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This Article is From Jul 15, 2025

देश के 80 फीसदी थर्मल पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन की लागत घटेगी, सरकार ने दी FGD मानकों में ढील

एफजीडी मानक कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से निकलने वाली गैसों में से हानिकारक गैस सल्फर डाई आक्साइड से जुड़ा है. बिजली संयंत्रों के आसपास रहने वाली आबादी को ध्यान में रखकर ये नियम सरकार ने लागू किया था, लेकिन अब इसमें छूट दी गई है.

देश के 80 फीसदी थर्मल पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन की लागत घटेगी, सरकार ने दी FGD मानकों में ढील
  • सरकार ने कोयला बेस्ड पावर प्लांटों को एफजीडी मानकों में छूट दी है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत घटेगी और ग्राहकों को सस्ती बिजली मिल सकेगी.
  • एफजीडी सिस्टम का उद्देश्य प्लांटों से निकलने वाली सल्फर डाई आक्साइड गैस की मात्रा कम करना है, जो पर्यावरण और आबादी के लिए हानिकारक होती है.
  • नई नियम के अनुसार, एफजीडी सिस्टम उन प्लांटों के लिए ही अनिवार्य होगा जो दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के दस किलोमीटर के दायरे में होंगे.
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भारत में बिजली उत्पादन की लागत में जल्द ही कमी दिखाई देगी और इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा और उन्हें सस्ती बिजली मिल सकेगी. सरकार ने कोयला आधारित सभी बिजली संयंत्रों को FGD (Flue Gas Desulphurisation) मानकों में ढील दे दी है. इससे देश के 80 फीसदी थर्मल पावर प्लांट्स को फायदा मिलेगा.

एफजीडी सिस्टम लगाना अभी तक अनिवार्य था

एफजीडी मानक थर्मल पावर प्लांटों से निकलने वाली गैसों में से हानिकारक गैस सल्फर डाई आक्साइड के उत्सर्जन से जुड़ा है. बिजली संयंत्रों के पास रहने वाली आबादी को ध्यान में रखकर ये नियम सरकार ने लागू किया था, लेकिन अब इससे छूट का नोटिफिकेशन जारी किया गया है. अभी तक सभी थर्मल बिजली संयंत्रों को प्लांट से निकलने वाली गैसों में से सल्फर डाई आक्साइड को बाहर निकालने वाला एफजीडी सिस्टम लगाना अनिवार्य था.

वैश्विक मानकों के अनुरूप किया गया बदलाव

सरकार ने दुनिया भर में अपनाए जा रहे मानकों के अनुरूप गैस उत्सर्जन नीतियों में बदलाव किया है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा है कि एफजीडी मानक अब उन्हीं बिजली संयंत्रों पर लागू होगा, जो घनी आबादी के निकट या बेहद प्रदूषित इलाकों के आसपास होंगे. 

नई अधिसूचना के अनुसार, जो पावर प्लांट 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के 10 किलोमीटर के दायरे में होंगे, उन्हें ही अपने बिजली संयंत्रों में ऐसा सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. भारत के 80 फीसदी कोयला आधारित संयंत्रों में ज्यादातर कम सल्फर वाले कोयले पर संचालित हो रहे हैं. नए नियमों के अनुसार, वो दायरे से बाहर हो जाएंगे. 

क्या कहती है नामचीन संस्थानों की रिपोर्ट?

भारत के नामचीन संस्थानों आईआईटी दिल्ली, CSIR-NEERI और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) का कहना है कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से सल्फर डाई आक्साइड का लेवल राष्ट्रीय मानकों से काफी कम है. सल्फर डाई आक्साइड का स्तर 3 से 20 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के आसपास है, जबकि राष्ट्रीय स्तर 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर का है. 

इस अध्ययन में भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप पर्यावरण के ऐसे मानकों के असर पर भी सवाल उठाया गया था. कहा गया था कि भारत के कोयले में सल्फर की मात्रा 0.5 फीसदी से भी कम है और अनुकूल मौसमी हालातों की वजह से सल्फर डाई आक्साइड का फैलाव भी कम ही होता है.

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