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राहुल गांधी के आरोपों पर ECI का फैक्ट चेक, कहा- CEC ने अकेले नहीं बदला था फॉर्म 6, SC भी दे चुका है मंजूरी

चुनाव आयोग के अनुसार बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था. यह आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत पहल नहीं था, बल्कि आयोग के सभी सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी किया गया था.

राहुल गांधी के आरोपों पर ECI का फैक्ट चेक, कहा- CEC ने अकेले नहीं बदला था फॉर्म 6, SC भी दे चुका है मंजूरी
फाइल फोटो
NDTV

बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. आयोग ने राहुल गांधी के उस दावे को भ्रामक बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किया. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिया गया था और इसे सुप्रीम कोर्ट भी सही ठहरा चुका है.

क्या है पूरा मामला?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध तरीके से बदलाव किया. उनका दावा था कि यह बदलाव एकतरफा ढंग से किया गया और इससे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं.

राहुल गांधी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक X हैंडल के जरिए जवाब दिया. आयोग ने कहा कि राहुल गांधी का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग के अनुसार बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था. यह आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत पहल नहीं था, बल्कि आयोग के सभी सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी किया गया था.

आयोग ने यह भी कहा कि इस आदेश को कानूनी चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इसे बरकरार रखा. यानी जिस प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत पहले ही वैध मान चुकी है.

फॉर्म-6 को लेकर भी दिया जवाब

चुनाव आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में 26 सितंबर 2026 की प्रेस नोट संख्या 120 का भी हवाला दिया. आयोग के मुताबिक, इस प्रेस नोट के बिंदु 1(iii) में साफ तौर पर कहा गया था कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ जो घोषणा-पत्र जोड़ा गया है, उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है.

आयोग का कहना है कि ऐसे में फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते और जनता के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं.

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