फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के कथित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. जांच एजेंसी के अनुसार, फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के माध्यम से बिना वास्तविक माल की आवाजाही के ITC हासिल किया गया और अन्य संस्थाओं को ट्रांसफर किया गया. तलाशी के दौरान कुल 3.6 करोड़ कैश मिला. ED अब बरामद रकम के स्रोत, फर्जी कंपनियों के नेटवर्क और कथित वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है.
फर्जी बिल का होता था खेल
ED की यह कार्रवाई Jambudwip Exports & Imports Ltd. से जुड़े कथित फर्जी ITC (Input Tax Credit) नेटवर्क की जांच के तहत की जा रही है. जांच एजेंसी के मुताबिक इस नेटवर्क में बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही के फर्जी इनवॉइस और फर्जी ई-वे बिल तैयार किए गए और उनके आधार पर फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया और दूसरी कंपनियों को पास ऑन किया गया. ED की तलाशी के दौरान इस मामले में बड़ी नकदी बरामदगी भी सामने आई है.

ED Raid: बरामद हुए कैश की तस्वीर
जांच में क्या-क्या मिला?
ED सूत्रों के मुताबिक मुजफ्फरनगर स्थित न्यू राणा हाउस और गाजियाबाद में सुधा स्टील से 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद हुई है. ED के मुताबिक अलग-अलग परिसरों से बरामद कुल नकदी 3.6 करोड़ रुपये है. एजेंसी अब इस रकम के सोर्स और कथित फर्जी ITC नेटवर्क से इसके संबंध की जांच कर रही है.
GST अधिकारियों की जांच के मुताबिक इन लेन-देन में वास्तविक माल की खरीद-बिक्री या आवाजाही के पर्याप्त सबूत नहीं मिले. आरोप है कि सिर्फ कागजों पर लेन-देन दिखाने के लिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए गए.

ED Raid: इन ठिकानों पर हुई छापेमारी
नेटवर्क खंगाल रही है ED
ED के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में कई ऐसी कंपनियों और संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया, जिनके अस्तित्व या वास्तविक कारोबारी गतिविधियों पर सवाल हैं. जांच में सर्कुलर ट्रांजैक्शन, तेजी से फंड की लेयरिंग और अलग-अलग खातों से कैश निकासी के संकेत मिले हैं. यानी पैसा एक कंपनी से दूसरी कंपनी, फिर तीसरी और दूसरी संबंधित संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि असली लाभार्थी और रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके. ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग और कंपनियां शामिल थीं और फर्जी ITC से हासिल रकम का वास्तविक लाभ किसे मिला.
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