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23 IPHONE का एक IMEI नंबर, 11 मिनट में कोलकाता से दिल्ली पहुंचा माल... ED का पंजाब मंत्री संजीव पर चार्जशीट में खुलासा

पंजाब सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता संजीव अरोड़ा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल कर फर्जी मोबाइल एक्सपोर्ट, IMEI गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के सरकारी लाभ लेने के आरोप लगाए हैं.

23 IPHONE का एक IMEI नंबर, 11 मिनट में कोलकाता से दिल्ली पहुंचा माल... ED का पंजाब मंत्री संजीव पर चार्जशीट में खुलासा
पंजाब सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता संजीव अरोड़ा.

Sanjeev Arora Money Laundering Case: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनकी कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. ED का आरोप है कि कंपनी ने मोबाइल फोन के फर्जी एक्सपोर्ट के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की और सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठाया.

जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी ने कथित तौर पर फर्जी खरीद, नकली दस्तावेज, शेल कंपनियों और कागजी लेन-देन के जरिए अवैध धन को वैध कारोबारी आय के रूप में दिखाने की कोशिश की. ED का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में करीब 102 करोड़ रुपये की अपराध से कमाई गई रकम का पता चला है.

कागजों में दुबई भेजे गए फोन भारत में बिके

ED के अनुसार HSRL ने पहले कागजों पर करोड़ों रुपये के Apple iPhone और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने का दावा किया. इसके बाद इन मोबाइल फोन को दुबई भेजने का रिकॉर्ड तैयार किया गया. कंपनी ने इन एक्सपोर्ट के आधार पर IGST रिफंड, एक्सपोर्ट रेमिटेंस और ड्यूटी ड्रॉबैक जैसे सरकारी लाभ हासिल किए.

जांच के दौरान Apple India से मोबाइल फोन के IMEI नंबरों की जानकारी ली गई. इस तकनीकी जांच में सामने आया कि 97 ऐसे iPhone, जिन्हें रिकॉर्ड में दुबई एक्सपोर्ट बताया गया था, वे बाद में भारत में ही एक्टिव हुए और भारतीय ग्राहकों द्वारा इस्तेमाल किए गए. ED का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि ये फोन वास्तव में देश से बाहर भेजे ही नहीं गए थे.

58 iPhone पहले ही हो चुके थे एक्टिव

जांच में ED को 58 ऐसे iPhone मिले जिनके दस्तावेजों में उन्हें Non-Activated यानी बिल्कुल नया बताया गया था. लेकिन Apple के रिकॉर्ड से पता चला कि ये फोन एक्सपोर्ट की तारीख से पहले ही भारत में एक्टिव हो चुके थे.

ED का कहना है कि यह तथ्य एक्सपोर्ट दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाता है. एजेंसी के मुताबिक मोबाइल फोन के रिकॉर्ड में हुई यह गड़बड़ी कथित फर्जी एक्सपोर्ट की ओर इशारा करती है.

एक ही IMEI नंबर से दो बार एक्सपोर्ट 

ED की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा 23 मोबाइल फोन के IMEI नंबर को लेकर हुआ. एजेंसी के मुताबिक 23 ऐसे फोन मिले जिनका एक ही IMEI नंबर दो अलग-अलग शिपिंग बिलों में दर्ज था.

यानी जांच एजेंसी के अनुसार एक ही मोबाइल फोन को दो बार एक्सपोर्ट किया हुआ दिखाया गया. दोनों शिपमेंट में एक ही विदेशी खरीदार कंपनी Fortbel Telecom FZCO का नाम दर्ज था. ED का कहना है कि इससे एक्सपोर्ट दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं.

