
मुंबई:
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस पर सरकारी भर्तियों में नागपुर को तवज्जो देने को आरोप लगाया है। यह आरोप एक आरटीआई एप्लीकेशन से मिले उत्तर के बाद लगाया गया है।
इस बारे में प्राप्त जानकारी के मुताबिक रिक्त सरकारी पदों के मामले में नागपुर का स्थान काफी नीचे है। अमरावती, कोंकण, पुणे और नासिक रिक्त सरकारी पदों के मामले में नागपुर से काफी आगे हैं। मुख्यमंत्री पर आरोप है कि नागपुर के रिक्त सरकारी पदों को सीधी भर्ती और प्रमोशन के जरिए भरा जा रहा है।
सन 2014 के अंत तक राज्य भर में 1,30,251 रिक्त पद थे। इनमें से कोकण विभाग में सबसे ज्यादा 32,703 रिक्त पद थे। दूसरा नंबर पुणे का था जहाँ 27,040 पद खाली पड़े थे। अमरावती में 18,400, नासिक में 18,300 और औरंगाबाद में 18,256 पद खाली थे। नागपुर का आखिरी नंबर था जहां 15,552 पद खाली थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय का जवाब है कि विदर्भ में पिछले कई साल से कई पद खाली थे। इसका रिव्यू मुख्यमंत्री ने पद पर आने के बाद किया। इसके बाद यह खाली पद भरने का फैसला हुआ। पद खाली रहने से असंतुलन बना हुआ है और इसे जल्द खत्म करने के लिए वहां के सरकारी पद भरे जाएंगे। इसी के साथ कैबिनेट ने अब यह फैसला लिया है कि, आने वाले दिनों में जो भी नियुक्तियां होंगी, सभी को सबसे पहले विदर्भ में सेवा करनी होगी, ताकि, ग्रामीण क्षेत्रो में काम का अनुभव मिले।
इस बारे में प्राप्त जानकारी के मुताबिक रिक्त सरकारी पदों के मामले में नागपुर का स्थान काफी नीचे है। अमरावती, कोंकण, पुणे और नासिक रिक्त सरकारी पदों के मामले में नागपुर से काफी आगे हैं। मुख्यमंत्री पर आरोप है कि नागपुर के रिक्त सरकारी पदों को सीधी भर्ती और प्रमोशन के जरिए भरा जा रहा है।
सन 2014 के अंत तक राज्य भर में 1,30,251 रिक्त पद थे। इनमें से कोकण विभाग में सबसे ज्यादा 32,703 रिक्त पद थे। दूसरा नंबर पुणे का था जहाँ 27,040 पद खाली पड़े थे। अमरावती में 18,400, नासिक में 18,300 और औरंगाबाद में 18,256 पद खाली थे। नागपुर का आखिरी नंबर था जहां 15,552 पद खाली थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय का जवाब है कि विदर्भ में पिछले कई साल से कई पद खाली थे। इसका रिव्यू मुख्यमंत्री ने पद पर आने के बाद किया। इसके बाद यह खाली पद भरने का फैसला हुआ। पद खाली रहने से असंतुलन बना हुआ है और इसे जल्द खत्म करने के लिए वहां के सरकारी पद भरे जाएंगे। इसी के साथ कैबिनेट ने अब यह फैसला लिया है कि, आने वाले दिनों में जो भी नियुक्तियां होंगी, सभी को सबसे पहले विदर्भ में सेवा करनी होगी, ताकि, ग्रामीण क्षेत्रो में काम का अनुभव मिले।
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