्वास के साथ-साथ रणनीतिक संतुलन भी दिखता है. डिप्लोमेट से नेता तक का उनका सफर यह बताता है कि अनुभव, शिक्षा और स्पष्ट सोच कैसे किसी देश की विदेश नीति को दिशा दे सकती है.
जन्मदिन के मौके पर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में उन्हें एक ऐसे विदेश मंत्री के रूप में याद किया जा रहा है, जिसने बदलते वैश्विक हालात में भारत की आवाज़ को और बुलंद किया है.
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