मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR के खिलाफ दिल्ली से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पिछले कुछ दिनों में कार्रवाई के कई अलग-अलग रूप देखने को मिले. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR दर्ज हुई, CJP के हजारों समर्थकों और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया, मेट्रो स्टेशन बंद हुए, ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगी. AISA की नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया और वहां पहुंचने के बाद CJP के आशुतोष रांका और सौरभ दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. मुंबई में इसी मुद्दे पर प्रदर्शन में शामिल अमेरिकी नागरिक और OCI कार्डधारक अभिनेता इमरान खान को अब 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस मिला है. इन कार्रवाइयों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, जिसने मेट्रो, ट्रेन, इंटरनेट और हिरासत से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई की और प्रदर्शनों से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया.

राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च की तस्वीर
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राहुल गांधी-प्रियंका गांधी पर FIR
इस सिलसिले में मामला तब और बड़ा हुआ जब INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. 8 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों में FIR दर्ज की. इसी प्रदर्शन के दौरान कई सांसदों और नेताओं समेत 91 लोगों को हिरासत में लिया गया था. पुलिस ने संसद मार्ग, चुनाव आयोग कार्यालय और जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा और बैरिकेडिंग बढ़ा दी थी.प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद सड़क पर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच टकराव की स्थिति भी बनी. राहुल गांधी ने इसके बाद भी CEC के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की बात कही थी.
10 अक्टूबर को CJP का प्रदर्शन, हजारों हिरासत में
इसके बाद 10 अक्टूबर को Cockroach Janta Party यानी CJP की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया. प्रदर्शन का मुद्दा कथित चुनावी अनियमितताएं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग थी. पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम भी किए गए थे. एक रिपोर्ट में दिन के दौरान करीब 2,500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही गई, जबकि अन्य अपडेट्स में हिरासत का आंकड़ा इससे अधिक बताया गया.CJP के अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिया गया. इसके अलावा अलग-अलग जगहों से अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी समेत तमाम विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं.
47 मेट्रो स्टेशन बंद, ट्रेनों और इंटरनेट तक पहुंचा मामला
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में आवागमन पर भी बड़ा असर पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक भारी परिवहन पाबंदियों और इंटरनेट शटडाउन के बीच प्रदर्शन हुए. दिल्ली मेट्रो के 47 स्टेशनों को करीब 25 घंटे बंद रखने के बाद दोबारा खोला गया. मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने या प्रभावित करने का मुद्दा बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. अदालत के सामने इससे जुड़ी याचिकाओं में मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने के साथ इंटरनेट तथा कथित अवैध हिरासत का सवाल भी उठाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर को निर्देश दिया था कि कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों के अधीन मेट्रो और ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चलें, इंटरनेट बाधित न हो और लोगों की आवाजाही सुचारु रहे.
नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया
10 अक्टूबर के प्रदर्शन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी प्रमुख चेहरों में रहीं. जंतर-मंतर तक पहुंचना संभव नहीं होने पर प्रदर्शनकारियों ने दूसरी जगहों पर जुटने की कोशिश की. नेहा बोरा ने दिल्ली हाट के पास प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया.नेहा ने हिरासत के दौरान सोशल मीडिया पर लिखा था कि कुछ लोगों को जेल में रखा जा सकता है, लेकिन आंदोलन को नहीं. उन्होंने समर्थकों से रोके जाने वाली जगह पर ही बैठकर प्रदर्शन करने की अपील भी की थी. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया.

चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक्शन में दिल्ली पुलिस
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा बदलाव हुआ. दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह की सूची से हटा दिया. इसके बाद वहां प्रदर्शन करने की कोशिश नई कानूनी कार्रवाई की वजह बनी. इंडियन यूथ कांग्रेस ने जंतर-मंतर के डी नोटिफिकेशन के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि CJP के बाद के विरोध कार्यक्रमों में जंतर-मंतर तक पहुंचने की कोशिश ही पुलिस कार्रवाई का आधार बनी.
जंतर-मंतर पहुंचे रांका-दास, FIR के बाद तिहाड़
13 अक्टूबर को CJP नेता आशुतोष रांका, सौरभ दास और अन्य कार्यकर्ता दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे. पुलिस ने उन्हें कथित रूप से बिना अनुमति उस क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया. पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारी उस जगह में दाखिल हुए जिसे तब तक प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह की सूची से हटाया जा चुका था.रांका और दास के खिलाफ बॉन्ड तोड़ने, कथित आपराधिक अतिक्रमण और आदेशों की अवहेलना समेत अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया. दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वे तिहाड़ जेल पहुंचे. अजिंक्य शिंदे को निजी बॉन्ड पर रिहा किया गया. इससे पहले 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के वक्त रांका, दास और अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था और बाद में शांति बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये के surety bond पर छोड़ा गया था.
मुंबई में इमरान खान हिरासत में, फिर देश छोड़ने का नोटिस
चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा. 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान भी शामिल हुए. पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया था. इसके बाद मामला उनके नागरिकता दर्जे तक पहुंच गया. इमरान खान अमेरिकी नागरिक और OCI कार्डधारक हैं. मुंबई पुलिस ने कहा कि भारतीय नागरिक नहीं होने के बावजूद राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर इमिग्रेशन कानून के तहत कार्रवाई की गई है. उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया गया है. उनके खिलाफ गावदेवी पुलिस स्टेशन में भीड़ के साथ प्रदर्शन, आदेश की अवहेलना और अन्य आरोपों से जुड़ा मामला भी दर्ज हुआ था.
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मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CCTV सुरक्षित रखने का आदेश
हिरासत, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पाबंदियां, इंटरनेट बाधित किए जाने के साथ प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों से कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए. अदालत के सामने करीब 32 याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है, जिनमें राहुल गांधी समेत कई नेताओं की याचिकाएं शामिल हैं.15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़े CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया. जंतर-मंतर को protest site की सूची से हटाने का मुद्दा भी अदालत के सामने उठा है. इसी दौरान अदालत ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के मार्च के आचरण पर भी सवाल किया और कहा कि इस पर स्पष्टीकरण देना होगा.
धर्मेंद्र प्रधान वाले आंदोलन से इस बार तस्वीर कैसे अलग?
यहीं इस पूरी स्टोरी का कॉन्ट्रास्ट बनता है. नेहा बोरा पहले उस छात्र आंदोलन में भी शामिल रही थीं, जिसमें शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ था और जो तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंचा था.इस बार चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ आंदोलन में तस्वीर अलग रही. पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR, फिर CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा घेरा और बड़े पैमाने पर हिरासत, मेट्रो-ट्रेन और इंटरनेट पर पाबंदियों का विवाद, नेहा बोरा समेत प्रदर्शनकारियों की हिरासत, जंतर-मंतर का protest site के रूप में de-notification और वहां पहुंचने पर आशुतोष रांका-सौरभ दास के खिलाफ मामला और न्यायिक हिरासत जैसे घटनाक्रम लगातार सामने आए. मुंबई में प्रदर्शन में शामिल इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस भी इसी घटनाक्रम की अगली कड़ी बना. इन कार्रवाइयों की वैधानिकता और पुलिस के तौर-तरीकों से जुड़े कई सवाल अब अदालतों के सामने हैं.
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