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Explainer: इसरो के सैटेलाइट इमेज दो-तिहाई भारत पर मानसून के बादल दिखा रहे, लेकिन बारिश के क्या हैं आसार?

इसरो की सैटेलाइट इमेज में पूरे देश के दो-तिहाई हिस्से पर बादल छाए हैं. सैटेलाइट बादलों को कैसे देखते हैं? बारिश कहां हो रही है? बारिश कहां होने के आसार है?

Explainer: इसरो के सैटेलाइट इमेज दो-तिहाई भारत पर मानसून के बादल दिखा रहे, लेकिन बारिश के क्या हैं आसार?
देश के दो तिहाई हिस्से पर बादल छाए
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  • हाल के आंकड़ों के मुताबिक देश में मानसून के दौरान कुल बारिश सामान्य से करीब 24% कम दर्ज की गई है.
  • जुलाई के दूसरे हफ्ते में मानसून की रफ्तार कुछ दिनों के लिए धीमी पड़ गई थी, पर अब एक बार फिर यह सक्रिय हो गई है
  • IMD के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर भारत समेत कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.

इसरो की ताजा सैटेलाइट इमेज में पूरे भारत के करीब दो तिहाई हिस्से पर बादल छाए दिख रहे हैं. सबसे ज्यादा घने बादल जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के ऊपर दिखाई दे रहे हैं. वहीं अरब सागर से आने वाली नमी के कारण दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी बादलों की लंबी पट्टियां बनी हुई हैं. हालांकि पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आसमान अपेक्षाकृत साफ दिखाई दे रहा है.

सैटेलाइट बादलों को कैसे देखते हैं?

इसरो का INSAT-3DR मौसम उपग्रह पृथ्वी से करीब 36000 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष के जियोसिंक्रोनस ऑरबिट में मौजूद है. पृथ्वी जिस तरह 24 घंटे में सूर्य की परिक्रमा करती है, ठीक उसी स्पीड में यह सैटेलाइट पृथ्वी के ऊपर घूमता है.

यानी यह लगातार भारत के ऊपर ही मौजूद रहता है और हर 30 मिनट में भारत की नई तस्वीरें भेजता है, जिनका उपयोग मौसम विज्ञान विभाग पूर्वानुमान लगाने के लिए करता है.

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Photo Credit: IMD

बादलों को देखने का इसका तरीका दो तरह का होता है. दिन के समय यह विजिबल कैमरे से तस्वीरें लेता है जैसा कि सामान्य कैमरे से लिया जाता है. वहीं रात के वक्त यह इनफ्रारेड कैमरे का इस्तेमाल करता है. यह बादलों के ऊपरी हिस्से का तापमान भी मापता है.

बादल के ऊपर तापमान के मायने

बादलों के ऊपरी हिस्से के तापमान को वैज्ञानिक क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेंप्रेचर कहते हैं. 

सैटेलाइट के खास कैमरे और सेंसर, जिन्हें रेडियोमीटर कहा जाता है, अलग-अलग प्रकार की रोशनी या तरंगों को पकड़कर बादलों, नमी और तापमान की सटीक तस्वीरें और डेटा पृथ्वी पर स्थित केंद्रों को भेजते हैं.

बादलों के ऊपरी हिस्से में ठंड जितनी अधिक होगी उनके बरसने की संभावना उतनी ही अधिक होगी. -40°C से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज-चमक का संकेत देते हैं. वहीं -70°C या उससे कम तापमान वाले बादल बहुत शक्तिशाली तूफानों की ओर इशारा करते हैं.

इसरों के सैटेलाइट की ये नई तस्वीरें जम्मू-कश्मीर के ऊपर कुछ बादलों का तापमान -80°C से भी कम दर्ज किया गया. वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पूर्वोत्तर भारत, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के ऊपर भी बहुत ठंडे और ऊंचे बादल दिखाई दिए.

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Photo Credit: ANI

क्या पूरे देश में बारिश हो रही है?

आसमान में बादल छाए होने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह भारी बारिश हो रही है. कई बादल केवल हल्की फुहार या बिल्कुल भी बारिश नहीं करते. तेज बारिश केवल उन इलाकों में होती है जहां बहुत ऊंचे और घने गरज वाले बादल बनते हैं. ऐसे बादल पूरे देश के केवल छोटे हिस्से में ही मौजूद होते हैं.

अगले कुछ दिनों में बारिश की क्या उम्मीद करें?

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में मानसून फिलहाल सक्रिय है. ऐसे में आने वाले दिनों में उत्तर भारत, गंगा के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर राज्यों में कई जगह मध्यम से भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं देखने को मिल सकती हैं. लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

इस समय बारिश की कमी कितनी है?

हाल के आंकड़ों के मुताबिक देश में मानसून के दौरान कुल बारिश सामान्य से करीब 24% कम दर्ज की गई है. हालांकि यह आंकड़ा पूरे देश का औसत है. कई राज्यों में स्थिति इससे बेहतर है, जबकि कुछ राज्यों में बारिश की कमी काफी ज्यादा बनी हुई है. 

अगर बादल पूरे देश में हैं तो हर जगह बारिश क्यों नहीं होती?

यह सबसे आम सवाल है. आसमान में बादल दिखने का मतलब यह नहीं कि हर जगह तेज बारिश होगी. कई बादल केवल नमी लेकर चलते हैं या हल्की फुहार देते हैं. भारी बारिश तभी होती है जब ऊंचे और घने गरज वाले बादल बनते हैं. इसलिए एक जिले में मूसलाधार बारिश हो सकती है, जबकि पास के जिले में धूप निकल सकती है.

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क्या मानसून कमजोर पड़ गया था?

जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून की रफ्तार कुछ दिनों के लिए धीमी पड़ गई थी. इसी वजह से कई राज्यों में बारिश में कमी आई. अब मौसम विभाग का कहना है कि मानसून दोबारा सक्रिय हो रहा है और इससे कई इलाकों में राहत मिलने की उम्मीद 

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Photo Credit: PTI

किसानों के लिए इसके क्या मायने?

जहां अच्छी बारिश हो रही है, वहां खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा. लेकिन जिन राज्यों में अब भी बारिश कम है, वहां बुवाई और फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो स्थिति में सुधार आने की संभावना है. 

देश में मानसून पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है, लेकिन बारिश असमान रही है. कुछ राज्यों में बाढ़ जैसे हालात हैं तो कई इलाकों में अब भी बारिश का घाटा बना हुआ है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और सक्रिय होगा, जिससे उत्तर, पूर्व और पश्चिमी तटीय राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है. हालांकि पूरे देश का बारिश घाटा तुरंत खत्म हो जाएगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी.

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