11 मिनट में पहुंचे 54 iPhone 

ED ने चार शिपिंग बिलों की गहन जांच की. इसमें कई ऐसी बातें सामने आईं जिन्हें एजेंसी ने वास्तविक परिस्थितियों में संभव नहीं बताया है. एक मामले में रिकॉर्ड के अनुसार 54 iPhone की खेप को केवल 11 मिनट में रिसीव करना, हर फोन का IMEI नंबर जांचना, पैकिंग करना और फिर कस्टम अधिकारियों के सामने एक्सपोर्ट के लिए पेश करना दिखाया गया. ED का कहना है कि इतनी कम अवधि में यह पूरी प्रक्रिया पूरी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.

कोलकाता से दिल्ली पहुंचा माल 

ED ने एक अन्य शिपिंग बिल की जांच में पाया कि iPhone और MacBook की खेप कोलकाता से दिल्ली पहुंची दिखाई गई. रिकॉर्ड के अनुसार माल 25 जुलाई 2023 को कोलकाता से रवाना हुआ और अगले दिन दोपहर 1:16 बजे दिल्ली पहुंच गया.

ED के मुताबिक कोलकाता और दिल्ली के बीच करीब 1,485 किलोमीटर की दूरी है. एजेंसी का कहना है कि दर्ज समय के अनुसार यह दूरी तय करने के लिए वाहन को लगातार करीब 84 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलना पड़ता, जो सामान्य कमर्शियल ट्रांसपोर्ट में संभव नहीं है.

कर्मचारियों के बयान से भी बढ़ीं मुश्किलें

ED ने कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ भी की. एजेंसी के अनुसार HSRL के ऑपरेशन मैनेजर सचिन शर्मा और अकाउंटेंट सुनील कुमार ने बताया कि घिटोरनी स्थित कार्यालय में कभी मोबाइल फोन की कोई खेप नहीं आती थी.

उनके अनुसार वहां न मोबाइल की जांच होती थी, न स्टॉक रखा जाता था और न ही पैकिंग की जाती थी. कर्मचारियों ने बताया कि उनका काम केवल बिल, ई-वे बिल और बैंकिंग दस्तावेज तैयार करना था. उन्होंने यह भी कहा कि सप्लायर कंपनियों को कोई औपचारिक Purchase Order जारी नहीं किए जाते थे और अधिकतर बातचीत WhatsApp के जरिए होती थी.

शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग का आरोप

ED ने अपनी चार्जशीट में कई सप्लायर कंपनियों का भी जिक्र किया है. इनमें SK Enterprises, Global Traders, Worldwide Electronics, GMG Tradelink Pvt. Ltd., Shree Lakshmi Enterprises, Mobile Style, US Enterprises, Anjani International और Maruti Nandan Telecom LLP जैसी कंपनियां शामिल हैं.

जांच एजेंसी का दावा है कि इनमें से कई कंपनियों का वास्तविक कारोबार बेहद कम था या वे केवल कागजी लेन-देन के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं. ED के अनुसार इन कंपनियों के जरिए बैंकिंग चैनल में पैसे की लेयरिंग और फर्जी बिलिंग की गई.

102 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा

ED के मुताबिक जांच में अब तक करीब 102 करोड़ रुपये की अपराध से कमाई गई रकम सामने आई है. इसमें 86.87 करोड़ रुपये की एक्सपोर्ट रेमिटेंस, 15.63 करोड़ रुपये का IGST रिफंड और करीब 48.53 लाख रुपये का ड्यूटी ड्रॉबैक शामिल है.

एजेंसी का कहना है कि अगर सरकारी इंसेंटिव और टैक्स लाभ को हटा दिया जाए तो इन सौदों में कोई वास्तविक कारोबारी फायदा नहीं बचता. ED का दावा है कि कथित कारोबार का मकसद व्यापार करना नहीं बल्कि सरकारी लाभ हासिल करना और अवैध धन को वैध दिखाना था. ED का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन लोग शामिल थे, विदेशों में पैसों का लेन-देन कैसे हुआ और क्या अपराध से कमाई गई रकम 102 करोड़ रुपये से अधिक है.

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